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Delhi: 'दादा-दादी की संपत्ति पर पोता-पोती नहीं कर सकते दावा', दिल्ली हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

Sat, 13 Sep 2025 10:13 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: अनुज कुमार Updated Sat, 13 Sep 2025 10:13 PM IST
सार

दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि माता-पिता के जिंदा रहते पोता या पोती दादा की संपत्ति में हिस्सेदारी का दावा नहीं कर सकते हैं। याचिकाकर्ता कृतिका जैन की याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने यह अहम टिप्पणी की है। जो अपने पिता और चाची के खिलाफ संपत्ति में हिस्सा मांग रही थी। 

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Grandchildren will not get share in grandparents property comment of Delhi High Court
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हाईकोर्ट ने शनिवार को स्पष्ट किया कि पोता या पोती अपने माता-पिता के जीवित रहते संपत्ति में हिस्सेदारी का दावा नहीं कर सकते। यह आदेश अदालत ने एक सिविल याचिका को खारिज करते हुए दिया। इसमें याचिकाकर्ता कृतिका जैन ने पिता राकेश जैन और चाची नीना जैन के खिलाफ दिल्ली की एक संपत्ति में एक चौथाई हिस्सेदारी का दावा किया था।

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न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने यह निर्णय सुनाया कि कृतिका के दावे में कोई कानूनी आधार नहीं है। दादी-पोती का दर्जा प्रथम श्रेणी की उत्तराधिकारी के रूप में नहीं आता जब तक उसके माता-पिता जीवित हैं।
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कृतिका के दिवंगत दादा पवन कुमार जैना की तरफ से जो संपत्ति खरीदी गई थी हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की धारा आठ के तहत केवल उनकी विधवा और संतान में ही विभाजित होती है। वर्ष 1956 के बाद से प्रथम श्रेणी उत्तराधिकारी की संपत्ति उनका व्यक्तिगत स्वामित्व बन गई है जो संयुक्त परिवार की संपत्ति नहीं मानी जाएगी।
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