जलभराव और जाम से डगमगा गया उद्योग और कॉरपारेट जगत का आत्मविश्वास
- गुडग़ांव के विकास पर इन्होंने उठाया बड़ा सवाल
- गुडग़ांव के विकास पर इन्होंने उठाया बड़ा सवाल
- कहा मनोहर सरकार बुनियादी सुविधाएं तक नहीं दे पा रही
- हो रही हैं सिर्फ बड़ी-बड़ी बातें नहीं दिख रहा काम
- उद्योगों को 500 करोड़ से अधिक का कारोबार प्रभावित
- आईटी-आईटीईएस कंपनियों का काम प्रभावित
- इन्हें जाम और बारिश के कारण करनी पड़ी दो दिन की छुट्टी घोषित
- उद्योगों के कच्चे माल की आवाजाही बुरी तरह से प्रभावित
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विस्तार
साइबर सिटी की हालत देख यहां के उद्योग और कॉरपोरेट जगत का आत्मविश्वास बुरी तरह से डगमगा गया है। इन सभी ने गुडग़ांव के विकास पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। इनका कहना है इससे पहले यहां की इतनी बुरी स्थिति नहीं हुई थी।
प्रदेश की मनोहर सरकार ने हैपनिंग हरियाणा में निवेशकों से जो भी वायदे किए थे उसे बारिश का पानी बहा ले गया। उद्योगों को डेढ़ दिनों में 500 करोड़ रुपये से अधिक का झटका लगा है। कच्चा माल उद्योगों तक पहुंच नहीं पा रहा है। 80 फीसदी यूनिटों में काम पूरी तरह ठप है। देश-विदेश जाने वाले माल की डिलेवरी भी प्रभावित हुई है। इससे गुडग़ांव की इमेज दुनिया भर में खराब हो रही है।
उद्यमियों और कॉरपोरेट के लोगों का कहना है कि प्रदेश सरकार उद्योगों और आम लोगों को जब बुनियादी सुविधाएं नहीं दे सकती तो नए निवेशकों को क्या सुविधा दे पाएगी। जाम और बारिश के कारण उद्योगों में कर्मचारी से लेकर अधिकारी तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
उनका कहना है कि क्या ऐसा ही गुडग़ांव हैपनिंग हरियाणा का प्रतीक है। अगर ऐसा ही माहौल रहा तो यहां के उद्योग गुजरात, राजस्थान, हिमाचल और अन्य राज्यों में शिफ्ट हो जाएंगे। गुडग़ांव की हालत इतनी खराब है कि यहां की आईटी-आईटीईएस कंपनियों ने अपने यहां दो दिन की छुट्टी घोषित करनी पड़ी है।
कंपनियों को अपने यहां छुट्टी करनी पड़ी
दिल्ली व एनसीआर क्षेत्रों से आकर गुडग़ांव की इन कंपनियों में काम करने वाले हजारों लोग बृहस्पतिवार की शाम से आधी रात तक गुडग़ांव की सड़कों पर जाम में फंसे रहे। इसे देखते हुए आई-आईटीएस कंपनियों को अपने यहां छुट्टी करनी पड़ी। सोहना रोड स्थित एक नामी आईटी कंपनी में अधिकारी सुचित्रा खन्ना का कहना है कि वह गुडग़ांव के दिल्ली अपने घर 10 घंटे में पहुंचे। आम दिनों में यह सफर मात्र 40 से 50 मिनट का होता है।
बारिश और जाम की स्थिति गुडग़ांव में कितनी भयावह है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कुछ उद्यमी मानेसर से अपने उद्योगों को शिफ्ट करने की बात कर रहे हैं। वाटर लॉगिंग के कारण मानेसर के कई कंपनियों के बेसमेंट में रखे करोड़ों का औद्योगिक उत्पाद बेकार हो गए। मानेसर के उद्यमी जेके तिवारी का कहना है कि जलभराव के कारण उत्पादन का भारी नुकसान हुआ है।
हरियाणा इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के चेयरमैन किशन कपूर का कहना है कि पिछली और इस बार की प्रदेश सरकार ने गुडग़ांव में जमीनी स्तर पर कुछ भी नहीं किया है। बारिश ने तो बस सरकार के बड़े-बड़े दावे और वायदे की पोल खोल रही है। यही यहां की हकीकत है। गुडग़ांव के उद्यमियों के पास लंदन, अमेरिका, कनलडा सहित अन्य देशों से गुडग़ांव की स्थिति जानने के लिए फोन आ रहे हैं।
क्या कहना है उद्योग और कॉरपोरेट दिग्गजों का
क्लाइंट को मेल भेज स्थिति की दी जानकारी
देश-विदेश के बायर्स को गुडग़ांव के हालात की जानकारी देने के लिए ई-मेल भेजे जा जरहे हैं। उन्हें बताया जा रहा है कि उनके माल मी डिलेवरी में देरी होगी। साथ ही ट्रांसपोर्टरों को भी गुडग़ांव की ओर गाड़ी भेजने से रोकने को कहा गया है।
क्या कहना है उद्योग और कॉरपोरेट दिग्गजों का
गुडग़ांव में पैदा हुई यह भयावह स्थिति सरकारी मशीनरी के बुरी तरह से फेल होने का प्रमाण है। इससे उद्योगों का आत्मविश्वास डगमगा गया है। इंडस्ट्री की धड़कन थम़ सी गई है। उद्योग विहार इंडस्ट्रियल हब में आधी से अधिक यूनिटों में काम ठप है। यहां न तो काम करने वाले पहुंच पा रहे हैं और न ही कच्चा माल आ पा रहा है। विदेश से जो ऑर्डर आए हैं उन्हें पूरा करने की प्रक्रिया में भारी अड़चन आ रही है।-अनिमेष सक्सेना, अध्यक्ष उद्योग विहार इंडस्ट्रियल एसोसिएशन
बेहतर यह होगा कि हरियाणा सरकार हैपनिंग हरियाणा की सिर्फ बात नहीं करे। उद्योगों की बेहतरी और सुविधा के लिए अपनी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाए। अभी एक-दो घंटे की बारिश में गुडग़ांव की सांसे थम सी गई हैं, अगर इससे बड़ी परेशानी आई तो क्या होगा। प्रशासन को चाहिए कि इसे आपदा घोषित कर दे। जिससे जिन लोगों का नुकसान हुआ है उन्हें इसका मुआवजा मिल सके।-एस के आहूजा, महासचिव गुडग़ांव चैबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज
दुनिया भर की मीडिया में गुडग़ांव के इस स्थिति का जिक्र हो रहा है। ऐसे में यहां कौन निवेश करने आएगा। सरकार को जमीनी स्तर पर काम करने की जरूरत है। मानेसर के 80 फीसदी उद्योगों में काम ठप है। कर्मचारी जाम होने के कारण काम पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। पूंजी निवेश करने कोई तभी आएगा जब उन्हें सुविधा मिलेगी।-मनोज त्यागी, महासचिव आईएमटी इंडस्ट्रियल एसोसिएशन
गुडग़ांव में पॉलिसी पैरालाइसिस का माहौल है। आईटी-आईटीईएस और कॉरपोरेट कंपनियों में दो दिनों से काम नहीं हो रहा है। सरकार को जमीन पर काम करना होगा। सिर्फ गुडग़ांव को गुरुग्राम बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। आईटी-आईटीईएस कंपनियों में जल भराव और जाम के कारण दो दिनों की छुट्टी करनी पड़ी है। साइबर पार्क में काम करने वालों को कार छोड़ पांच किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ा है।-प्रदीप यादव, अध्यक्ष हाइटेक इंडिया
डेढ़ दिनों में गुडग़ांव के उद्योगों को 500 करोड़ से अधिक का झटका लगा है। तकरीबन सभी औद्योगिक यूनिटों में काम प्रभावित हुआ है। प्रदेश सरकार काम नहीं सिर्फ बात कर रही है। इससे काम चलने वाला नहीं है। अभी बारिश ने विकास के दावे को पोल खोल आइना दिखाया है। आगे सुधार नहीं किया गया तो यहां से उद्योगों का पलायन हो सकता है।-परवीन यादव, अध्यक्ष गुडग़ांव उद्योग एसोसिएशन
आज गुडग़ांव में जो स्थिति बनी है वह अनियोजित परिणाम का हिस्सा है। सरकारी एजेंसियों को सबसे पहले प्राथमिक स्तर पर काम करना चाहिए। जिससे बुनियादी ढांचे को मजबूती मिल सके। तभी गुडग़ांव को स्मार्ट सिटी बनाया जा सकता है।-डीएस रावत, महासचिव एसोचैम