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Ghaziabad: मकान बेचने के नाम पर पूर्व केंद्रीय मंत्री वीके सिंह की बेटी से धोखाधड़ी, FIR दर्ज
Thu, 17 Oct 2024 05:00 AM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
Published by: गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 17 Oct 2024 05:00 AM IST
सार
दिल्ली से सटे गाजियाबाद में पूर्व केंद्रीय मंत्री वीके सिंह की बेटी योगजा सिंह ने हाईटेक इंस्टीट्यूट के चेयरमैन के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया है। यह मामला 3.38 करोड़ की धोखाधड़ी का बताया जा रहा है।
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पूर्व आर्मी चीफ जनरल वी.के सिंह (फाइल फोटो)
- फोटो : ANI
विस्तार
पूर्व केंद्रीय मंत्री और गाजियाबाद के पूर्व सांसद जनरल (रिटायर्ड) वीके सिंह की बेटी योगजा सिंह ने हाईटेक इंस्टीट्यूट के चेयरमैन आनंद प्रकाश के खिलाफ कविनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। इसमें योगजा सिंह का आरोप है कि आनंद प्रकाश ने मकान बेचने के नाम पर उनके साथ 3.38 करोड़ की धोखाधड़ी की।
एफआईआर में राजनगर निवासी योगजा सिंह की ओर से बताया गया कि आनंद प्रकाश ने उनसे 14 जून 2014 में मकान बेचने का सौदा किया था। कुल 5.50 करोड़ रुपये दिए जाना तय हुआ था। उन्होंने 10 लाख रुपये एडवांस दे दिए। बाकी रकम धीरे-धीरे देने का तय हुआ। इसके बाद आनंद प्रकाश ने मकान में मरम्मत का काम कराया जिसमें 4.50 लाख रुपये खर्च हुआ।
इस रकम का चेक उन्होंने उन्हें दे दिया और 15 जुलाई 2014 को उन्हें मकान पर कब्जा मिल गया। उनका कहना है कि उन्हेंं मकान पर ऋण लेना था। इसके लिए 13 फरवरी 2017 को उनके बीच एक अनुबंध हुआ था। इसके बाद उन्होंने 14 व 15 फरवरी 2017 को 33.50 लाख रुपये आनंद प्रकाश को ट्रांसफर किए।
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इसके बाद उन्होंने ऋण लेने के लिए मूल कागज मांगे लेकिन आनंद प्रकाश नहीं दिए। वह और रकम की मांग करने लगे। उन्होंने फिर 14 अक्तूबर 2018 को संदीप तंवर के माध्यम से रुपये उधार लेकर एक करोड़ रुपये दे दिए। इसके बाद 15 नवंबर 2019 और 12 अक्तूबर 2023 को भी एक-एक करोड़ रुपये दिए। 21 अक्तूबर 2023 को जब बैंक से दो करोड़ रुपये का ऋण मिला तो आनंद प्रकाश से बैनामा करने के लिए कहा लेकिन उन्होंने बैनामा नहीं किया।
इसके बाद 16 अगस्त 2024 को एक नोटिस गलत व झूठे तथ्यों के आधार पर उन्हें दे दिया। 30 अगस्त को उन्होंने उसका जवाब दे दिया। आरोप है कि इसके बाद भी कई बार कहने के बावजूद मकान का बैनामा नहीं किया।
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एफआईआर में राजनगर निवासी योगजा सिंह की ओर से बताया गया कि आनंद प्रकाश ने उनसे 14 जून 2014 में मकान बेचने का सौदा किया था। कुल 5.50 करोड़ रुपये दिए जाना तय हुआ था। उन्होंने 10 लाख रुपये एडवांस दे दिए। बाकी रकम धीरे-धीरे देने का तय हुआ। इसके बाद आनंद प्रकाश ने मकान में मरम्मत का काम कराया जिसमें 4.50 लाख रुपये खर्च हुआ।
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इस रकम का चेक उन्होंने उन्हें दे दिया और 15 जुलाई 2014 को उन्हें मकान पर कब्जा मिल गया। उनका कहना है कि उन्हेंं मकान पर ऋण लेना था। इसके लिए 13 फरवरी 2017 को उनके बीच एक अनुबंध हुआ था। इसके बाद उन्होंने 14 व 15 फरवरी 2017 को 33.50 लाख रुपये आनंद प्रकाश को ट्रांसफर किए।
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इसके बाद उन्होंने ऋण लेने के लिए मूल कागज मांगे लेकिन आनंद प्रकाश नहीं दिए। वह और रकम की मांग करने लगे। उन्होंने फिर 14 अक्तूबर 2018 को संदीप तंवर के माध्यम से रुपये उधार लेकर एक करोड़ रुपये दे दिए। इसके बाद 15 नवंबर 2019 और 12 अक्तूबर 2023 को भी एक-एक करोड़ रुपये दिए। 21 अक्तूबर 2023 को जब बैंक से दो करोड़ रुपये का ऋण मिला तो आनंद प्रकाश से बैनामा करने के लिए कहा लेकिन उन्होंने बैनामा नहीं किया।
इसके बाद 16 अगस्त 2024 को एक नोटिस गलत व झूठे तथ्यों के आधार पर उन्हें दे दिया। 30 अगस्त को उन्होंने उसका जवाब दे दिया। आरोप है कि इसके बाद भी कई बार कहने के बावजूद मकान का बैनामा नहीं किया।