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Ghaziabad News: संक्रमण फैलने से युवक की मौत अस्पताल के खिलाफ दी तहरीर
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मुरादनगर। नेकपुर गांव निवासी सतीश कुमार (36) की संक्रमण फैलने से 18 जनवरी को मौत हो गई। दिल्ली-मेरठ मार्ग स्थित एक निजी अस्पताल के डॉक्टर पर ऑपरेशन में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए परिजनों ने अस्पताल व डॉक्टर के खिलाफ तहरीर दी है।
नेकपुर गांव निवासी सोहनलाल सिंह ने बताया कि उनके भाई सतीश कुमार की दिसंबर माह में तबीयत खराब हो गई थी। 24 दिसंबर 2024 को सतीश को बस स्टैंड के निकट स्थित श्री श्याम अस्पताल में भर्ती कराया गया। जांच में डॉक्टर ने उसकी पित की थैली में पथरी बताया। 25 दिसंबर को सतीश का ऑपरेशन किया गया। चार दिन बाद उनको अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। 29 दिसंबर को अचानक फिर उसकी तबीयत खराब हुई। 30 दिसंबर तक सतीश की तबीयत में कोई भी सुधार न होने पर वह उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे, तो इंफेक्शन की बात कहकर उसे अस्पताल में भर्ती कर लिया गया।
31 दिसंबर को डॉक्टर ने उन्हें कहीं और ले जाने की सलाह दी। एक जनवरी को परिजनों ने उन्हें मेरठ के निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उन्हें सीटी स्कैन में पता चला कि ऑपरेशन के बाद डॉक्टर ने पित नलिकाओं को बिना सील किए छोड़ दिया। जिसके कारण संक्रमण फैल गया। 16 जनवरी को मेरठ से दिल्ली एम्स के लिए सतीश को रेफर किया गया। 18 जनवरी को उसकी मौत हो गई। सोमवार की पत्नी गरिमा व चार वर्ष की बेटी वंशिका के साथ थाने पहुंची और अस्पताल व डॉक्टर के खिलाफ तहरीर दी। एसीपी सिद्धार्थ गौतम का कहना है कि जांच के बाद कार्रवाई जाएगी। सीएमओ डॉॅ. अखिलेश मोहन का कहना है कि मामला संज्ञान में नहीं है। शिकायत मिलने पर जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
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अस्पताल की नहीं है कोई गलती : विक्रांत
श्री श्याम अस्पताल के संचालक विक्रांत चौधरी का कहना है कि अस्पताल से ऑपरेशन के बाद सतीश कुमार ठीक होकर अपने घर गए थे। अस्पताल के डॉक्टर की कोई गलती नहीं है। सतीश के परिजनों ने उन्हें मेरठ के किसी अस्पताल में भर्ती कराया था। जो भी कुछ हुआ है वहीं से हुआ है।
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नेकपुर गांव निवासी सोहनलाल सिंह ने बताया कि उनके भाई सतीश कुमार की दिसंबर माह में तबीयत खराब हो गई थी। 24 दिसंबर 2024 को सतीश को बस स्टैंड के निकट स्थित श्री श्याम अस्पताल में भर्ती कराया गया। जांच में डॉक्टर ने उसकी पित की थैली में पथरी बताया। 25 दिसंबर को सतीश का ऑपरेशन किया गया। चार दिन बाद उनको अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। 29 दिसंबर को अचानक फिर उसकी तबीयत खराब हुई। 30 दिसंबर तक सतीश की तबीयत में कोई भी सुधार न होने पर वह उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे, तो इंफेक्शन की बात कहकर उसे अस्पताल में भर्ती कर लिया गया।
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31 दिसंबर को डॉक्टर ने उन्हें कहीं और ले जाने की सलाह दी। एक जनवरी को परिजनों ने उन्हें मेरठ के निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उन्हें सीटी स्कैन में पता चला कि ऑपरेशन के बाद डॉक्टर ने पित नलिकाओं को बिना सील किए छोड़ दिया। जिसके कारण संक्रमण फैल गया। 16 जनवरी को मेरठ से दिल्ली एम्स के लिए सतीश को रेफर किया गया। 18 जनवरी को उसकी मौत हो गई। सोमवार की पत्नी गरिमा व चार वर्ष की बेटी वंशिका के साथ थाने पहुंची और अस्पताल व डॉक्टर के खिलाफ तहरीर दी। एसीपी सिद्धार्थ गौतम का कहना है कि जांच के बाद कार्रवाई जाएगी। सीएमओ डॉॅ. अखिलेश मोहन का कहना है कि मामला संज्ञान में नहीं है। शिकायत मिलने पर जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
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अस्पताल की नहीं है कोई गलती : विक्रांत
श्री श्याम अस्पताल के संचालक विक्रांत चौधरी का कहना है कि अस्पताल से ऑपरेशन के बाद सतीश कुमार ठीक होकर अपने घर गए थे। अस्पताल के डॉक्टर की कोई गलती नहीं है। सतीश के परिजनों ने उन्हें मेरठ के किसी अस्पताल में भर्ती कराया था। जो भी कुछ हुआ है वहीं से हुआ है।