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Gurugram News: प्रदेश में 5000 लोगों को मिला दुकानों का मालिकाना हक
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मुख्यमंत्री ने शहरी स्वामित्व योजना के तहत संपत्ति प्रमाण पत्र वितरित किए
फोटो
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। प्रदेश के पांच हजार दुकानदारों को बृहस्पतिवार को उनकी दुकान का मालिकाना हक मिल गया है। ये लोग बीस साल से सरकारी संपत्ति (दुकान) पर काबिज थे लेकिन इनके पास मालिकाना हक नहीं था। प्रदेश सरकार ने ऐसे दुकानदारों के लिए मुख्यमंत्री शहरी स्वामित्व योजना शुरू की थी। मुख्यमंत्री नायब सिंह ने बृहस्पतिवार को प्रदेश के 5000 दुकानदारों को मुख्यमंत्री शहरी स्वामित्व योजना के तहत दुकानों के संपत्ति प्रमाण पत्र वितरित किए। वहीं, लाल डोरा के अंदर स्थित संपत्तियों (प्लाट, दुकान व भवन) में प्रदेश भर में करीब दो लाख लोगों को लाभ मिला है
मानेसर में आयोजित राज्य स्तरीय मुख्यमंत्री शहरी स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री वितरण एवं शहरी लाल डोरा सम्पत्ति प्रमाण पत्र वितरण समारोह में नायब सिंह ने लाभार्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों में ऐसे लोगों के पास सरकारी संपत्ति (दुकान) तो थी लेकिन उनका मालिकाना हक नहीं था। विवाद को लेकर कोर्ट में कई मामले लंबे समय से चले आ रहे थे, जिसके कारण लोगों में एक भय का माहौल भी था कि कहीं उन्हें दुकान से वंचित न होना पड़े। प्रदेश सरकार ने समस्या का समाधान करते हुए लोगों को इस डर से मुक्त करने का कार्य किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2019 के चुनाव के दौरान हमने चुनावी घोषणा पत्र में ऐसे सभी लोगों को उनकी संपत्ति का मालिकाना हक देने का वादा किया था और 5000 लोग लाभान्वित हुए है। मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यापारी छोटा हो या बड़ा, सभी का एक ही सपना होता है कि उसकी स्वयं की दुकान हो और यह सपना पूरा हो रहा है। आज के बाद जो भी व्यापारी 20 सालों से ज्यादा किराए पर था, अब कलेक्टर रेट पर संपत्ति को अपने नाम कर मालिक बन सकेंगे।
लाल डोरा वाली संपत्ति
वहीं, लाल डोरा के अंदर स्थित संपत्तियों (प्लाट, दुकान व भवन) में से प्रदेश भर में लगभग दो लाख नागरिकों को लाभ मिला है। सीएम ने कहा कि उनकी संपत्ति से उन्हें कोई नहीं हटा सकता,अपनी सम्पत्तियों के मालिक बन गए हैं। यह वे सम्पत्तियां हैं, जिनका राजस्व अधिकारियों के पास अधिकार का रिकॉर्ड नहीं था। इस प्रकार की संपत्ति का सर्वे कराकर लोगों को मालिकाना हक दिया गया है।
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मुख्यमंत्री शहरी स्वामित्व योजना
शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने जनवरी 2021 में एक अधिसूचना जारी की थी। जिसमें 20 साल से अधिक पट्टे/ किराये की सरकारी दुकानों पर काबिज लोगों को आवेदन कर जरूरी औपचारिकताएं पूरी करनी थी। कागजात सही मिले,उन्हें दुकानों का मालिकाना हक मिला है। ये लोगों शहर और कस्बों में नगर निगम या नगर परिषद या अन्य विभागों से दुकानें किराये पर आवंटित हुई थी और लोग लंबे समय से उन पर काबिज है।
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अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। प्रदेश के पांच हजार दुकानदारों को बृहस्पतिवार को उनकी दुकान का मालिकाना हक मिल गया है। ये लोग बीस साल से सरकारी संपत्ति (दुकान) पर काबिज थे लेकिन इनके पास मालिकाना हक नहीं था। प्रदेश सरकार ने ऐसे दुकानदारों के लिए मुख्यमंत्री शहरी स्वामित्व योजना शुरू की थी। मुख्यमंत्री नायब सिंह ने बृहस्पतिवार को प्रदेश के 5000 दुकानदारों को मुख्यमंत्री शहरी स्वामित्व योजना के तहत दुकानों के संपत्ति प्रमाण पत्र वितरित किए। वहीं, लाल डोरा के अंदर स्थित संपत्तियों (प्लाट, दुकान व भवन) में प्रदेश भर में करीब दो लाख लोगों को लाभ मिला है
मानेसर में आयोजित राज्य स्तरीय मुख्यमंत्री शहरी स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री वितरण एवं शहरी लाल डोरा सम्पत्ति प्रमाण पत्र वितरण समारोह में नायब सिंह ने लाभार्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों में ऐसे लोगों के पास सरकारी संपत्ति (दुकान) तो थी लेकिन उनका मालिकाना हक नहीं था। विवाद को लेकर कोर्ट में कई मामले लंबे समय से चले आ रहे थे, जिसके कारण लोगों में एक भय का माहौल भी था कि कहीं उन्हें दुकान से वंचित न होना पड़े। प्रदेश सरकार ने समस्या का समाधान करते हुए लोगों को इस डर से मुक्त करने का कार्य किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2019 के चुनाव के दौरान हमने चुनावी घोषणा पत्र में ऐसे सभी लोगों को उनकी संपत्ति का मालिकाना हक देने का वादा किया था और 5000 लोग लाभान्वित हुए है। मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यापारी छोटा हो या बड़ा, सभी का एक ही सपना होता है कि उसकी स्वयं की दुकान हो और यह सपना पूरा हो रहा है। आज के बाद जो भी व्यापारी 20 सालों से ज्यादा किराए पर था, अब कलेक्टर रेट पर संपत्ति को अपने नाम कर मालिक बन सकेंगे।
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लाल डोरा वाली संपत्ति
वहीं, लाल डोरा के अंदर स्थित संपत्तियों (प्लाट, दुकान व भवन) में से प्रदेश भर में लगभग दो लाख नागरिकों को लाभ मिला है। सीएम ने कहा कि उनकी संपत्ति से उन्हें कोई नहीं हटा सकता,अपनी सम्पत्तियों के मालिक बन गए हैं। यह वे सम्पत्तियां हैं, जिनका राजस्व अधिकारियों के पास अधिकार का रिकॉर्ड नहीं था। इस प्रकार की संपत्ति का सर्वे कराकर लोगों को मालिकाना हक दिया गया है।
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मुख्यमंत्री शहरी स्वामित्व योजना
शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने जनवरी 2021 में एक अधिसूचना जारी की थी। जिसमें 20 साल से अधिक पट्टे/ किराये की सरकारी दुकानों पर काबिज लोगों को आवेदन कर जरूरी औपचारिकताएं पूरी करनी थी। कागजात सही मिले,उन्हें दुकानों का मालिकाना हक मिला है। ये लोगों शहर और कस्बों में नगर निगम या नगर परिषद या अन्य विभागों से दुकानें किराये पर आवंटित हुई थी और लोग लंबे समय से उन पर काबिज है।