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शब्दों के मास्टर थे पूर्व प्रधानमंत्री : वृंदा करात
Updated Mon, 20 Aug 2018 12:40 AM IST
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शब्दों के मास्टर थे पूर्व प्रधानमंत्री : वृंदा करात
महिला आरक्षण बिल को लेकर हुई थी मुलाकात
पवन कुमार सेठी
गुरुग्राम। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी शब्दों के मास्टर थे। वह अपने विचारों को इस तरह से प्रकट करते थे कि कोई चाहते हुए भी उनका विरोध नहीं कर सकता था। यह बात रविवार को मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की नेता व राज्यसभा की पूर्व सदस्य वृंदा करात ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में कही।
उन्होंने भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के साथ अपनी खट्टी-मीठी यादों को साझा करते हुए बताया कि एक बार डेलीगेशन के साथ उनसे मिलने गईं थीं। उस वक्त वह देश के प्रधानमंत्री थे। महिला आरक्षण बिल को लेकर चर्चा हुई। इस पर वाजपेयी जी ने कहा था कि वह तो पक्ष में हैं, लेकिन बाकी घटक इसके पक्ष में होंगे या नहीं यह बहुत बड़ी समस्या है। इस पर वृंदा करात ने वाजपेयी से कहा था कि उनकी पार्टी में ही ऐसे लोग हैं जो इस बिल को नहीं चाहते हैं। इस पर वाजपेयी ने जवाब नहीं दिया था। हकीकत यही हुई। सुषमा स्वराज ने इसके लिए प्रयास किया, लेकिन वाजपेयी जी के कार्यकाल में यह बिल पारित नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध के बावजूद भी उनके भाषणों का काफी अच्छा अनुभव रहा है। अपनी विचारधारा का जिस तरह से वह संदेश देते थे उस विचारधारा की वह कट्टर विरोधी थीं, लेकिन जिस रूप में वह पेश करते थे उनका विरोध नहीं कर पाती थीं। इसके अलावा वह दूसरों से बातचीत में बेहद ही नम्र थे।
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शब्दों के मास्टर थे पूर्व प्रधानमंत्री : वृंदा करात
महिला आरक्षण बिल को लेकर हुई थी मुलाकात
पवन कुमार सेठी
गुरुग्राम। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी शब्दों के मास्टर थे। वह अपने विचारों को इस तरह से प्रकट करते थे कि कोई चाहते हुए भी उनका विरोध नहीं कर सकता था। यह बात रविवार को मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की नेता व राज्यसभा की पूर्व सदस्य वृंदा करात ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में कही।
उन्होंने भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के साथ अपनी खट्टी-मीठी यादों को साझा करते हुए बताया कि एक बार डेलीगेशन के साथ उनसे मिलने गईं थीं। उस वक्त वह देश के प्रधानमंत्री थे। महिला आरक्षण बिल को लेकर चर्चा हुई। इस पर वाजपेयी जी ने कहा था कि वह तो पक्ष में हैं, लेकिन बाकी घटक इसके पक्ष में होंगे या नहीं यह बहुत बड़ी समस्या है। इस पर वृंदा करात ने वाजपेयी से कहा था कि उनकी पार्टी में ही ऐसे लोग हैं जो इस बिल को नहीं चाहते हैं। इस पर वाजपेयी ने जवाब नहीं दिया था। हकीकत यही हुई। सुषमा स्वराज ने इसके लिए प्रयास किया, लेकिन वाजपेयी जी के कार्यकाल में यह बिल पारित नहीं हुआ।
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उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध के बावजूद भी उनके भाषणों का काफी अच्छा अनुभव रहा है। अपनी विचारधारा का जिस तरह से वह संदेश देते थे उस विचारधारा की वह कट्टर विरोधी थीं, लेकिन जिस रूप में वह पेश करते थे उनका विरोध नहीं कर पाती थीं। इसके अलावा वह दूसरों से बातचीत में बेहद ही नम्र थे।
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