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फिर चर्चा में आए चंद्रास्वामी, व्यापारी से की ठगी

Fri, 03 Oct 2014 04:13 PM IST
Updated Fri, 03 Oct 2014 04:13 PM IST
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Godman chandraswami allegedly robs a 3 crore of businessman.

हमेशा विवादों के बीच घिरे रहने वाले चंद्रास्वामी एक बार फिर दिल्ली पुलिस की नजर में आ गए हैं। एक व्यापारी ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराते हुए कहा है कि चंद्रास्वामी के कुतुब इंस्टीट्यूशनल एरिया स्थित तांत्रिक आश्रम में उसके तीन करोड़ के रत्न गायब कर दिए गए।

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विशाखापट्टनम के व्यवसायी संजय कुमार अग्रवाल के शिकायत के आधार पर पुलिस ने चंद्रास्वामी और उनके सहायकों पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है।

संजय ने अपनी शिकायत में यह दावा किया है कि चंद्रास्वामी के सहायकों ने उससे उसके रत्न खरीदने के नाम पर लिए थे। पर लेने के बाद वो वापस नहीं लौटे।

पुलिल के सूत्रों ने बताया कि इस मामले की जांच शुरू कर दी गई है और जल्द ही चंद्रास्वामी और उनके सहायकों को पूछताछ के लिए समन भेजा जाएगा।

एक ब‌िचौल‌िए के माध्यम से पहुंचा स्वामी के आश्रम

Godman chandraswami allegedly robs a 3 crore of businessman.

क्रा‌‌इम ब्रांच की एंटी रॉबरी सेल के एक अधिकारी ने बताया कि संजय अपने एक व्यापारी मित्र आदेश वर्मा के कहने आश्रम में गया था। वर्मा व्यापारियों को ग्राहक उपलब्ध कराता है।

संजय 12 सितंबर को रत्नों के साथ दिल्ली आया था। यहां वह अपनी बहन के घर रोहिणी में रह रहा था। वर्मा संजय को कई जगह रत्नों को बेचने के उद्देश्य से ले गया पर सौदा नहीं हो सका। 18 सितंबर को वर्मा ने अग्रवाल से विश्व धर्मायतन सनातन आश्रम पहुंचने को कहा।

पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार संजय लगभग तीन बजे आश्रम पहुंचा। यहां से वर्मा उसे आश्रम के दूसरी मंजिल पर ले गया, जहां उसने सुनील जैन नाम के एक आदमी से संजय का परिचय कराया। उस समय वहां कुछ और लोग भी आए जिनमें से एक का नाम पांडे था। संजय ने उन्हें रत्नों के 6 टुकड़े और 1,210 कैरेट के भी कुछ रत्न दिखाए।

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घंटों आश्रम में इंतजार ही करता रह गया व्यापारी

Godman chandraswami allegedly robs a 3 crore of businessman.

रत्नों को देखने के बाद जैन ने पांडे को सभी रत्न लेकर चंद्रास्वामी को दिखाने को कहा। इस बात पर संजय भी पांडे के साथ जाने की जिद करने लगा। तब जैन ने कहा क‌ि 'आप को पता नहीं है कि आप कहां बैठे हैं। ये हजारों करोड़ का आश्रम है। स्वामीजी हर किसी से नहीं मिलते।'

जैन ने संजय से कहा क‌ि उसे उसके रत्न रिसेप्शन पर मिल जाएंगे। लेकिन कई घंटों तक ‌इंतजार करने के बाद भी ना ही कोई आया न किसी ने कुछ बताया और ना ही उसके रत्न वापस मिले। वर्मा भी कुछ समय बाद बाहर चला गया।

वर्मा, जैन के साथ शाम करीब 7:30 बजे आश्रम लौटा। दोनों संजय से रिसेप्शन पर मिले और अग्रवाल को आश्रम से जाने को कहा। इसके बाद संजय को अहसास हुआ कि उसे बेवकूफ बनाया गया है और तब उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

साभारः डेली मेल

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