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गुजरात पुलिस ने किया फर्जी प्लेसमेंट एजेंसी का पर्दाफाश, 6 लड़कियों सहित सात गिरफ्तार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा
Updated Sun, 30 Sep 2018 02:24 PM IST
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गुजरात पुलिस ने शहर में चल रही एक फर्जी प्लेसमेंट एजेंसी का पर्दाफाश किया है। इसमें काम करने वाले आरोपी नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से मोटी रकम वसूलते थे। आरोपियों ने गुजरात के कई लोगों के साथ ठगी की है।
गुजरात पुलिस ने नोएडा पुलिस की मदद से सेक्टर-27 स्थित कॉल सेंटर से छह लड़कियों समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया है। आठ आरोपी अभी फरार हैं। गुजरात के दो युवकों ने अहमदाबाद में एयरलाइंस में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगे जाने का मुकदमा दर्ज करा रखा था। पुलिस आशंका जता रही है कि आरोपियों ने सैकड़ों युवक-युवतियों से ठगी की है।
पुलिस के अनुसार, अहमदाबाद निवासी विशाल मखीजा बीकॉम पास हैं। विकास ने जुलाई में ऑनलाइन नौकरी के लिए आवेदन किया था। 23 जुलाई को उनके पास एयरलाइंस में नौकरी दिलवाने के लिए फोन आया। कॉलर ने दो माह के भीतर नौकरी लगवाने का दावा किया।
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विशाल और उसके दोस्त ने फोन करने वाले शख्स को अपने दस्तावेज ई-मेल कर दिए। इसके बाद फोन पर चार लड़कियों ने उनका साक्षात्कार लिया। आरोपियों ने नोएडा के सेक्टर-18 में ऑफिस बताया। इसके बाद आरोपियों ने दोनों को फर्जी नियुक्ति पत्र भेजकर एक लाख रुपये की मांग की।
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गुजरात पुलिस ने नोएडा पुलिस की मदद से सेक्टर-27 स्थित कॉल सेंटर से छह लड़कियों समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया है। आठ आरोपी अभी फरार हैं। गुजरात के दो युवकों ने अहमदाबाद में एयरलाइंस में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगे जाने का मुकदमा दर्ज करा रखा था। पुलिस आशंका जता रही है कि आरोपियों ने सैकड़ों युवक-युवतियों से ठगी की है।
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पुलिस के अनुसार, अहमदाबाद निवासी विशाल मखीजा बीकॉम पास हैं। विकास ने जुलाई में ऑनलाइन नौकरी के लिए आवेदन किया था। 23 जुलाई को उनके पास एयरलाइंस में नौकरी दिलवाने के लिए फोन आया। कॉलर ने दो माह के भीतर नौकरी लगवाने का दावा किया।
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विशाल और उसके दोस्त ने फोन करने वाले शख्स को अपने दस्तावेज ई-मेल कर दिए। इसके बाद फोन पर चार लड़कियों ने उनका साक्षात्कार लिया। आरोपियों ने नोएडा के सेक्टर-18 में ऑफिस बताया। इसके बाद आरोपियों ने दोनों को फर्जी नियुक्ति पत्र भेजकर एक लाख रुपये की मांग की।
विशाल और उसके दोस्त ने आरोपियों के दिए गए खाते में 61 हजार रुपये जमा करा दिए। इसके बाद आरोपियों ने दोनों दोस्तों का ऑनलाइन टेस्ट लिया। इस टेस्ट में दोनों को फेल कर दिया गया। टेस्ट में पास कराने के लिए आरोपियों ने और पैसों की मांग की।
इस पर दोनों युवकों को ठगे जाने का शक हुआ। विशाल ने एक माह पहले अहमदाबाद के एक थाने में ठगी का मुकदमा दर्ज कराया था। गुजरात पुलिस की टीम इस फर्जीवाड़े की जांच कर रही थी। पुलिस को पीड़ित छात्रों ने रिकॉर्डिग भी दी थी।
इस कारण पुलिस को जांच में आसानी हुई और शुक्रवार को नोएडा पहुंची। गुजरात पुलिस ने सेक्टर-27 में चल रहे फर्जी प्लेसमेंट एजेंसी स्मार्ट कॅरियर सोल्यूशन पर छापेमारी कर छह लड़कियों समेत सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बसंत कुंज दिल्ली निवासी साक्षी, सुभाष पार्क दिल्ली निवासी पूजा साहू, मयूर विहार निवासी सोनाक्षी, कनॉट प्लेस निवासी प्रतिभा, सेक्टर-31 नोएडा निवासी भावना व रवीना सिंह और गणेश नगर दिल्ली निवासी आशीष कुमार के रूप में हुई है।
इस पर दोनों युवकों को ठगे जाने का शक हुआ। विशाल ने एक माह पहले अहमदाबाद के एक थाने में ठगी का मुकदमा दर्ज कराया था। गुजरात पुलिस की टीम इस फर्जीवाड़े की जांच कर रही थी। पुलिस को पीड़ित छात्रों ने रिकॉर्डिग भी दी थी।
इस कारण पुलिस को जांच में आसानी हुई और शुक्रवार को नोएडा पहुंची। गुजरात पुलिस ने सेक्टर-27 में चल रहे फर्जी प्लेसमेंट एजेंसी स्मार्ट कॅरियर सोल्यूशन पर छापेमारी कर छह लड़कियों समेत सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बसंत कुंज दिल्ली निवासी साक्षी, सुभाष पार्क दिल्ली निवासी पूजा साहू, मयूर विहार निवासी सोनाक्षी, कनॉट प्लेस निवासी प्रतिभा, सेक्टर-31 नोएडा निवासी भावना व रवीना सिंह और गणेश नगर दिल्ली निवासी आशीष कुमार के रूप में हुई है।
दूरस्थ राज्यों के लोगों को बनाते थे निशाना
आरोपी दूर के राज्यों में रहने वाले लोगों को निशाना बनाते थे। ये लोग वेबसाइट से नौकरी के इच्छु़क युवक-युवतियों के बायोडाटा डाउनलोड कर लेते थे। इसके बाद गुजरात, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल जैसे दूरस्थ राज्यों के अभ्यर्थियों को फोन कर फंसाते थे, ताकि ठगी होने के बाद नोएडा तक आने की संभावना कम हो।
हर दो महीने मेें बदलते थे ठिकाना
आरोपी दो से तीन महीने में अपना ठिकाना बदल लेते थे और मोबाइल नंबर भी दूसरा ले लेते थे, ताकि पीड़ित का संपर्क उनसे नहीं हो सके। इस बार भी ऐसा ही करने वाले थे, लेकिन गुजरात पुलिस की तेजी का अहसास ठगों को नहीं हुआ। स्थानीय युवकों के साथ धोखाधड़ी इसलिए नहीं की जाती थी, क्योंकि वह ऑफिस आकर पूरी जांच पड़ताल भी करते।
हर दो महीने मेें बदलते थे ठिकाना
आरोपी दो से तीन महीने में अपना ठिकाना बदल लेते थे और मोबाइल नंबर भी दूसरा ले लेते थे, ताकि पीड़ित का संपर्क उनसे नहीं हो सके। इस बार भी ऐसा ही करने वाले थे, लेकिन गुजरात पुलिस की तेजी का अहसास ठगों को नहीं हुआ। स्थानीय युवकों के साथ धोखाधड़ी इसलिए नहीं की जाती थी, क्योंकि वह ऑफिस आकर पूरी जांच पड़ताल भी करते।