नए सिंधू की तैयारी में खेल विभाग, पीपीपी मोड़ पर खिलाड़ियों को तराशने की तैयारी
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रियो ओलंपिक में पीवी सिंधु के रजत पदक जीतने से बैडमिंटन को मजबूती मिलेगी। खिलाड़ियों के साथ सरकार का भी ध्यान अब इस ओर जाएगा। प्रदेश के खेल मंत्री अनिल विज के रियो दौरे से उम्मीद जताई जा रही है कि वह वापस आकर हरियाणा में भी बैडमिंटन को लेकर कुछ खास कदम उठाएंगे। ताकि पीवी सिंधु जैसे खिलाड़ी यहां से निकल सकें।
रजत पदक जीतने के साथ ही बैडमिंटन खिलाड़ियों के लिए पीवी सिंधु आदर्श बन गई हैं। अब हर कोई पीवी सिंधु बनने के लिए कदम बढ़ा रहा है। वहीं, इस पदक के साथ ही खेल विभाग और बैडमिंटन एसोसिएशन ने भी नए सिरे से बैडमिंटन को लेकर सोचना शुरू कर दिया है। खेल विभाग पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत खिलाड़ियों को तराशने की योजना बना रहा है। इसके लिए निजी खेल अकादमी और संस्थानों से आवेदन भी मांगे हैं।
बैडमिंटन की स्थिति नहीं है ठीक
प्रदेश में बैडमिंटन के खिलाड़ी तो हैं लेकिन सरकारी व्यवस्था ठीक नहीं है। कई जिलों में कोच की कमी है तो कहीं इंडोर स्टेडियम तक नहीं है। गुड़गांव में न तो कोच है और न ही कोई इंडोर कोर्ट। जबकि फरीदाबाद में महज एक कोच है और सिंगल कोर्ट। मेवात में यह खेल ही मयस्सर नहीं है। जिला खेल अधिकारी पारस राम का कहना है कि जिले के लिए बैडमिंटन कोच की मांग की गई है। इंडोर स्टेडियम का निर्माण चल रहा है। अभी फिलहाल नगर निगम के बनाए कोर्ट का इस्तेमाल किया जा रहा है।
पीपीपी मोड़ पर खिलाड़ियों को तराशने की तैयारी
जिले में खिलाड़ियों को तराशने के लिए दस नर्सरी बनाने का निर्णय लिया गया है। इसमें पीपीपी मोड़ के तहत खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए खेल विभाग ने आवेदन भी मांगे हैं। पहले बैडमिंटन इसमें शामिल नहीं था, अब खेल विभाग इसमें बैडमिंटन को भी शामिल करने की योजना बना रहा है। ताकि यहां के खिलाड़ी को भी कोई गोपीचंद मिले जो सिंधु को तैयार कर सकें। नर्सरी सेंटर खोलने के लिए विभाग 1.20 लाख का बजट देगा।
पीवी सिंधु खिलाड़ियों के लिए आदर्श बनकर उभरी हैं। विभाग भी उस जैसे खिलाड़ियों को पैदा करने में जुटा है। खिलाड़ियों की सुविधा के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। बैडमिंटन के कोच की भर्ती भी हो रही है। नर्सरी के जरिये भी उन्हें तराशने की योजना है।- जगदीप सिंह, महानिदेशक, खेल विभाग
खिलाड़ियों की प्रतिक्रिया
पीवी सिंधु के ओलंपिक में पहुंचने से हम लोगों को फायदा होगा। विदेश जाने और बेहतरीन कोचिंग के लिए स्पांसर की जरूरत होती है। इसके बाद हमलोगों के लिए आसानी हो जाएगी। दिनेश कुमार, अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी
बैडमिंटन के लिए कही भी कोई इंतजाम नहीं हैं। खिलाड़ियों को खुद मेहनत करनी पड़ती है। हमें भी गोपीचंद सर जैसे कोच चाहिए, तभी अपनी प्रतिभा को और निखार सकेंगे। सिंधु के पदक ने कई खिलाड़ियों को हौसला दिया है। कामदीप सिंह, अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी