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क्यों सरकारी स्कूल में पढ़ती हैं लड़कियां, शिक्षा विभाग के सर्वे ने खोली शर्मनाक सच्चाई

Sun, 18 Jun 2017 03:51 PM IST
निशा ठाकुर/अमर उजाला, गाजियाबाद
निशा ठाकुर/अमर उजाला, गाजियाबाद Updated Sun, 18 Jun 2017 03:51 PM IST
सार

कैसे बढे़ं बेटियां: बेटों का दाखिला निजी स्कूलों में...बेटियों के हिस्से में सरकारी स्कूल
- बेसिक शिक्षा के हाउस होल्ड सर्वे में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
- सरकारी स्कूलों में हैं लड़कों के  मुकाबले अधिक है लड़कियों की संख्या 
निशा ठाकुर
गाजियाबाद। 

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girls are sent to government and boys to private schools in uttar pradesh

विस्तार

समाज की दकियानूसी सोच केंद्र सरकार की ‘बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ’ योजना को पलीता लगा रही है। बेटियों की शिक्षा को लेकर लोग जागरूक तो हुए हैं, मगर अब भी बेटा-बेटी के बीच अंतर खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है।

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बेसिक शिक्षा विभाग के हाउस होल्ड सर्वे में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। ज्यादातर मां-बाप जहां अपने बेटों का दाखिला महंगे निजी स्कूलों में कराना चाहते हैं, वहीं बेटियों के हिस्से में आज भी ज्यादातर सरकारी स्कूल ही आते है।
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हाल ही में आई हाउस होल्ड सर्वे की रिपोर्ट के  मुताबिक पब्लिक स्कूलों में जाने वाले बालकों की संख्या 125785 है। इसके सापेक्ष निजी स्कूलों में बालिकाओं की संख्या 108576 दर्ज है।  गाजियाबाद के स्कूलों में कक्षा एक से आठ तक 484661 बच्चे जाते हैं।

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इनमें बेटियों की संख्या 230951 है। इसमें सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली लड़कियों की संख्या 61,934 हैं। जबकि लड़कों की संख्या 64,423 है। इसमें उन लड़कियों का प्रतिशत अधिक है, जिनके घर में एक या दो भाई हैं। वह भी तब जबकि सेक्स रेशियो प्रति एक हजार पुरुषों पर 835 महिलाएं हैं।

जिला समन्वयक पवन भाटी ने बताया कि सर्वे के दौरान यह बातें सामने आई है कि घर में यदि दो बेटी और दो बेटे हैं, इस स्थिति में अभिभावक बेटियों को सरकारी विद्यालय  में ही भेजा जाता है। इसके विपरीत बेटों को उनके अभिभावक फीस लगाकर पब्लिक स्कूलों में पढ़ाना पसंद करते हैं।

पिछले वर्ष भी महिला सामाख्या नामक एनजीओ ने इस विषय पर एक सर्वे किया था। सर्वे के दौरान बम्हेटा, दुहाई और डासना के प्रत्येक 10 में से सात अभिभावकों से बात करने पर मालूम हुआ कि वे पब्लिक स्कूलों की मोटी फीस होने की वजह से सिर्फ बेटों को ही वहां दाखिला दिलाते हैं।

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स्कूल ड्रेस - फोटो : amar ujala

बेटियों की शिक्षा सरकारी स्तर के स्कूल में ही होती है। क्योंकि उन्हें लगता है कि इनके ब्याह पर भी उनकी मोटी रकम लगानी है, इसलिए स्कूली शिक्षा का महत्व लड़कों के मुकाबले परिवार के लिए उतना नहीं है। 

किस प्रकार के स्कूल में कितने जाते हैं बच्चे
सरकारी शासकीय विद्यालय- 126357
सहायता प्राप्त विद्यालय- 81981
मान्यता प्राप्त विद्यालय-    234361
मान्यता प्राप्त मदरसा- 23502
गैर मान्यता प्राप्त मदरसा- 9392
गैर मान्यता प्राप्त विद्यालय- 9067

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