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Ghaziabad News: शहर के छात्रों को स्मैक बेचने आए दो विदेशी तस्कर पकड़े
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गाजियाबाद। क्राइम ब्रांच ने सोमवार तड़के साढ़े तीन बजे हापुड़ चुंगी से नाइजीरिया के नागरिक इनोसेंट (48) और तंजानिया की नीमा सेबस्तियन (31) को गिरफ्तार कर लिया। दोनों के पास से 415 ग्राम स्मैक (ब्राउन शुगर) बरामद की गई। दोनों ने पुलिस पूछताछ में बताया कि वे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (दिल्ली-एनसीआर) में काफी समय से नशे की तस्करी कर रहे हैं। गाजियाबाद में एक एजेंट को सप्लाई देने आए थे। एजेंट इसे शहर के छात्र-छात्राओं को बेचता है। उसके पास डिमांड आने पर ही वे लोग सप्लाई लेकर आते हैं।
एडीसीपी क्राइम सच्चिदानंद ने बताया कि क्राइम ब्रांच के पास सटीक सूचना थी कि दिल्ली का एक गिरोह गाजियाबाद में नशे की तस्करी कर रहा है। इस गिरोह में विदेशी नागरिक होने की जानकारी भी मिली थी। इसी के बाद जाल बिछाया गया था। इनोसेंट और नीमा ने बताया कि वे 2019 से दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद, मेरठ और बागपत में स्मैक लेकर जाते हैं। विदेशी होने की वजह से पुलिस उन पर आसानी से शक नहीं करती है। उनसे बरामद स्मैक की कीमत लगभग 12 लाख है।
उन्होंने बताया है कि दिल्ली का एक बड़ा माफिया उन्हें खेप देता है। वे इसे बताई गई जगह पर पहुंचाते हैं। इसके आगे एजेंट ले जाता है। दोनों ने न तो माफिया का नाम बताया और न ही एजेंटों का। सिर्फ इतनी जानकारी दी कि उन्हें हापुड़ चुंगी पर माल देकर बागपत जाना था। उनके मोबाइल नंबर की काॅल डिटेल निकलवाई गई है। इससे कुछ जानकारी मिली है, जिस पर काम किया जा रहा है। ये तस्कर कोड वर्ड में बात करते हैं। स्मैक और चरस के लिए दवाई कहते हैं। खेप को डोज बोलते हैं। खास बात यह है कि इनोसेंट और नीमा ने तस्करी के लिए ही टूटी-फूटी हिंदी सीखी है।
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तिब्बत बाजार में भी हैं एजेंट : दिल्ली- एनसीआर में कई जगह लगने वाले तिब्बत बाजार में भी बड़ी संख्या में विदेशी काम करते हैं। नीमा ने पुलिस को बताया कि तिब्बत बाजार में कपड़े का काम करने वाली विदेशी युवतियों से भी कई बड़े माफिया नशा तस्करी का काम करा रहे हैं। पुलिस अब तिब्बत बाजार में काम करने वाले युवक-युवतियों की भूमिका की जांच में जुट गई है।
मोबाइल में मिले गायकों
और सफेदपोशों के नंबर
(अहम सुराग)
दोनों के मोबाइल फोन में दिल्ली- एनसीआर के अलावा पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और नेपाल के कई गायकों और सफेदपोशों के नंबर मिले हैं। एडीसीपी ने बताया कि मोबाइल से मिली जानकारी के आधार पर दो टीमों का गठन किया गया है। जल्द ही बड़ा खुलासा हो सकता है। दोनों को एक खेप पहुंचाने के 20-20 हजार रुपये मिलते हैं। एक महीने में सात से दस खेप पहुंचा देते हैं। इस तरह डेढ़ से दो लाख रुपये मिल जाते हैं। नीमा ने अपना वीजा व पासपोर्ट मोबाइल में पुलिस को दिखाया। इनोसेंट ने बताया कि उसका वीजा व पासपोर्ट कहीं खो गए हैं।
