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पुलिस की खुली पोलः खुद के खिलाफ दर्ज किए सिर्फ 10 प्रतिशत केस

Wed, 07 Dec 2016 12:36 PM IST
अमित कुमार निरंजन/अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित कुमार निरंजन/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 07 Dec 2016 12:36 PM IST
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government record says police registers only 10 percent case against itself
- फोटो : amarujala

सुरक्षा और कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाला पुलिस महकमा खुद के प्रति काफी नरम है। पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो की पुलिस ऑर्गनाइजेशन -2015 (बीपीआरडी) की रिपोर्ट से इस बात का खुलासा होता है।

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पूरे देश में कुल दर्ज शिकायतों में सिर्फ10 फीसदी शिकायतों पर ही पुलिस विभाग ने  खुद के खिलाफ केस रजिस्टर्ड किया। सीएचआरआई ने बीपीआरडी रिपोर्ट के विश्लेषण में यह भी पाया कि देश में करीब एक चौथाई पुलिसकर्मियों की कमी है। जिसमें उत्तर प्रदेश का नाम सबसे आगे है।
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पुलिस सुधार और आरटीआई पर काम करने वाली संस्था कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव  (सीएचआरआई)  ने बीपीआरडी की रिपोर्ट का विश्लेषण किया। इसके मुताबिक पुलिस के खिलाफ सबसे ज्यादा करीब 13 हजार शिकायतें दिल्ली में दर्ज हुई ।

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सबसे ज्यादा श‌िकायतें द‌िल्ली व यूपी पुल‌िस की

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औचक निरीक्षण का हवाला देकर फर्जी सीआईडी इंस्पेक्टर दुकानदारों से दो हजार रुपये तक ऐंठ रहा था। - फोटो : Demo Pic

वहीं उत्तर प्रदेश में 4659, पंजाब में 3107, हरियाणा में 1900, जम्मू व कश्मीर में 821, हिमाचल में 419 और उत्तराखंड में सिर्फ 29 शिकायतें दर्ज हुईं। जबकि पूरे देश में 54 हजार 916 शिकायत पुलिस के खिलाफ शिकायत दर्ज हुईं। इनमें से सिर्फ 16 हजार 721 पर ही जांच हुई। 5526 शिकायतों पर केस दर्ज हुआ। 4367 शिकायतों पर चार्ज शीट फाइल हुई। वहीं करीब साढ़े बीस हजार शिकायतें गलत घोषित कर दी गई।

उधर सीएचआरआई के मुताबिक पूरे देश में एक तिहाई से भी ज्यादा सब इन्पेक्टर, 30 फीसदी पुलिस उप निरीक्षक (डीएसपी) की कमी है। उधर पुलिस महकमें से सिर्फ साढ़े छह फीसदी महिलाकर्मी हैं, जिसमें चंडीगढ़ में 17 फीसदी सबसे ज्यादा और असम सबसे कम एक फीसदी ही महिलाएं पुलिस विभाग में कार्यरत हैं।

सबसे ज्यादा 37 फीसदी पुलिसकर्मियों की कमी उत्तर प्रदेश में है। यहां सबसे ज्यादा 57 फीसदी हेड कॉन्सटेबल की कमी है। वहीं हरियाणा में एक भी एसपी या डिप्टी कमांडेंट की नियुक्ति नहीं था।

उत्तराखंड में एक भी असिस्टेंट सब इन्पेक्टर नियुक्त नहीं हैं

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Delhi Police

​पंजाब पुलिस 66 प्रतिशत डीजीपी, जम्मू-कश्मीर पुलिस एक चौथाई सब इंस्पेक्टर, दिल्ली पुलिस40 फीसदी से ज्यादा एसपी, हिमाचल पुलिस डीआईजी रैंक के 53 फीसदी रैंक के अधिकारी की कमी से जूझ रही है।

उत्तराखंड में एक भी असिस्टेंट सब इन्पेक्टर नियुक्त नहीं हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक राष्ट्रीय स्तर पर डीजीपी रैंक के दस फीसदी, डीआईजी के 30 फीसदी, एसपी के 30 फीसदी, इन्सपेक्टर के 17 फीसदी, सब इन्पेक्टर के  36 फीसदी, हेड कॉन्सटेबल के  22 फीसदी पद खाली हैं।

आरक्षित वर्ग की कमी
सीएचआरआई की सदस्य देवयानी श्रीवास्तव ने बताया कि पुलिस विभाग में डिप्टी एसपी से लेकर कॉन्सटेबल रैंक तक पूरे देश में सिर्फ दस फीसदी अनुसूचित जाति और आठ फीसदी अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोग हैं। वहीं आरक्षित अति पिछड़ा वर्ग से उत्तर प्रदेश में सिर्फ 16 फीसदी और हरियाणा में 15 फीसदी पुलिस कर्मी हैं। जबकि इन दोनों प्रदेशों में पुलिस विभाग में ओबीसी वर्ग के लिए 27 प्रतिशत के आरक्षण का प्रावधान है।

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