{"_id":"61686fb2bad0db4a5f52024b","slug":"200-families-face-eviction-crisis-in-nbc-green-view-gurgaon-news-noi6104342108","type":"story","status":"publish","title_hn":"एनबीसी ग्रीन व्यू में 200 परिवारों पर आशियाना खाली करने का संकट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एनबीसी ग्रीन व्यू में 200 परिवारों पर आशियाना खाली करने का संकट
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गुरुग्राम। सेक्टर-37डी स्थित एनबीसी ग्रीन व्यू में 200 परिवारों को अपने घर खाली करने के आदेश से परेशानी खड़ी हो गई है। भारत सरकार के नवरत्न में शामिल बिल्डर कंपनी एनबीसीसी के बिल्डर ने यहां तीन टॉवरों में रह रहे सभी लोगों को 10 नवंबर तक अपने-अपने फ्लैट खाली करने के लिए नोटिस दिया है।
नोटिस में कहा गया है कि आईआईटी दिल्ली की रिपोर्ट में सोसाइटी के टॉवरों को रहने लायक नहीं बताया गया है, यह जर्जर हैं। इसलिए खाली करना होगा। सोसाइटी के लोगों का आरोप है कि बिल्डर साफ तौर पर उन्हें धमकी दे रहा है। यह नोटिस डीटीपी, हरेरा या अन्य किसी अथॉरिटी को संज्ञान में लेकर नहीं दिया गया है। घर खाली करके वह लोग कहां जाएंगे।
एनबीसीसी के बिल्डर द्वारा 13 अक्तूबर को जारी किए गए नोटिस में सेक्टर-37डी के ग्रीन व्यू में रह रहे सभी 100 सामान्य व 100 ईडब्लयूएस परिवारों को फ्लैट खाली करने के लिए कहा गया है। नोटिस के माध्यम से ही बताया गया है कि सोसाइटी की इमारतों के घटिया निर्माण की जांच आईआईटी दिल्ली से कराई गई है, जिसमें यह निकलकर आया है कि यह इमारतें रहने लायक नहीं हैं। ऐसे में यहां कोई हादसा हो इससे पहले लोगों को इसे छोड़ देना ही बेहतर है।
विज्ञापन
नोटिस में इसका जिक्र नहीं
अपने फ्लैट को छोड़कर परिवार कहां जाएं, इसका खर्चा कौन देगा, कब तक इमारतों का दोबारा से सही निर्माण हो सकेगा, इतने महंगे फ्लैट यहां लोगों ने खरीदे हैं, इनकी कीमत कौन लौटाएगा आदि इन सब बातों का जिक्र नोटिस में नहीं है। नोटिस को लेकर निवासियों में अफरातफरी मची हुई है। उनका कहना है कि ऐसे कैसे वह अपने फ्लैट को खाली कर दें। यहां जीवनभर की कमाई से घर लिया है, उसे इस तरह से खाली करने का बिल्डर को अधिकार नहीं है। मामले को लेकर व डीटीपीई को पत्र लिखने सहित पुलिस को शिकायत दे रहे हैं।
2017 में बनी सोसाइटी
यहां रहने वाले निवासी यादवेंद्र ने बताया कि 18 एकड़ में फैली एनबीसी ग्रीन व्यू सोसाइटी को 2017 में डीटीपी विभाग से ऑक्यूपेशन सर्टीफिकेट (ओसी) मिली थी। इसके बाद इसके फ्लैट्स को लोगों को बेचा गया। यहां कुल सात टॉवर हैं। जिनमें से सिर्फ तीन टॉवरों मेें ही फ्लैट्स बेचे गए हैं, बाकी चार टॉवरों में अभी निर्माण कार्य पूरे नहीं हुए हैं। फ्लैट्स खरीदने वाले ज्यादातर लोग सरकारी विभागों से सेवानिवृत्त हैं, पीएफ, पेंशन व बचत के सारे रुपयों से इन लोगों ने यहां घर खरीदे हैं। पिछले तीन-चार दिनों से एनबीसी की टीम चार से पांच लोग निवासियों के फ्लैट्स पर दरवाजा खटखटाकर नोटिस थमा रहे हैं। आरोप है कि फ्लैटस खाली करने के लिए उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित भी कर रहे हैं।
सोसाइटी में जरूरी सुविधाओं की पहले से ही कमी
सोसाइटी के लोगों ने बताया कि यहां मुख्य रोड का अभी तक निर्माण न होने, बेसमेंट में पानी भरने, मेंटेनेंस के काम न होने सहित निर्माण कार्यों में घटिया सामग्री होने की पहले से ही शिकायत रही है। इसे लेकर सोसाइटी के लोगों ने विभागों में शिकायत करने के साथ-साथ प्रदर्शन तक किया है। अब तक कोई सुधार नहीं हुआ। अब सुधार के नाम पर फ्लैट खाली करने का फरमान जारी कर दिया गया है। नोटिस से यहां सभी परिवारों में परेशानी व डर का माहौल है। अभी तक किसी भी जिम्मेदार विभाग की प्रतिक्रिया भी नहीं आई है।
