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Ghaziabad News: गायब हो गए शहर के दो ऐतिहासिक दरवाजे, एक साल बाद भी नहीं आई जांच रिपोर्ट
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गाजियाबाद। आजादी के समय गाजियाबाद शहर चार गेटों के अंदर बसता था। समय के साथ शहर का विस्तार हुआ और ऐतिहासिक धरोहरें अतिक्रमण की भेंट चढ़ गईं। सिहानी गेट और शाही गेट का वजूद ही खत्म हो गया। पिछले साल इन दोनों गेटों के गायब होने की शिकायत तत्कालीन डीएम से की गई थी, जिसकी जांच सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपी गई। एक साल बाद भी जांच रिपोर्ट नहीं आई है।
इतिहासकार एसएन शर्मा बताते हैं कि गाजियाबाद 1975 तक मेरठ की तहसील था। तब तक चारों गेट मौजूद थे। घंटाघर चौपला और सिहानी बाजार मुख्य बाजार थे। जहां आज कपूर बेकरी है, वहां सिहानी गेट था और चौपला मंदिर के आगे भोलानाथ पंसारी की दुकान के सामने शाही गेट था। ये दोनों अब नहीं हैं। घंटाघर के पश्चिम में दिल्ली गेट और पूरब में रमतेराम रोड पर डासना गेट अभी मौजूद हैं, हालांकि दिल्ली गेट के फाटक जर्जर हो चुके हैं।
88 वर्षीय सरदार गुरुदेव सिंह बताते हैं कि चारों गेट रात आठ बजे के बाद बंद हो जाते थे। इनकी ऊंचाई करीब 30 फुट थी। घंटाघर रामलीला मैदान के पास बसें खड़ी होती थीं। बंटवारे के बाद पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को पंजाब लेन के आसपास बसाया गया था।
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पूर्व पार्षद जाकिर सैफी ने बताया कि नौ अप्रैल 2024 को डीएम से दोनों गेटों के गायब होने की शिकायत की थी। डीएम ने जांच सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपी थी, लेकिन आज तक रिपोर्ट का पता नहीं चला।
इतिहासकार एसएन शर्मा बताते हैं कि गाजियाबाद 1975 तक मेरठ की तहसील था। तब तक चारों गेट मौजूद थे। घंटाघर चौपला और सिहानी बाजार मुख्य बाजार थे। जहां आज कपूर बेकरी है, वहां सिहानी गेट था और चौपला मंदिर के आगे भोलानाथ पंसारी की दुकान के सामने शाही गेट था। ये दोनों अब नहीं हैं। घंटाघर के पश्चिम में दिल्ली गेट और पूरब में रमतेराम रोड पर डासना गेट अभी मौजूद हैं, हालांकि दिल्ली गेट के फाटक जर्जर हो चुके हैं।
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88 वर्षीय सरदार गुरुदेव सिंह बताते हैं कि चारों गेट रात आठ बजे के बाद बंद हो जाते थे। इनकी ऊंचाई करीब 30 फुट थी। घंटाघर रामलीला मैदान के पास बसें खड़ी होती थीं। बंटवारे के बाद पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को पंजाब लेन के आसपास बसाया गया था।
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पूर्व पार्षद जाकिर सैफी ने बताया कि नौ अप्रैल 2024 को डीएम से दोनों गेटों के गायब होने की शिकायत की थी। डीएम ने जांच सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपी थी, लेकिन आज तक रिपोर्ट का पता नहीं चला।