6 साल, 7 जज, 57 गवाह... अब जाकर मिला गुड़िया को इंसाफ, अब ऐसे बिता रही जिंदगी
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जहां निर्भया मामले में अदालत ने 10 माह में मामले की सुनवाई पूरी कर आरोपियों को दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई थी। वहीं इस मामले की सुनवाई पूरी होने में छह साल से अधिक लग गए। यह मामला निर्भया के मामले की छाया बनकर रह गया।
जहां निर्भया के परिवार को राजनीतिक मदद मिली थी तो वहीं इस केस को बहुत जल्दी भुला दिया गया। मामले में पीड़ित पक्ष के वकीलों आनंद कुमार व वीरेंद्र वर्मा ने कहा कि केस की त्वरित व प्रतिदिन सुनवाई नहीं हुई। इसकी वजह से फैसला आने में छह साल से अधिक समय लग गया।
हालांकि बच्ची के पिता ने कोर्ट के फैसले पर संतोष जाहिर किया है। उसने कहा कि यों तो केस की सुनवाई दो साल में हो जानी चाहिये थी लेकिन खुशी है कि छह साल बाद इंसाफ मिल गया। जानिए मासूम गुड़िया के पिता ने परिवार के बारे में क्या बताया और बच्ची आज 6 साल बाद कैसी जिंदगी बिता रही है....
छह साल, सात जज, 57 गवाह, जानिए कैसी है बच्ची
एकतरफ जहां ट्रायल कोर्ट ने 2012 के निर्भया कांड में महज 10 महीने बाद 2013 में ही दोषियों को फांसी की सजा सुना दी थी, वहीं मासूम गुड़िया को निचली अदालत से न्याय मिलने में ही छह साल लग गए।
इस दौरान सात जजों ने सुनवाई की और अभियोजन ने 57 गवाहों को पेश किया। आरोपियों की गवाही में ही अदालत को 5 दिसंबर, 2018 से 25 सितंबर, 2019 तक करीब एक साल का समय लगा।
पिता ने बताया छह साल बाद कैसा है बच्ची का हाल
मेरी पत्नी घर पर बच्ची के साथ है। जब सुबह कोर्ट आ रहा था तो पत्नी ने भगवान से इंसाफ की प्रार्थना की। उसने कहा कि बच्ची इस घटना को पूरी तरह भूल चुकी है, इसलिये हम उसे इस बारे में कुछ नहीं बतायेंगे।
हम उसे वह दर्दनाक घटना याद दिलाना नहीं चाहते। इसलिए बेहतर होगा कि उसे केस के फैसले के बारे में कुछ न बताया जाये। बच्ची के पिता ने कहा कि दोषियों को फांसी की सजा के लिये भगवान से प्रार्थना करेगा।
यह वारदात निर्भया केस के बाद हुई थी और इसके विरोध में महिला व छात्राओं ने इंडिया गेट, पुलिस मुख्यालय, प्रधानमंत्री आवास व सोनिया गांधी के आवास पर विरोध प्रदर्शन किया था।
लोगों का जनसमूह तख्तियां लेकर एम्स के बाहर पहुंचा था और वहां तत्कालीन पुलिस आयुक्त नीरज कुमार का पुतला फूंकते हुए उन्हें हटाने की मांग की थी। इस घटना के संदर्भ में तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह ने कहा था कि इस तरह के अपराध से निजात पाने के लिये एकजुट होकर प्रयास की जरूरत है।
गुड़िया मामले की क्रोनोलॉजी
- 15 अप्रैल, 2013: पांच साल की बच्ची को घर के बाहर से अगवा कर सामूहिक दुष्कर्म, दोषी फरार
- 17 अप्रैल : अगवा होने के करीब 40 घंटे बाद बच्ची बरामद
- 20 अप्रैल : मामले में दोषी मनोज शाह को बिहार से किया गिरफ्तार
- 22 अप्रैल : दूसरा दोषी प्रदीप कुमार भी बिहार से गिरफ्तार
- 24 मई : प्रदीप व मनोज के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने आरोप पत्र किया दाखिल
- 11 जुलाई : अदालत आरोपियों के खिलाफ नाबालिग से दुष्कर्म, अप्राकृतिक यौन संबंध, अपहरण, हत्या की कोशिश, साक्ष्य नष्ट करना तथा पोक्सो अधिनियम की धाराओं में तय किये थे आरोप।
- 21 मार्च 2014 : प्रदीप ने खुद को नाबालिग बताते हुये हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
- 12 अप्रैल 2017 : हाईकोर्ट ने प्रदीप को नाबालिग किया घोषित, केस को सुनवाई के लिये जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड भेजा
- 2018 : हाईकोर्ट ने प्रदीप के दावे की दोबारा पड़ताल करने का दिया निर्देश। निचली अदालत ने पड़ताल के बाद प्रदीप को बालिग घोषित किया।
- 7 जनववरी 2020 : विशेष अदालत ने फैसला रखा सुरक्षित
- 18 जनवरी 2020 : प्रदीप व मनोज को दिया दोषी करार