एनबीसी ग्रीन व्यू में टावरों की मरम्मत के लिए लोगों को फ्लैट खाली करने के लिए नोटिस दिया गया है। 10 नवंबर तक फ्लैट खाली करने होंगे। मरम्मत के बाद फ्लैट्स लोगों को सौंप दिए जाएंगे।
- संजीव कुमार शर्मा, मैनेजर (मार्केटिंग), एनबीसीसी ग्रीन व्यू।
विज्ञापन
नोटिस में कहा गया है कि आईआईटी दिल्ली की रिपोर्ट में सोसाइटी के टॉवरों को रहने लायक नहीं बताया गया है, यह जर्जर हैं। इसलिए खाली करना होगा। सोसाइटी के लोगों का आरोप है कि बिल्डर साफ तौर पर उन्हें धमकी दे रहा है। यह नोटिस डीटीपी, हरेरा या अन्य किसी अथॉरिटी को संज्ञान में लेकर नहीं दिया गया है। घर खाली करके वह लोग कहां जाएंगे।
विज्ञापन
एनबीसीसी के बिल्डर द्वारा 13 अक्तूबर को जारी किए गए नोटिस में सेक्टर-37डी के ग्रीन व्यू में रह रहे सभी 100 सामान्य व 100 ईडब्लयूएस परिवारों को फ्लैट खाली करने के लिए कहा गया है। नोटिस के माध्यम से ही बताया गया है कि सोसाइटी की इमारतों के घटिया निर्माण की जांच आईआईटी दिल्ली से कराई गई है, जिसमें यह निकलकर आया है कि यह इमारतें रहने लायक नहीं हैं। ऐसे में यहां कोई हादसा हो इससे पहले लोगों को इसे छोड़ देना ही बेहतर है।
विज्ञापन
नोटिस में इसका जिक्र नहीं
अपने फ्लैट को छोड़कर परिवार कहां जाएं, इसका खर्चा कौन देगा, कब तक इमारतों का दोबारा से सही निर्माण हो सकेगा, इतने महंगे फ्लैट यहां लोगों ने खरीदे हैं, इनकी कीमत कौन लौटाएगा आदि इन सब बातों का जिक्र नोटिस में नहीं है। नोटिस को लेकर निवासियों में अफरातफरी मची हुई है। उनका कहना है कि ऐसे कैसे वह अपने फ्लैट को खाली कर दें। यहां जीवनभर की कमाई से घर लिया है, उसे इस तरह से खाली करने का बिल्डर को अधिकार नहीं है। मामले को लेकर व डीटीपीई को पत्र लिखने सहित पुलिस को शिकायत दे रहे हैं।
2017 में बनी सोसाइटी
यहां रहने वाले निवासी यादवेंद्र ने बताया कि 18 एकड़ में फैली एनबीसी ग्रीन व्यू सोसाइटी को 2017 में डीटीपी विभाग से ऑक्यूपेशन सर्टीफिकेट (ओसी) मिली थी। इसके बाद इसके फ्लैट्स को लोगों को बेचा गया। यहां कुल सात टॉवर हैं। जिनमें से सिर्फ तीन टॉवरों मेें ही फ्लैट्स बेचे गए हैं, बाकी चार टॉवरों में अभी निर्माण कार्य पूरे नहीं हुए हैं। फ्लैट्स खरीदने वाले ज्यादातर लोग सरकारी विभागों से सेवानिवृत्त हैं, पीएफ, पेंशन व बचत के सारे रुपयों से इन लोगों ने यहां घर खरीदे हैं। पिछले तीन-चार दिनों से एनबीसी की टीम चार से पांच लोग निवासियों के फ्लैट्स पर दरवाजा खटखटाकर नोटिस थमा रहे हैं। आरोप है कि फ्लैटस खाली करने के लिए उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित भी कर रहे हैं।
सोसाइटी में जरूरी सुविधाओं की पहले से ही कमी
सोसाइटी के लोगों ने बताया कि यहां मुख्य रोड का अभी तक निर्माण न होने, बेसमेंट में पानी भरने, मेंटेनेंस के काम न होने सहित निर्माण कार्यों में घटिया सामग्री होने की पहले से ही शिकायत रही है। इसे लेकर सोसाइटी के लोगों ने विभागों में शिकायत करने के साथ-साथ प्रदर्शन तक किया है। अब तक कोई सुधार नहीं हुआ। अब सुधार के नाम पर फ्लैट खाली करने का फरमान जारी कर दिया गया है। नोटिस से यहां सभी परिवारों में परेशानी व डर का माहौल है। अभी तक किसी भी जिम्मेदार विभाग की प्रतिक्रिया भी नहीं आई है।
एनबीसी ग्रीन व्यू में टावरों की मरम्मत के लिए लोगों को फ्लैट खाली करने के लिए नोटिस दिया गया है। 10 नवंबर तक फ्लैट खाली करने होंगे। मरम्मत के बाद फ्लैट्स लोगों को सौंप दिए जाएंगे।
- संजीव कुमार शर्मा, मैनेजर (मार्केटिंग), एनबीसीसी ग्रीन व्यू।