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Ghaziabad News: हादसे के बाद पुतलों में ग्रीन पटाखा लगाने की खुली पोल
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निशा ठाकुर
साहिबाबाद। लाजपत नगर रामलीला मैदान में हुए हादसे ने रामलीला के दौरान पुतलों में ग्रीन पटाखा लगाए जाने की पोल खोल दी। बढ़ते प्रदूषण के चलते पीसीबी के नियमों के मुताबिक पटाखा जलाए जाने पर प्रतिबंध रहता है। बीते वर्षों में सभी रामलीला कमेटी पुतलों में ग्रीन पटाखे लगाए जाने का ही दावा करती आ रही है, यह दावा कितना सच है, यह सोमवार हुए भयानक हादसे ने बता दिया। हैरत की बात तो यह है कि रामलीला समिति ग्रीन पटाखा लगाए जाने की बात कहती है और अधिकारी मान लेते हैं। आज तक कभी किसी भी विभागीय अधिकारी ने पुतलों में कौन से पटाखे लगाए जा रहे हैं इसकी पड़ताल नहीं की है। रामलीला समिति आयोजन के लिए विभिन्न विभागों से एनओसी लेते हैं, एनओसी देने के बाद यदि कोई अधिकारी कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण करता तो शायद इस तरह खुलेआम मैदान में बारूद नहीं रखा जाता। नगर निगम, पुलिस प्रशासन से लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तक के अधिकारियों की आंखें इस हादसे ने खोल दी है।
इनसेट
हादसे के बाद खुली आंख अब अधिकारी करेंगे पुतलों की जांच
बोर्ड ने आगामी दिनों के लिए अपनी जांच का शैड्यूल तक तैयार कर लिया है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी अंकित सिंह ने बताया कि रामलीला समितियों को एनओसी जिला प्रशासन की ओर से दी जाती है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ऐसे इलाकों में भी पहुंचेगी जहां चोरी छिपे पटाखे बनाए जाते हैं। इसके अलावा रामलीलाओं का भी निरीक्षण करेगी।
रामलीला मैदान में इस तरह का हुआ पहला हादसा
अब तक लोनी में पटाखा बनाने के दौरान हर वर्ष इस तरह के हादसे होते हैं। शहर के बीचो-बीच, वह भी रामलीला मैदान में इस तरह विस्फोट होने का यह पहला मामला है। आम तौर पर रामलीला मैदानों में बनकर तैयार किए गए पुतलों में दशहरा से एक दिन पहले या उसी दिन विस्फोटक सामग्री फिट की जाती है और पुतलों को खड़ा कर एहतियातन दो किमी दायरे में बैरिकेडिंग कर दी जाती है, ताकि किसी तरह का कोई हादसा न हो सके।
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साहिबाबाद। लाजपत नगर रामलीला मैदान में हुए हादसे ने रामलीला के दौरान पुतलों में ग्रीन पटाखा लगाए जाने की पोल खोल दी। बढ़ते प्रदूषण के चलते पीसीबी के नियमों के मुताबिक पटाखा जलाए जाने पर प्रतिबंध रहता है। बीते वर्षों में सभी रामलीला कमेटी पुतलों में ग्रीन पटाखे लगाए जाने का ही दावा करती आ रही है, यह दावा कितना सच है, यह सोमवार हुए भयानक हादसे ने बता दिया। हैरत की बात तो यह है कि रामलीला समिति ग्रीन पटाखा लगाए जाने की बात कहती है और अधिकारी मान लेते हैं। आज तक कभी किसी भी विभागीय अधिकारी ने पुतलों में कौन से पटाखे लगाए जा रहे हैं इसकी पड़ताल नहीं की है। रामलीला समिति आयोजन के लिए विभिन्न विभागों से एनओसी लेते हैं, एनओसी देने के बाद यदि कोई अधिकारी कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण करता तो शायद इस तरह खुलेआम मैदान में बारूद नहीं रखा जाता। नगर निगम, पुलिस प्रशासन से लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तक के अधिकारियों की आंखें इस हादसे ने खोल दी है।
इनसेट
हादसे के बाद खुली आंख अब अधिकारी करेंगे पुतलों की जांच
बोर्ड ने आगामी दिनों के लिए अपनी जांच का शैड्यूल तक तैयार कर लिया है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी अंकित सिंह ने बताया कि रामलीला समितियों को एनओसी जिला प्रशासन की ओर से दी जाती है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ऐसे इलाकों में भी पहुंचेगी जहां चोरी छिपे पटाखे बनाए जाते हैं। इसके अलावा रामलीलाओं का भी निरीक्षण करेगी।
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रामलीला मैदान में इस तरह का हुआ पहला हादसा
अब तक लोनी में पटाखा बनाने के दौरान हर वर्ष इस तरह के हादसे होते हैं। शहर के बीचो-बीच, वह भी रामलीला मैदान में इस तरह विस्फोट होने का यह पहला मामला है। आम तौर पर रामलीला मैदानों में बनकर तैयार किए गए पुतलों में दशहरा से एक दिन पहले या उसी दिन विस्फोटक सामग्री फिट की जाती है और पुतलों को खड़ा कर एहतियातन दो किमी दायरे में बैरिकेडिंग कर दी जाती है, ताकि किसी तरह का कोई हादसा न हो सके।
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