तीन महीने में घर, हर
जिले में बदलते हैं कार
(शातिराना अंदाज)
नीमा दिल्ली के चंद्र विहार और इनोसेंट विकासपुरी में किराये में रहता है। वे तीन महीने में अपना कमरा बदल देते हैं। मकान मालिक को बताते थे कि वे कपड़े बेचने का काम करते हैं। पुलिस मकान मालिकों से भी संपर्क साध रही है। एडीसीपी क्राइम सच्चिदानंद ने बताया कि दिल्ली से दोनों जिस कार में बैठकर आए थे, वह उनको हापुड़ चुंगी चौराहे पर छोड़कर चली गई। यहां से उनको दूसरी कार में बागपत जाना था। बागपत के बाद पंजाब जाने का कार्यक्रम था। नीमा ने बताया कि वाहन नंबर के आधार पर मुखबिरी के बावजूद भी वे पकड़े न जा सकें, इसके लिए एक जिले से दूसरे में जाने के लिए कार बदलते थे। इसका पूरा इंतजाम माफिया कराता था।
गुर्गों तक ही पहुंचे पुलिस के हाथ
(अधूरा खुलासा)
पहले भी खुलासा हो चुका है कि दिल्ली-एनसीआर में कई गिरोह नशे की तस्करी कर रहे हैं। यह भी पता चल चुका है कि तस्करों के निशाने पर इंजीनियरिंग, मेडिकल और प्रबंधन काॅलेजों के छात्र-छात्राएं हैं। इतना ही नहीं। गिरफ्तार तस्कर ये भी बता चुके हैं कि नशे का सामान दिल्ली, देहरादून, बरेली और गोरखपुर से लाया जाता है। इसके बावजूद पुलिस एक बार किसी गिरोह के सभी सदस्यों को नहीं पकड़ पाई है। हर बार गुर्गे हाथ आ रहे हैं लेकिन माफिया तक पुलिस के हाथ नहीं पहुंच रहे हैं। गाजियाबाद में पहले भी कई नशा तस्कर पकड़े जा चुके हैं।
07 अक्तूबर 2023
लोनी में दो तस्कर पकड़े। पांच किलो बरामद हुई। गिरोह के सरगना का पुलिस पता नहीं लगा सकी।
आठ अप्रैल 2023
मुरादनगर में खातून गैंग की पांच तस्कर गिरफ्तार की गईं। उनसे 13 किलो अफीम और एक किलो चरस मिली। गिरोह का सरगना नहीं पकड़ा गया।
22 सितंबर 2022
क्राइम ब्रांच ने दो तस्कर गिरफ्तार किए। उनसे 31 लाख रुपये कीमत की हेरोइन बरामद की गई लेकिन गिरोह के बड़े खिलाड़ी हाथ नहीं आए।
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एडीसीपी क्राइम सच्चिदानंद ने बताया कि क्राइम ब्रांच के पास सटीक सूचना थी कि दिल्ली का एक गिरोह गाजियाबाद में नशे की तस्करी कर रहा है। इस गिरोह में विदेशी नागरिक होने की जानकारी भी मिली थी। इसी के बाद जाल बिछाया गया था। इनोसेंट और नीमा ने बताया कि वे 2019 से दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद, मेरठ और बागपत में स्मैक लेकर जाते हैं। विदेशी होने की वजह से पुलिस उन पर आसानी से शक नहीं करती है। उनसे बरामद स्मैक की कीमत लगभग 12 लाख है।
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उन्होंने बताया है कि दिल्ली का एक बड़ा माफिया उन्हें खेप देता है। वे इसे बताई गई जगह पर पहुंचाते हैं। इसके आगे एजेंट ले जाता है। दोनों ने न तो माफिया का नाम बताया और न ही एजेंटों का। सिर्फ इतनी जानकारी दी कि उन्हें हापुड़ चुंगी पर माल देकर बागपत जाना था। उनके मोबाइल नंबर की काॅल डिटेल निकलवाई गई है। इससे कुछ जानकारी मिली है, जिस पर काम किया जा रहा है। ये तस्कर कोड वर्ड में बात करते हैं। स्मैक और चरस के लिए दवाई कहते हैं। खेप को डोज बोलते हैं। खास बात यह है कि इनोसेंट और नीमा ने तस्करी के लिए ही टूटी-फूटी हिंदी सीखी है।
