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केजरीवाल जी, देखें किसमें कितना है दम

Thu, 23 Jan 2014 02:42 PM IST
अखिलेश कुमार/ अमर उजाला, नई दिल्ली
अखिलेश कुमार/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 23 Jan 2014 02:42 PM IST
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guest teachers are challenging arvind kejriwal

आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल सत्याग्रह, धरना और आंदोलन करके एक साल में मुख्यमंत्री बन गए। धरने की ताकत समझ में आई।

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अब हर साल 10 मई को बेरोजगार होने वाले शिक्षकों ने धरने व सफेद टोपी की ताकत का परीक्षण मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर ही शुरू किया है। लेकिन इनकी कोई सुनने वाला नहीं है।

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केजरीवाल का पुलिस व केन्द्र सरकार के खिलाफ धरना बेशक आंशिक मांग माने जाने पर खत्म हो गया, लेकिन शिक्षकों का धरना आठवें दिन तक भी जारी है। शिक्षकों का कहना है जब तक मांगें नहीं मानी जाएगी, यहां से नहीं उठेंगे।
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आम आदमी पार्टी को वोट देकर पक्का होने के लिए सरकार बनवाई, अब पक्का करना तो दूर मुख्यमंत्री या कोई अन्य मंत्री मिलने भी नहीं आ रहा है। इतना ही नहीं सचिवालय के बाहर जो शौचालय है, उसे भी बंद करा दिया जाता है। एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रवीण कुमार बताते हैं कि कई शिक्षक तीन-चार दिन से यहीं हैं। खाने के लिए रात में एक रेहड़ी वाले को रुकने के लिए कहा है।

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अतिथि शिक्षकों का दर्द को बांटने के लिए कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अरविंदर सिंह, पूर्व मंत्री हारून यूसुफ, पूर्व संसदीय सचिव मुकेश शर्मा व महिला प्रदेश अध्यक्ष ओनिका मेहरोत्रा समेत तमाम नेता पहुंचे। इतना ही नहीं आप के बागी विधायक विनोद कुमार बिन्नी ने भी समर्थन दिया है। बुधवार को सचिवालय के सामने साथ बैठे और आगे भी खुलकर साथ आने व धरने में शामिल होने की घोषणा कर गए हैं। एसोसिएशन के बैनर तले दिल्ली सचिवालय के गेट नंबर-6 के सामने 15 जनवरी को धरना शुरू किया गया था।

...और हम नौकरी पाने के लिए धरना दे रहे हैं
एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रवीण कुमार ने कहा कि अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि धरना स्थल पर शौचालय की व्यवस्था नहीं की गई। टेंट लगाने नहीं दिया, खाना लाने नहीं दिया। जबकि वे पुलिस वालों की नौकरी छीनने के लिए धरने पर बैठे थे।

कहा कि हम तो नौकरी पक्की करने की मांग लेकर बैठे हैं। फिर हमें सुविधाएं क्यों नहीं दी जा रही है। हमसे बातचीत क्यों नहीं की जा रही है। प्रदेश सरकार ने भी शौचालय बंद करा दिए। ठंड से बचने के लिए आग जलाने की छूट नहीं है। ये कैसा लोकतंत्र है।

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