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Year Ender 2020: शिक्षा में किताबों की जगह गूगल, व्हाट्सएप और यू-ट्यूब ने ली
Thu, 24 Dec 2020 05:55 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Thu, 24 Dec 2020 05:55 PM IST
सार
- अगले साल दिल्ली का अपना अलग राज्य बोर्ड स्थापित होने की उम्मीद
- चरणबद्ध तरीके से कक्षाएं डिजिटल होंगी
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
वैश्विक महामारी कोरोना ने स्कूलों की पढ़ाई के स्वरूप को पूरी तरह से बदल दिया है। अब घर बैठे बच्चे स्मार्ट फोन व अन्य डिजिटल उपकरणों का प्रयोग कर दस माह से पढ़ाई जारी रखे हुए हैं। दिल्ली में कोरोना की वैक्सीन नहीं आने तक स्कूल खुलने की उम्मीद नहीं है। ऐसे में आने वाले साल में वैक्सीन आने पर भले ही स्कूल खुल जाएं लेकिन पढ़ाई का स्वरूप बदला ही रहेगा। ऑनलाइन क्लासेज भविष्य की पढ़ाई का अहम माध्यम बनेगी। वहीं, इसके लर्निंग मैटीरियल में भी बड़े पैमाने पर बदलाव होंगे।
अगले साल से उम्मीद
- शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए दिल्ली का अपना अलग राज्य बोर्ड अगले साल स्थापित होगा। इसका मकसद ऐसी शिक्षा प्रणाली स्थापित करना है, जिसमें बच्चे समझकर नंबर लाने की शिक्षा प्राप्त करें।
- इसके साथ ही पाठ्यक्रम में भी बदलाव शुरू होंगे। इसकी शुरुआत 2021-22 से हो जाएगी।
- प्रत्येक सरकारी स्कूल की नौवीं से बारहवीं तक की कम से कम दस कक्षाएं हाईटेक नजर आएंगी। इसके लिए कक्षाओं को डिजिटल बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए जा चुके हैं।
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- अगले साल ही बच्चों के लिए स्कूल स्वास्थय योजना शुरू होगी। इसके तहत बच्चों को एक स्वास्थ्य संबंधी विवरण वाला एक पहचान पत्र मिलेगा।
- दिल्ली में 17 नए सरकारी स्कूल बनने की भी उम्मीद है। इसके साथ ही स्कूलों में बीस हजार नए क्लासरूम भी तैयार होंगे।
- दिल्ली सरकार ने शिक्षा में सुधार के लिए विजन 2030 तैयार किया है। इसकी शुरुआत अगले साल से हो जाएगी, इसके तहत स्कूली शिक्षा में कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। सभी सरकारी स्कूलों की सभी कक्षाओं (नर्सरी समेत) कनेक्टेड क्लासरूम में परिवर्तित कर दिया जाएगा।
- इस विजन के तहत प्रोजेक्ट की शुरुआत चरणबद्ध तरीके से होगी। सभी कक्षाओं में इंटिग्रेटिड डिवाइस होंगे, जबकि नर्सरी व प्राइमरी कक्षाओं के बच्चों के लिए स्मार्ट टीवी स्थापित होंगे।
चुनौती
- मोबाइल नहीं होने से ऑनलाइन शिक्षा से दूर रहे छात्र
कोरोना महामारी के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई तो जारी थी लेकिन सरकारी स्कूल के शिक्षकों का छात्रों से जुड़ना काफी मुश्किल था। अधिकांश छात्रों के पास मोबाइल फोन व इंटरनेट की सुविधा नहीं थी। इस कारण वह शुरुआत में ऑनलाइन कक्षाएं नहीं ले पाए। महामारी के कारण हुए पलायन के कारण काफी बच्चे दिल्ली से चले गए। इस कारण काफी बच्चों का ना तो पता मिल सका और न ही उनसे कोई संपर्क हो सका। हालांकि शिक्षकों ने अपने अलग-अलग प्रयासों से काफी हद तक बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा से जोड़ा।
उपलब्धियां
- ऑनलाइन शिक्षण का नया कॉन्सेप्ट आया, सरकारी स्कूल के काफी शिक्षक ऑनलाइन शिक्षण में सक्षम नहीं थे। बावजूद वह अपनी मेहनत से बच्चों को ऑनलाइन पढ़ा रहे हैं।