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तिब्बत बाजार में भी हैं एजेंट : दिल्ली- एनसीआर में कई जगह लगने वाले तिब्बत बाजार में भी बड़ी संख्या में विदेशी काम करते हैं। नीमा ने पुलिस को बताया कि तिब्बत बाजार में कपड़े का काम करने वाली विदेशी युवतियों से भी कई बड़े माफिया नशा तस्करी का काम करा रहे हैं। पुलिस अब तिब्बत बाजार में काम करने वाले युवक-युवतियों की भूमिका की जांच में जुट गई है।
मोबाइल में मिले गायकों
और सफेदपोशों के नंबर
(अहम सुराग)
दोनों के मोबाइल फोन में दिल्ली- एनसीआर के अलावा पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और नेपाल के कई गायकों और सफेदपोशों के नंबर मिले हैं। एडीसीपी ने बताया कि मोबाइल से मिली जानकारी के आधार पर दो टीमों का गठन किया गया है। जल्द ही बड़ा खुलासा हो सकता है। दोनों को एक खेप पहुंचाने के 20-20 हजार रुपये मिलते हैं। एक महीने में सात से दस खेप पहुंचा देते हैं। इस तरह डेढ़ से दो लाख रुपये मिल जाते हैं। नीमा ने अपना वीजा व पासपोर्ट मोबाइल में पुलिस को दिखाया। इनोसेंट ने बताया कि उसका वीजा व पासपोर्ट कहीं खो गए हैं।
तीन महीने में घर, हर
जिले में बदलते हैं कार
(शातिराना अंदाज)
नीमा दिल्ली के चंद्र विहार और इनोसेंट विकासपुरी में किराये में रहता है। वे तीन महीने में अपना कमरा बदल देते हैं। मकान मालिक को बताते थे कि वे कपड़े बेचने का काम करते हैं। पुलिस मकान मालिकों से भी संपर्क साध रही है। एडीसीपी क्राइम सच्चिदानंद ने बताया कि दिल्ली से दोनों जिस कार में बैठकर आए थे, वह उनको हापुड़ चुंगी चौराहे पर छोड़कर चली गई। यहां से उनको दूसरी कार में बागपत जाना था। बागपत के बाद पंजाब जाने का कार्यक्रम था। नीमा ने बताया कि वाहन नंबर के आधार पर मुखबिरी के बावजूद भी वे पकड़े न जा सकें, इसके लिए एक जिले से दूसरे में जाने के लिए कार बदलते थे। इसका पूरा इंतजाम माफिया कराता था।
गुर्गों तक ही पहुंचे पुलिस के हाथ
(अधूरा खुलासा)
पहले भी खुलासा हो चुका है कि दिल्ली-एनसीआर में कई गिरोह नशे की तस्करी कर रहे हैं। यह भी पता चल चुका है कि तस्करों के निशाने पर इंजीनियरिंग, मेडिकल और प्रबंधन काॅलेजों के छात्र-छात्राएं हैं। इतना ही नहीं। गिरफ्तार तस्कर ये भी बता चुके हैं कि नशे का सामान दिल्ली, देहरादून, बरेली और गोरखपुर से लाया जाता है। इसके बावजूद पुलिस एक बार किसी गिरोह के सभी सदस्यों को नहीं पकड़ पाई है। हर बार गुर्गे हाथ आ रहे हैं लेकिन माफिया तक पुलिस के हाथ नहीं पहुंच रहे हैं। गाजियाबाद में पहले भी कई नशा तस्कर पकड़े जा चुके हैं।
07 अक्तूबर 2023
लोनी में दो तस्कर पकड़े। पांच किलो बरामद हुई। गिरोह के सरगना का पुलिस पता नहीं लगा सकी।
आठ अप्रैल 2023
मुरादनगर में खातून गैंग की पांच तस्कर गिरफ्तार की गईं। उनसे 13 किलो अफीम और एक किलो चरस मिली। गिरोह का सरगना नहीं पकड़ा गया।
22 सितंबर 2022
क्राइम ब्रांच ने दो तस्कर गिरफ्तार किए। उनसे 31 लाख रुपये कीमत की हेरोइन बरामद की गई लेकिन गिरोह के बड़े खिलाड़ी हाथ नहीं आए।