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गाजीपुर मामला: HC ने कार्रवाई न करने पर डीडीए, एमसीडी व पुलिस जताई नाराजगी, कहा- जमकर लगाई फटकार

Tue, 06 Aug 2024 08:11 PM IST
श्याम जी. अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: श्याम जी. Updated Tue, 06 Aug 2024 08:11 PM IST
सार

गाजीपुर नाले में गिरकर एक महिला और उसके बेटे की मौत के मामले में एमसीडी अधिकारियों को निलंबित करने की चेतावनी दी है। हाईकोर्ट ने कार्रवाई न करने पर डीडीए, एमसीडी और पुलिस के रवैये पर नाराजगी जताई है।
 

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Ghazipur drain Death case HC expressed displeasure over DDA, MCD and police not taking action
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली हाईकोर्ट ने गाजीपुर में एक महिला और उसके बेटे की मौत के मद्देनजर एमसीडी, दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) व दिल्ली पुलिस की खिंचाई की, जिसके कारण मौतें हुईं। अदालत ने चेतावनी दी कि अगर नगर निगम अपने कर्तव्यों का पालन करने में विफल रहता है तो वह एमसीडी के अधिकारियों को निलंबित करना शुरू कर देगा।

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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ कहा कि गाजीपुर क्षेत्र में नालों को ढकने या बैरिकेडिंग करने में अधिकारी विफल रहे हैं। पीठ ने क्षेत्र के लिए जिम्मेदार एमसीडी डिप्टी कमिश्नर से बातचीत करने के बाद टिप्पणी की कि वह सरकार से निगम को भंग करने के लिए कहेगी। इसमें कहा गया है कि नगर निगम अधिकारियों पर आपराधिक लापरवाही का मामला दर्ज किया जाना चाहिए।
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आरमादायक क्लब बन गया एमसीडी
पीठ ने कहा, 'एमसीडी एक आरामदायक क्लब बन गया है, जहां आप जाते हैं एक कप चाय पीते हैं और वापस आ जाते हैं। मैं आपको गारंटी दे सकता हूं कि अगर यह आदमी (कोर्ट में मौजूद डिप्टी कमिश्नर) कार्यालय नहीं आता है तो इससे जमीनी हालात पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। मुझे लगता है कि यह एक उचित मामला है जहां हम सरकार से सिफारिश करेंगे कि एमसीडी को भंग कर दिया जाना चाहिए।' 
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दिल्ली पुलिस और डीडीए दाखिल करे रिपोर्ट
पीठ ने कहा दिल्ली में हालात ऐसे ही चल रहे हैं? कैबिनेट मीटिंग की कोई तारीख नहीं है, स्टैंडिंग कमेटी मीटिंग की कोई तारीख नहीं है। अगर कैबिनेट और स्टैंडिंग कमेटी मीटिंग नहीं हो रही है तो बजट कैसे स्वीकृत होगा? यह ऐसा है जैसे हम कह रहे हों कि हमारे कोर्ट बैठे बिना ही मामलों का फैसला हो जाएगा। कोर्ट ने आखिरकार एमसीडी के इलाके को खाली करने और बैरिकेड्स लगाने का आदेश दिया, ताकि खुले नाले दुर्गम हो जाएं। दिल्ली पुलिस और डीडीए को भी मामले में स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है।

यह पुलिस जांच का मामला है
पीठ ने कहा कि वह इस बात पर निर्णय नहीं करेगी कि जिस क्षेत्र में मौतें हुईं, वह एमसीडी या डीडीए के अधिकार क्षेत्र में आता है या नहीं, क्योंकि यह पुलिस जांच का मामला है। पीठ झुन्नू लाल श्रीवास्तव नामक व्यक्ति द्वारा दायर याचिका पर विचार कर रही थी, जिसमें महिला और उसके बेटे की नाले में गिरने और डूबने के कारण डीडीए और एमसीडी के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, तनुजा नामक 22 वर्षीय महिला और उसके 3 वर्षीय बेटे प्रियांश की नाले में गिरने से मौत हो गई।


150 मीटर नीचे पाए गए थे शव
दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि पीड़ित जलभराव के कारण नाले में गिर गए और उनके शव लगभग 150 मीटर नीचे पाए गए। अदालत ने मामले में पुलिस की जांच पर भी अपनी नाराजगी व्यक्त की और कहा कि पुलिस केवल नगर निगम अधिकारियों को नोटिस भेज रही हैं और फाइलों को जब्त करने या अधिकारियों से पूछताछ करने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

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