- शिक्षकों ने घरों में कक्षाओं को गतिविधियों के माध्यम से ऐसे परिवर्तित किया, जैसे वह कक्षाओं मेें शिक्षण दे रहे हों।
- कोर्स को पूरा करने और कक्षा को आगे बढ़ाने के लिए ऑनलाइन ही बच्चों ने दिए यूनिट एग्जाम।
- ऑनलाइन शिक्षा के लिए बच्चों मिलने लगे स्मार्टफोन।
- दिल्ली सरकार के स्कूलों से बीस छात्रों ने नीट व जेईई एग्जाम में बेहतर रैंक हासिल की।
- ऑनलाइन शिक्षा की गुणवत्ता के कारण विश्व के लगभग 20 देशों में ल्लिी के ई-लर्निंग मैटीरियल को देखा जाना।
लॉकडाउन के अनुभव
- शिक्षण के लिए ऑनलाइन पढ़ाई के अलावा कोई विकल्प नहीं था। सरकार के प्रयासों से शिक्षकों ने व्हाट्सएप ग्रुप, गूगल फॉर्म व अन्य तकनीकों के माध्यम से बच्चों तक अपनी पहुंच बनाई। बच्चों के पाठ्यक्रम को पीछे नहीं होने दिया। बच्चों को उतना करा दिया जितना वह कक्षाओं में जाकर पढ़ाई करता- प्रशांत प्रियदर्शी (महासचिव, दिल्ली सरकारी स्कूल शिक्षक संघ)
- कोरोना संकट के बाद विषम परिस्थितियों में बेहद कम समय के भीतर ऑनलाइन शिक्षा विश्वस्तरीय व्यवस्था करके शिक्षकों ने दिल्ली को गौरवान्वित किया है। शिक्षकों ने लॉकडाउन शुरू होने के 15 दिनों के अंदर ऑनलाइन शिक्षकों का प्रयोग शुरू कर दिया। अब यू-ट्यूब चैनल पर भी ऑनलाइन कक्षाएं चल रही हैं- मनीष सिसोदिया (उपमुख्यमंत्री)
- हम बच्चों को स्मार्टफोन देने से डरते थे, लेकिन अब उसी पर बच्चा ऑनलाइन पढ़ाई कर रहा है। ऑनलाइन पढ़ाई तो हुई लेकिन बच्चे का जो विकास स्कूल आकर होता है वह नहीं हो सका। अब जब भी बच्चे एक लंबे अंतराल के बाद स्कूल आएंगे तो उनके लिए अन्य बच्चों के साथ संवाद करना एक अलग अनुभव होगा- लक्ष्य छाबड़िया ( अध्यक्ष, एफोर्डेबल प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन)
- पिछला एक साल स्कूली शिक्षा में तकनीकी टूल्स को शामिल करने वाला जाना जाएगा। शिक्षकों के लिए ऑनलाइन शिक्षण एक तरह का बिल्कुल नया अनुभव था। शिक्षकों ने ऑनलाइन टीचिंग लर्निंग प्रक्रिया को एक्सपोलर किया। अगले साल से उम्मीद कर रहे हैं कि नई शिक्षा नीति की सिफारिशें लागू हों व बच्चों तथा शिक्षकों के लिए नयापन रहे। -ज्योति अरोड़ा (प्रिंसिपल, माउंट आबू स्कूल)
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अगले साल से उम्मीद
- शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए दिल्ली का अपना अलग राज्य बोर्ड अगले साल स्थापित होगा। इसका मकसद ऐसी शिक्षा प्रणाली स्थापित करना है, जिसमें बच्चे समझकर नंबर लाने की शिक्षा प्राप्त करें।
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- इसके साथ ही पाठ्यक्रम में भी बदलाव शुरू होंगे। इसकी शुरुआत 2021-22 से हो जाएगी।
- प्रत्येक सरकारी स्कूल की नौवीं से बारहवीं तक की कम से कम दस कक्षाएं हाईटेक नजर आएंगी। इसके लिए कक्षाओं को डिजिटल बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए जा चुके हैं।
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- अगले साल ही बच्चों के लिए स्कूल स्वास्थय योजना शुरू होगी। इसके तहत बच्चों को एक स्वास्थ्य संबंधी विवरण वाला एक पहचान पत्र मिलेगा।
- दिल्ली में 17 नए सरकारी स्कूल बनने की भी उम्मीद है। इसके साथ ही स्कूलों में बीस हजार नए क्लासरूम भी तैयार होंगे।
- दिल्ली सरकार ने शिक्षा में सुधार के लिए विजन 2030 तैयार किया है। इसकी शुरुआत अगले साल से हो जाएगी, इसके तहत स्कूली शिक्षा में कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। सभी सरकारी स्कूलों की सभी कक्षाओं (नर्सरी समेत) कनेक्टेड क्लासरूम में परिवर्तित कर दिया जाएगा।
