केंद्र सरकार ने कोर्ट में कहा: आवेदन करे दिल्ली वक्फ बोर्ड, निजामुद्दीन मरकज में मस्जिद परिसर को खेलने पर होगा विचार
न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी दिल्ली वक्फ बोर्ड द्वारा निजामुद्दीन मरकज में प्रतिबंधों को हटाने की मांग याचिका पर सुनवाई कर रही है। मस्जिद को 31 मार्च 2020 से बंद कर दिया गया है। अदालत ने मामले की सुनवाई 16 मार्च तय की है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
केंद्र सरकार ने सोमवार को अदालत को आश्वासन दिया कि अगर दिल्ली वक्फ बोर्ड शब-ए-बरात और रमजान के त्योहार के दौरान नमाज अदा करने के लिए निजामुद्दीन मरकज में मस्जिद परिसर को फिर से खोलने के लिए आवेदन करता है तो उस पर निष्पक्ष रूप से विचार किया जाएगा। अदालत ने दिल्ली वक्फ बोर्ड को थानाध्यक्ष के समक्ष आवेदन करने को कहा है। 2020 में कोविड-19 के दौरान तब्लीगी जमात के सदस्यों द्वारा तय नियमों का उल्लंघन करने के बाद निजामुद्दीन मरकज में सार्वजनिक प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।
इससे पहले सुनवाई के दौररान केंद्र सरकार ने अदालत को बताया था कि मरकज की पहली मंजिल में आने वाले अवसरों के दौरान कुछ लोगों को नमाज अदा करने की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन इसके पूरे परिसर को फिर से नहीं खोला जा सकता है। सरकार की ओर से पेश रजत नायर ने कहा कि डीडीएमए दिशानिर्देशों के अनुसार मस्जिद की पहली मंजिल को खोलने की अनुमति के संबंध में कोई आपत्ति नहीं है जहां पहले से ही नमाज अदा की जाती है। हालांकि पूरे परिसर को फिर से खोलने के संबंध में नायर ने कहा कि पहले के आदेश के तहत 50 लोगों के नमाज अता करने पर कोई आपत्ति नहीं है।
केंद्र के इस तर्क पर अदालत ने केंद्र को स्पष्ट करने का निर्देश दिया था कि पूरे मस्जिद परिसर को क्यों नहीं खोला जा सकता। नायर ने कहा था कि लगभग 2,000 विदेशी नागरिकों के तब्लीगी गतिविधि में लिप्त पाए जाने के बाद परिसर को बंद कर दिया गया था जो कि वीजा नियमावली के तहत प्रतिबंधित गतिविधि है। अदालत ने उनके तर्क पर असहमति जताते हुए कहा कि घटना प्रासंगिक नहीं है क्योंकि वक्फ बोर्ड द्वारा अनुमति मांगी जा रही है। ये लोग विदेशी नागरिक नहीं। आपने जो कुछ भी दिखाया है वह विदेशी नागरिकों के संबंध में है। यह वे विदेशी नागरिक नहीं हैं जो यहां प्रार्थना करना चाहते हैं।
वहीं प्रबंध समिति की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जॉन ने बताया कि आज तक सदस्यों के खिलाफ कोई आरोप पत्र दायर नहीं किया गया है और एक भी मामला नहीं है। उन्होंने कहा पुलिस व अन्य ने किस प्रावधान के तहत चाबियां छीन लीं? कोई जब्ती ज्ञापन भी नहीं है। हमें बस परिसर से बाहर कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि वे कोविड-19 प्रोटोकॉल के संबंध में किसी भी शर्त का पालन करने के लिए तैयार हैं।