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येलो फंगस: बेहद खतरनाक होती है यह बीमारी, पढ़ें इसके कारण, लक्षण और इलाज
Tue, 25 May 2021 01:23 PM IST
प्राची प्रियम
अमर उजाला ब्यूरो, गाजियाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, गाजियाबाद
Published by: प्राची प्रियम
Updated Tue, 25 May 2021 01:23 PM IST
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yellow fungus
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जानवरों में पाई जाने वाली बीमारी येलो फंगस (म्यूकर सेप्टिकस) इंसानों में पहुंच गई है। डॉक्टर इस बीमारी को खतरनाक मान रहे हैं। क्योंकि बीमारी की चपेट में आने पर घाव भरने की क्षमता प्रभावित होने लगती है। संक्रमण की चपेट में आने वाले मरीज को सात मिग्रा प्रति किग्रा के अनुसार एंफेटेरोसिन बी का छह इंजेक्शन प्रतिदिन दिया जाता है।
अगर समय पर इंजेक्शन न दिया जाए तो मरीज के शरीर में सेप्टीसीमिया (जहर फैलना) हो जाता है। मरीज की पुष्टि करने वाले डॉ. बीपी त्यागी का दावा है कि यह इंसान में पहली बार देखा गया है।
हर्ष ईएनटी अस्पताल के एमडी एवं सीनियर ईएनटी सर्जन डॉ. बीपी त्यागी ने बताया कि रविवार को संजय नगर निवासी 45 वर्षीय अधिवक्ता इलाज के लिए आए थे। उनमें फंगस के लक्षण थे, लेकिन सीटी स्कैन रिपोर्ट में इसका पता नहीं चला था। जब मरीज की एंडोस्कोपी से जांच की गई तो उसमें ब्लैक और व्हाइट के साथ येलो फंगस की भी पुष्टि हुई।
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नहीं मिल रहा है इंजेक्शन
डॉ. बीपी त्यागी ने बताया कि येलो फंगस में भी एंफोटेरिसिन-बी इंजेक्शन की जरूरत होती है। यह इंजेक्शन बाजार में नहीं मिल रहा है, इसलिए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से इंजेक्शन उपलब्ध करवाने की मांग की गई है। फिलहाल मरीज की हालत स्थिर है, लेकिन इंजेक्शन समय से नहीं मिला तो हालत बिगड़ सकती है।
तीनों फंगस में अंतर
येलो फंगस (म्युकर सेप्टिकस) - इसमें घाव नहीं भरने देता और सेप्टीमिया हो जाता है। अगर समय पर इंजेक्शन व दवा नहीं मिले तो शरीर के लीवर, गुर्दा एवं अन्य अंगों को प्रभावित कर देता है। इसमें मल्टी आर्गन फेल्योर होने से मरीज की मौत हो जाती है। इसमें संक्रमण नाक से शुरू होकर पूरे शरीर में फैल जाता है।
ये होते हैं लक्षण
बीमारी की चपेट में आने वाले मरीज में सुस्ती, कम भूख लगना, या बिल्कुल भी भूख न लगना और वजन कम होना जैसे लक्षण दिखने लगते हैं।
गंदगी से होता है येलो फंगस
डॉक्टरों के मुताबिक येलो फंगस फैलने का कारण साफ- सफाई में कमी है। इसलिए अपने घर के आस-पास साफ-सफाई रखें। स्वच्छता रखना ही इस बैक्टीरिया और फंगस के विकास को रोकने में मदद करेगा। पुराने खाद्य पदार्थों को खराब होने या फंफूदी लगने से पहले हटा देना चाहिए।
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अगर समय पर इंजेक्शन न दिया जाए तो मरीज के शरीर में सेप्टीसीमिया (जहर फैलना) हो जाता है। मरीज की पुष्टि करने वाले डॉ. बीपी त्यागी का दावा है कि यह इंसान में पहली बार देखा गया है।
