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Delhi NCR News: दिल्ली के औद्योगिक क्षेत्रों में होगा हरियाली का ऑडिट, हर पेड़ को मिलेगी यूनिक पहचान
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करीब पांच हजार पेड़ों की गिनती कर तैयार होगा डिजिटल रिकॉर्ड, आगे इसी आधार पर बढ़ेगा ग्रीन कवर
आदित्य पाण्डेय
नई दिल्ली। दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं बुनियादी ढांचा विकास निगम झंडेवालान, ओखला, कीर्ति नगर, लॉरेंस रोड और पटपड़गंज समेत प्रमुख औद्योगिक इलाकों में करीब पांच हजार पेड़ों की गिनती और उनकी अलग पहचान तय करेगा। इसका मकसद पेड़ों की संख्या जानने के साथ भविष्य में हर पेड़ की निगरानी, पौधरोपण और हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए स्थायी आधार तैयार करना है।
अब तक औद्योगिक क्षेत्रों में मौजूद पेड़ों का कोई एकीकृत और प्रमाणित रिकॉर्ड नहीं है। इस वजह से यह पता लगाना मुश्किल होता है कि किस इलाके में कितने पेड़ हैं, कितने नए लगाए गए और कितने खत्म हो गए। अब हर पेड़ को अलग नंबर मिलेगा। इससे भविष्य में किसी पेड़ के कटने, सूखने या नए पेड़ लगाने की निगरानी आसान होगी। पर्यावरण से जुड़े फैसले भी वास्तविक आंकड़ों के आधार पर लिए जा सकेंगे।
आगे की योजना का बनेगा आधार
यह अभ्यास सिर्फ गिनती तक सीमित नहीं रहेगा। निगम इसी आधार पर औद्योगिक क्षेत्रों में बड़े स्तर पर पौधरोपण, खाली स्थानों के विकास और हरित पट्टियां मजबूत करेगा। जहां पेड़ों की कमी होगी, वहां नए पौधे लगाए जाएंगे। साथ ही पहले से लगाए गए पौधों के संरक्षण और उनकी जीवित रहने की स्थिति का आकलन भी आसान होगा।
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पटपड़गंज में बदलेगी तस्वीर
योजना के तहत पटपड़गंज औद्योगिक क्षेत्र में 16,238 वर्ग मीटर जमीन को नए सिरे से विकसित किया जाएगा। यहां 15 सेंटीमीटर तक उगी झाड़ियों और अनावश्यक वनस्पति को हटाकर नए पेड़ों के लिए नई जमीन तैयार की जाएगी, ताकि वहां व्यवस्थित हरियाली विकसित की जा सके। आम, जामुन, गूलर जैसे फलदार पौधे लगाए जाएंगे। इससे क्षेत्र की साफ-सफाई, सौंदर्य और पर्यावरणीय गुणवत्ता में सुधार आने की उम्मीद है।
पारदर्शिता और विशेषज्ञों की निगरानी
इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सख्त नियम लागू किए गए हैं। काम की निगरानी अनुभवी बागवानी विशेषज्ञ करेंगे और स्थल पर कृषि या वनस्पति विज्ञान का प्रशिक्षित विशेषज्ञ मौजूद रहेगा। सरकार ने साफ किया है कि निगम का उद्देश्य केवल आंकड़े जुटाना नहीं होगा, बल्कि औद्योगिक क्षेत्रों में हरियाली बचाने और विस्तार के लिए लंबे समय तक की व्यवस्था विकसित करना रहेगा। दिल्ली के अधिकांश औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण, कंक्रीट और सीमित खुले स्थान बड़ी चुनौती हैं। ऐसे में हर पेड़ का वैज्ञानिक रिकॉर्ड तैयार होने से पहली बार यह स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी कि किस इलाके में हरियाली कितनी है और उसे बढ़ाने की जरूरत कहां सबसे अधिक है। यही रिकॉर्ड आने वाले वर्षों में औद्योगिक क्षेत्रों को अधिक हराभरा बनाने की पूरी रणनीति का आधार बनेगा।
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आदित्य पाण्डेय
नई दिल्ली। दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं बुनियादी ढांचा विकास निगम झंडेवालान, ओखला, कीर्ति नगर, लॉरेंस रोड और पटपड़गंज समेत प्रमुख औद्योगिक इलाकों में करीब पांच हजार पेड़ों की गिनती और उनकी अलग पहचान तय करेगा। इसका मकसद पेड़ों की संख्या जानने के साथ भविष्य में हर पेड़ की निगरानी, पौधरोपण और हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए स्थायी आधार तैयार करना है।
अब तक औद्योगिक क्षेत्रों में मौजूद पेड़ों का कोई एकीकृत और प्रमाणित रिकॉर्ड नहीं है। इस वजह से यह पता लगाना मुश्किल होता है कि किस इलाके में कितने पेड़ हैं, कितने नए लगाए गए और कितने खत्म हो गए। अब हर पेड़ को अलग नंबर मिलेगा। इससे भविष्य में किसी पेड़ के कटने, सूखने या नए पेड़ लगाने की निगरानी आसान होगी। पर्यावरण से जुड़े फैसले भी वास्तविक आंकड़ों के आधार पर लिए जा सकेंगे।
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आगे की योजना का बनेगा आधार
यह अभ्यास सिर्फ गिनती तक सीमित नहीं रहेगा। निगम इसी आधार पर औद्योगिक क्षेत्रों में बड़े स्तर पर पौधरोपण, खाली स्थानों के विकास और हरित पट्टियां मजबूत करेगा। जहां पेड़ों की कमी होगी, वहां नए पौधे लगाए जाएंगे। साथ ही पहले से लगाए गए पौधों के संरक्षण और उनकी जीवित रहने की स्थिति का आकलन भी आसान होगा।
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पटपड़गंज में बदलेगी तस्वीर
योजना के तहत पटपड़गंज औद्योगिक क्षेत्र में 16,238 वर्ग मीटर जमीन को नए सिरे से विकसित किया जाएगा। यहां 15 सेंटीमीटर तक उगी झाड़ियों और अनावश्यक वनस्पति को हटाकर नए पेड़ों के लिए नई जमीन तैयार की जाएगी, ताकि वहां व्यवस्थित हरियाली विकसित की जा सके। आम, जामुन, गूलर जैसे फलदार पौधे लगाए जाएंगे। इससे क्षेत्र की साफ-सफाई, सौंदर्य और पर्यावरणीय गुणवत्ता में सुधार आने की उम्मीद है।
पारदर्शिता और विशेषज्ञों की निगरानी
इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सख्त नियम लागू किए गए हैं। काम की निगरानी अनुभवी बागवानी विशेषज्ञ करेंगे और स्थल पर कृषि या वनस्पति विज्ञान का प्रशिक्षित विशेषज्ञ मौजूद रहेगा। सरकार ने साफ किया है कि निगम का उद्देश्य केवल आंकड़े जुटाना नहीं होगा, बल्कि औद्योगिक क्षेत्रों में हरियाली बचाने और विस्तार के लिए लंबे समय तक की व्यवस्था विकसित करना रहेगा। दिल्ली के अधिकांश औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण, कंक्रीट और सीमित खुले स्थान बड़ी चुनौती हैं। ऐसे में हर पेड़ का वैज्ञानिक रिकॉर्ड तैयार होने से पहली बार यह स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी कि किस इलाके में हरियाली कितनी है और उसे बढ़ाने की जरूरत कहां सबसे अधिक है। यही रिकॉर्ड आने वाले वर्षों में औद्योगिक क्षेत्रों को अधिक हराभरा बनाने की पूरी रणनीति का आधार बनेगा।