- इस विजन के तहत प्रोजेक्ट की शुरुआत चरणबद्ध तरीके से होगी। सभी कक्षाओं में इंटिग्रेटिड डिवाइस होंगे, जबकि नर्सरी व प्राइमरी कक्षाओं के बच्चों के लिए स्मार्ट टीवी स्थापित होंगे।
चुनौती
- मोबाइल नहीं होने से ऑनलाइन शिक्षा से दूर रहे छात्र
कोरोना महामारी के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई तो जारी थी लेकिन सरकारी स्कूल के शिक्षकों का छात्रों से जुड़ना काफी मुश्किल था। अधिकांश छात्रों के पास मोबाइल फोन व इंटरनेट की सुविधा नहीं थी। इस कारण वह शुरुआत में ऑनलाइन कक्षाएं नहीं ले पाए। महामारी के कारण हुए पलायन के कारण काफी बच्चे दिल्ली से चले गए। इस कारण काफी बच्चों का ना तो पता मिल सका और न ही उनसे कोई संपर्क हो सका। हालांकि शिक्षकों ने अपने अलग-अलग प्रयासों से काफी हद तक बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा से जोड़ा।
उपलब्धियां
- ऑनलाइन शिक्षण का नया कॉन्सेप्ट आया, सरकारी स्कूल के काफी शिक्षक ऑनलाइन शिक्षण में सक्षम नहीं थे। बावजूद वह अपनी मेहनत से बच्चों को ऑनलाइन पढ़ा रहे हैं।
- शिक्षकों ने घरों में कक्षाओं को गतिविधियों के माध्यम से ऐसे परिवर्तित किया, जैसे वह कक्षाओं मेें शिक्षण दे रहे हों।
- कोर्स को पूरा करने और कक्षा को आगे बढ़ाने के लिए ऑनलाइन ही बच्चों ने दिए यूनिट एग्जाम।
- ऑनलाइन शिक्षा के लिए बच्चों मिलने लगे स्मार्टफोन।
- दिल्ली सरकार के स्कूलों से बीस छात्रों ने नीट व जेईई एग्जाम में बेहतर रैंक हासिल की।
- ऑनलाइन शिक्षा की गुणवत्ता के कारण विश्व के लगभग 20 देशों में ल्लिी के ई-लर्निंग मैटीरियल को देखा जाना।
लॉकडाउन के अनुभव
- शिक्षण के लिए ऑनलाइन पढ़ाई के अलावा कोई विकल्प नहीं था। सरकार के प्रयासों से शिक्षकों ने व्हाट्सएप ग्रुप, गूगल फॉर्म व अन्य तकनीकों के माध्यम से बच्चों तक अपनी पहुंच बनाई। बच्चों के पाठ्यक्रम को पीछे नहीं होने दिया। बच्चों को उतना करा दिया जितना वह कक्षाओं में जाकर पढ़ाई करता- प्रशांत प्रियदर्शी (महासचिव, दिल्ली सरकारी स्कूल शिक्षक संघ)
- कोरोना संकट के बाद विषम परिस्थितियों में बेहद कम समय के भीतर ऑनलाइन शिक्षा विश्वस्तरीय व्यवस्था करके शिक्षकों ने दिल्ली को गौरवान्वित किया है। शिक्षकों ने लॉकडाउन शुरू होने के 15 दिनों के अंदर ऑनलाइन शिक्षकों का प्रयोग शुरू कर दिया। अब यू-ट्यूब चैनल पर भी ऑनलाइन कक्षाएं चल रही हैं- मनीष सिसोदिया (उपमुख्यमंत्री)
- हम बच्चों को स्मार्टफोन देने से डरते थे, लेकिन अब उसी पर बच्चा ऑनलाइन पढ़ाई कर रहा है। ऑनलाइन पढ़ाई तो हुई लेकिन बच्चे का जो विकास स्कूल आकर होता है वह नहीं हो सका। अब जब भी बच्चे एक लंबे अंतराल के बाद स्कूल आएंगे तो उनके लिए अन्य बच्चों के साथ संवाद करना एक अलग अनुभव होगा- लक्ष्य छाबड़िया ( अध्यक्ष, एफोर्डेबल प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन)
- पिछला एक साल स्कूली शिक्षा में तकनीकी टूल्स को शामिल करने वाला जाना जाएगा। शिक्षकों के लिए ऑनलाइन शिक्षण एक तरह का बिल्कुल नया अनुभव था। शिक्षकों ने ऑनलाइन टीचिंग लर्निंग प्रक्रिया को एक्सपोलर किया। अगले साल से उम्मीद कर रहे हैं कि नई शिक्षा नीति की सिफारिशें लागू हों व बच्चों तथा शिक्षकों के लिए नयापन रहे। -ज्योति अरोड़ा (प्रिंसिपल, माउंट आबू स्कूल)