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हर्ष ईएनटी अस्पताल के एमडी एवं सीनियर ईएनटी सर्जन डॉ. बीपी त्यागी ने बताया कि रविवार को संजय नगर निवासी 45 वर्षीय अधिवक्ता इलाज के लिए आए थे। उनमें फंगस के लक्षण थे, लेकिन सीटी स्कैन रिपोर्ट में इसका पता नहीं चला था। जब मरीज की एंडोस्कोपी से जांच की गई तो उसमें ब्लैक और व्हाइट के साथ येलो फंगस की भी पुष्टि हुई।
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नहीं मिल रहा है इंजेक्शन
डॉ. बीपी त्यागी ने बताया कि येलो फंगस में भी एंफोटेरिसिन-बी इंजेक्शन की जरूरत होती है। यह इंजेक्शन बाजार में नहीं मिल रहा है, इसलिए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से इंजेक्शन उपलब्ध करवाने की मांग की गई है। फिलहाल मरीज की हालत स्थिर है, लेकिन इंजेक्शन समय से नहीं मिला तो हालत बिगड़ सकती है।
तीनों फंगस में अंतर
येलो फंगस (म्युकर सेप्टिकस) - इसमें घाव नहीं भरने देता और सेप्टीमिया हो जाता है। अगर समय पर इंजेक्शन व दवा नहीं मिले तो शरीर के लीवर, गुर्दा एवं अन्य अंगों को प्रभावित कर देता है। इसमें मल्टी आर्गन फेल्योर होने से मरीज की मौत हो जाती है। इसमें संक्रमण नाक से शुरू होकर पूरे शरीर में फैल जाता है।
ये होते हैं लक्षण
बीमारी की चपेट में आने वाले मरीज में सुस्ती, कम भूख लगना, या बिल्कुल भी भूख न लगना और वजन कम होना जैसे लक्षण दिखने लगते हैं।
गंदगी से होता है येलो फंगस
डॉक्टरों के मुताबिक येलो फंगस फैलने का कारण साफ- सफाई में कमी है। इसलिए अपने घर के आस-पास साफ-सफाई रखें। स्वच्छता रखना ही इस बैक्टीरिया और फंगस के विकास को रोकने में मदद करेगा। पुराने खाद्य पदार्थों को खराब होने या फंफूदी लगने से पहले हटा देना चाहिए।
ब्लैक फंगस (म्यूकर माइकोसिस)
इसमें मरीज के नाक से संक्रमण शुरू होता है जो आंख को प्रभावित करते हुए दिमाग तक पहुंचता है। समय से इलाज न मिले तो मौत हो जाती है।
ब्लैक फंगस के कारण
- इम्यून सिस्टम का कमजोर हो जाना
- अनियंत्रित मधुमेह
- स्टेरॉयड का सेवन
- रोगी को दिए गए ऑक्सीजन सपोर्ट का दूषित होना
ब्लैक फंगस के लक्षण
- आंख या उसके आसपास दर्द होना
- नाक बहना
- धुंधला दिखना
- आंखों का बाहर निकल आना
- सिर दर्द
व्हाइट फंगस (एसपरजिलोसिस निमोनिया)
इसमें मरीज के नाक के रास्ते फेफड़ों में संक्रमण फैलता है। ब्लैक फंगस के साथ एक और संक्रमण जो चिंता का विषय बन रहा है, वो है व्हाइट फंगस। ब्लैक फंगस की तरह व्हाइट फंगस भी कोविड से ठीक हो रहे या ठीक हो चुके मरीजों में देखा जा रहा है।
इसमें मरीज के नाक से संक्रमण शुरू होता है जो आंख को प्रभावित करते हुए दिमाग तक पहुंचता है। समय से इलाज न मिले तो मौत हो जाती है।
ब्लैक फंगस के कारण
- इम्यून सिस्टम का कमजोर हो जाना
- अनियंत्रित मधुमेह
- स्टेरॉयड का सेवन
- रोगी को दिए गए ऑक्सीजन सपोर्ट का दूषित होना
ब्लैक फंगस के लक्षण
- आंख या उसके आसपास दर्द होना
- नाक बहना
- धुंधला दिखना
- आंखों का बाहर निकल आना
- सिर दर्द
व्हाइट फंगस (एसपरजिलोसिस निमोनिया)
इसमें मरीज के नाक के रास्ते फेफड़ों में संक्रमण फैलता है। ब्लैक फंगस के साथ एक और संक्रमण जो चिंता का विषय बन रहा है, वो है व्हाइट फंगस। ब्लैक फंगस की तरह व्हाइट फंगस भी कोविड से ठीक हो रहे या ठीक हो चुके मरीजों में देखा जा रहा है।