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हरियाणा के जरिए किसान आंदोलन की धार कुंद करने की तैयारी, पीएम मोदी ने भी संभाला मोर्चा
Wed, 16 Dec 2020 06:30 AM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Wed, 16 Dec 2020 06:30 AM IST
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कृषि कानूनों का विरोध करते किसान
- फोटो : amar ujala
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किसान आंदोलन की धार कुंद करने के लिए सरकार ने कमर कस ली है। धार कुंद करने के लिए सरकार ने पंजाब और हरियाणा के बीच दूरी बढ़ाने और हरियाणा के आंदोलनकारियों का ध्यान बंटाने की रणनीति बनाई है। इस रणनीति के तहत हरियाणा की खट्टर सरकार जल्द ही निकाय चुनाव की घोषणा के साथ तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के सरकारी कर्मचारियों की भर्ती की घोषणा करेगी। इसके अलावा दोनों राज्यों के बीच दूरी बढ़ाने के लिए एसवाईएल मुद्दे को नए सिरे से हवा दी जा रही है।
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दरअसल इस आंदोलन को मुख्य ताकत पंजाब और हरियाणा से मिल रही है। सरकार ने इस जोड़ी में दरार डालने की योजना बनाई है। इसी रणनीति के तहत अचानक सोमवार को हरियाणा के सांसदों और विधायकों ने कृषि और जलसंसाधन मंत्री से मुलाकात कर एसवाईएल मुद्दे के निपटारे की मांग की। इस आंदोलन से हरियाणा के लोगों को दूर करने के लिए जल्द स्थानीय निकाय चुनाव की घोषणा के साथ-साथ तृतीय और चतुर्थ वर्ग की सरकारी नौकरी की भर्ती की घोषणा की जाएगी।
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हरियाणा हुआ अलग तो सरकार को होगी आसानी
अगर इस आंदोलन से हरियाणा के किसान संगठनों ने दूरी बनाई तो पूरा आंदोलन पंजाब केंद्रित हो कर रह जाएगा। सरकार दूसरे राज्यों के किसान संगठनों को एक-एक कर साध रही है। इससे यह धारणा बनेगी कि कृषि कानूनों के खिलाफ सिर्फ पंजाब ही है। जबकि दूसरे राज्यों के किसान इन कानूनों का समर्थन कर रहे हैं। सरकार के रणनीतिकारों का मानना है कि निकाय चुनाव और सरकारी भर्ती की घोषणा के अलावा एसवाईएल मुद्दे के गर्माने से हरियाणा के आंदोलनकारी इस आंदोलन से दूरी बना लेंगे।
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पार्टीशासित राज्यों के सीएम को किया आगाह
सरकार इस आंदोलन को पंजाब और हरियाणा से बाहर फैलने देने से रोकना चाहती है। इस क्त्रस्म में भाजपा नेतृत्व ने पार्टीशासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को आगाह किया है। मुख्यमंत्रियों से कहा गया है कि राज्य सरकार अपने अपने राज्यों के किसान संगठनों के संपर्क में रहें। किसान संगठनों को कानून के फायदे गिनाएं। इस दौरान ऐसा कुछ न हो जिससे किसान संगठन आंदोलन पर उतारू हो जाएं।
धारणा की लड़ाई से भी पार पाने की कोशिश
सरकार के रणनीतिकारों का मानना है कि इस समय ऐसी धारणा है कि देश भर के किसान नए कानूनों के खिलाफ हैं। ऐसे में अगर पंजाब के इतर दूसरे राज्यों के किसान संगठनों का सरकार को साथ मिला तो यह धारणा टूटेगी। नई धारणा यह बनेगी कि इस नए कानून से सिर्फ पंजाब को ही परेशानी है। जबकि दूसरे राज्यों के किसान इस आंदोलन के समर्थन में हैं।
पीएम ने भी संभाला है मोर्चा
नए कानून के समर्थन में माहौल बनाने के लिए खुद प्रधानमंत्री मोदी ने भी मोर्चा संभाल रखा है। बीते सात दिनों से पीएम मोदी लगातार इन कानूनों के समर्थन में टिप्पणियां कर रहे हैं। मंगलवार को भी गुजरात के कच्छ में पीएम ने विपक्ष पर इन कानूनों के संबंध में भ्रम फैलाने का आरोप लगाया।
इससे पहले मन की बात , नए संसद भवन के भूमि पूजन सहित अन्य कार्यक्त्रस्मों में पीएम ने नए कानून की तारीफों के पुल बांधे हैं। सरकार में कानून के पक्ष में माहौल तैयार करने की जिम्मेदारी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर संभाल रहे हैं। बीते तीन दिनों में कई राज्यों के किसान संगठनों ने इन मंत्रियों से मुलाकात कर नए कानूनों को अपना समर्थन दिया है।