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आयुध डिपो के प्रतिबंधित दायरे में भी हो गई 47 रजिस्ट्रियां
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कृष्ण कुमार
गुरुग्राम। आयुध डिपो के प्रतिबंधित दायरे में भी अवैध रूप से 47 रजिस्ट्रियां हो गई हैं। इसका खुलासा मंडलायुक्त की ओर से की गई जांच में हुआ है। ये सभी रजिस्ट्रियां पिछले पांच वर्ष में हुई हैं। अब इन रजिस्ट्रियों को करने वाले तहसीलदार व पटवारी के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है ताकि उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सके। जांच में यह भी सामने आया है कि करीब दस रजिस्ट्रियां तो किसी दूसरे के नाम पर भी ट्रांसफर हो चुकी है।
दरअसल, आयुध डिपो के प्रतिबंधित दायरे में बने मकानों को हटाने के लिए हाईकोर्ट में मामला विचाराधीन है जबकि सुरक्षा के लिहाज से आयुध डिपो के 900 मीटर दायरे में किसी भी प्रकार का निर्माण व मकान बनाने की प्रतिबंध है, लेकिन गुरुग्राम में राजनीतिक पहुंच के लोगों ने यहां कॉलोनियां बसा दी है। 900 मीटर तो दूर यहां लोगों ने आयुध डिपो की चारदीवारी के पास ही मकान बना लिए हैं। 900 मीटर दायरा प्रतिबंधित होने के बाद भी लोगों ने यहां अवैध रूप से सरकारी जमीनों की ही रजिस्ट्रियां करवा ली है, जबकि सरकार की पॉलिसी के अनुसार 900 मीटर में किसी भी प्रकार की रजिस्ट्री नहीं हो सकती है।
ये होता है नियम
अगर कोई भी व्यक्ति शहर में आयुध डिपो के आसपास जमीन खरीदता है तो उसे निगम से एनओसी लेनी होती है कि वह जमीन 900 मीटर दायरे से बाहर है, लेकिन यहां तो तत्कालीन तहसीलदार ने सभी नियमों को ताक पर रखकर 47 प्लॉटों की रजिस्ट्री कर दी है। अब तत्कालीन तहसीलदार व पटवारी जांच की तलवार लटक गई है। आयुध डिपो दायरे में अब भी लगातार अवैध कॉलोनियां कटने का काम जोरों पर जारी है।
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गुरुग्राम। आयुध डिपो के प्रतिबंधित दायरे में भी अवैध रूप से 47 रजिस्ट्रियां हो गई हैं। इसका खुलासा मंडलायुक्त की ओर से की गई जांच में हुआ है। ये सभी रजिस्ट्रियां पिछले पांच वर्ष में हुई हैं। अब इन रजिस्ट्रियों को करने वाले तहसीलदार व पटवारी के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है ताकि उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सके। जांच में यह भी सामने आया है कि करीब दस रजिस्ट्रियां तो किसी दूसरे के नाम पर भी ट्रांसफर हो चुकी है।
दरअसल, आयुध डिपो के प्रतिबंधित दायरे में बने मकानों को हटाने के लिए हाईकोर्ट में मामला विचाराधीन है जबकि सुरक्षा के लिहाज से आयुध डिपो के 900 मीटर दायरे में किसी भी प्रकार का निर्माण व मकान बनाने की प्रतिबंध है, लेकिन गुरुग्राम में राजनीतिक पहुंच के लोगों ने यहां कॉलोनियां बसा दी है। 900 मीटर तो दूर यहां लोगों ने आयुध डिपो की चारदीवारी के पास ही मकान बना लिए हैं। 900 मीटर दायरा प्रतिबंधित होने के बाद भी लोगों ने यहां अवैध रूप से सरकारी जमीनों की ही रजिस्ट्रियां करवा ली है, जबकि सरकार की पॉलिसी के अनुसार 900 मीटर में किसी भी प्रकार की रजिस्ट्री नहीं हो सकती है।
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ये होता है नियम
अगर कोई भी व्यक्ति शहर में आयुध डिपो के आसपास जमीन खरीदता है तो उसे निगम से एनओसी लेनी होती है कि वह जमीन 900 मीटर दायरे से बाहर है, लेकिन यहां तो तत्कालीन तहसीलदार ने सभी नियमों को ताक पर रखकर 47 प्लॉटों की रजिस्ट्री कर दी है। अब तत्कालीन तहसीलदार व पटवारी जांच की तलवार लटक गई है। आयुध डिपो दायरे में अब भी लगातार अवैध कॉलोनियां कटने का काम जोरों पर जारी है।
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