केजरीवाल की खांसी बनी डॉक्टरों की चुनौती
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केजरीवाल डॉक्टरों की सुनते नहीं हैं और उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही है।
दिल्ली में रेल भवन के पास धरने के दौरान केजरीवाल ने अपनी दवाओं को ब्रेक कर दिया।
ये दवाएं जनवरी के पहले हफ्ते से उनकी खांसी और शुगर लेवल को नियंत्रित करने के लिए दी जा रही थीं। इसके कारण अब उनकी परेशानी और बढ़ गई है।
दी जा रही थी इनहेल्ड स्टेरॉयड
लगातार आ रही खांसी पर गत छह जनवरी को केजरीवाल एक पल्मोनोलॉजिस्ट को दिखाया गया था।
उनकी खांसी को नियंत्रण में लाने के लिए इनहेल्ड स्टेरॉयड दी जा रही थी।
डॉक्टरों का मकसद था कि खांसी का साइकिल ब्रेक कर दिया जाए। एडवांस इलाज शुरू होने के बाद भी साइकिल ब्रेक नहीं हुआ।
इसके पहले गत दो जनवरी से केजरीवाल को इंसुलिन दिया जा रहा है, जिससे उनके शुगर लेवल को स्थिर किया जा सके। धरने के दौरान केजरीवाल ने इनमें से कोई भी दवाई नहीं ली।
'अरविंद को समझाना मुश्किल'
आराम करने की सलाह देने पर वह कहते हैं कि सेहत के लिए अपनी जिम्मेदारी नहीं भूल सकते हैं।
मैं डॉक्टर होने के साथ ही अरविंद का मित्र भी हूं, अब ऐसे में क्या किया जाए।
हमारी कोशिश है कि अरविंद की खांसी का साइकिल ब्रेक हो जाए, जिससे दोबारा खांसी नहीं आए।