ग्रीन टैक्स हुआ दो गुना, सड़क पर आधे रह गए वाहन
राजधानी में ग्रीन टैक्स वसूलने से पर्यावरण की दृष्टि से अच्छे परिणाम दिखने लगे हैं। राजधानी में करीब 30 प्रतिशत व्यावसायिक वाहन कम आने कम हो गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत ग्रीन टैक्स दोगुना होने से व्यावसायिक वाहनों की संख्या पहले की तुलना में 50 प्रतिशत कम होने का अनुमान है।
तीनों नगर निगम के लिए टोल टैक्स वसूलने वाली कंपनी ने व्यावसायिक वाहनों की संख्या कम होने का दावा किया है। उसके अनुसार राजधानी में व्यावसायिक वाहन 30 प्रतिशत कम हो गए हैं, इसके चलते उसने तीनों नगर निगम को टोल टैक्स भी कम देना शुरू कर दिया।
दक्षिणी निगम जो हर सप्ताह 10 करोड़ रुपये जमा कराती थी लेकिन ग्रीन टैक्स की वसूली शुरू होने के बाद कंपनी केवल सात करोड़ रुपये ही जमा करा रही है। कंपनी का कहना है कि ग्रीन टैक्स की वसूली के चलते व्यावसायिक वाहन आने कम हो गए हैं। इस कारण उनकी आय में भी गिरावट आई है।
ग्रीन टैक्स से निगमों की आय पर असर
राजधानी में ग्रीन टैक्स की वसूली आरंभ होने से तीनों नगर निगम मुसीबत में फंस गई है। एक ओर टोल टैक्स के रूप में उनकी आय कम हो गई है, वहीं दूसरी ओर कंपनी से अनुबंध के तहत राशि लेने के लिए उसे कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ गया है।
इसके लिए उसे बेवजह अपनी तिजोरी से राशि निकालनी पड़ गई। इतना ही नहीं, नगर निगम के खिलाफ टोल टैक्स वसूलने वाली कंपनी भी कोर्ट चली गई है, क्योंकि टोल टैक्स की राशि 30 प्रतिशत कम देने पर नगर निगम ने उसकी जमानत राशि में से उसकी भरपाई करनी आरंभ कर दी है।
तीनों नगर निगम के लिए टोल टैक्स वसूलने वाली कंपनी सुप्रीम कोर्ट व एनजीटी के आदेश के तहत ग्रीन टैक्स लेने में जमकर मनमानी कर रही हैं। इसको लेकर कई नाकों पर उसके कर्मचारियों व वाहन वालों के बीच झगड़े भी हो रहे हैं।
दरअसल, कंपनी के कर्मचारी सीएनजी चालित छोटे व्यावसायिक वाहनों सेे भी टोल टैक्स के साथ-साथ ग्रीन टैक्स भी वसूल रहे हैं, जबकि सीएनजी चालित वाहनों को प्रदूषण रहित माना गया है। इस बारे में आदेश को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।