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Ghaziabad News: रात ही नहीं, दिन में भी दौड़ रहे ट्रॉले...यात्रियों के लिए मुसीबत
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गाजियाबाद। दिल्ली-एनसीआर के प्रमुख रेलवे स्टेशनों में शामिल गाजियाबाद रेलवे स्टेशन के बाहर सड़क का रुका हुआ काम यात्रियों के लिए लगातार मुसीबत बना हुआ है।
इस सड़क पर फिलहाल यात्रियों को राहत देने के लिए कोई ठोस व्यवस्था नजर नहीं आ रही है। लिहाजा स्टेशन पहुंचने वाले यात्रियों को रोजाना धूल, जर्जर सड़क और भारी वाहनों की आवाजाही के बीच से गुजरना पड़ रहा है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, जीटी रोड से गाजियाबाद रेलवे स्टेशन की ओर आने वाले मुख्य मार्ग पर अगस्त और सितंबर में हुई भारी बारिश व भारी वाहनों के आवागमन के चलते निर्माण कार्य रोकना पड़ा था।
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अक्तूबर का पहला सप्ताह बीतने के बावजूद काम दोबारा शुरू नहीं हो सका है। अधिकारियों के अनुसार, सड़क निर्माण पूरा करने का लक्ष्य नवंबर तक रखा गया है, लेकिन तब तक यात्रियों की परेशानी कम करने के लिए कोई वैकल्पिक या अस्थायी इंतजाम नहीं किए गए हैं। इसको लेकर संवाद न्यूज एजेंसी की ओर से बीते चार दिनों से स्टेशन के बाहर पड़ताल की जा रही है।
बृहस्पतिवार को भी हालात जस के तस मिले। यही नहीं, रोजाना रात में गुजरने वाले ट्रॉले दिन में भी धूल उड़ाते हुए दौड़ते दिखे। हालांकि, ट्रॉले दोपहिया और हल्के चारपहिया वाहनों के लिए खोले गए रास्ते से नहीं गुजरे, लेकिन जर्जर पड़े हिस्से से उनके गुजरने के दौरान सड़क पर जमा धूल हवा में उड़ती रही। इस दौरान स्टेशन जाने वाले यात्री धूल से बचने के लिए दौड़कर या मुंह ढककर रास्ता पार करने के लिए मजबूर दिखे।
इस सड़क पर फिलहाल यात्रियों को राहत देने के लिए कोई ठोस व्यवस्था नजर नहीं आ रही है। लिहाजा स्टेशन पहुंचने वाले यात्रियों को रोजाना धूल, जर्जर सड़क और भारी वाहनों की आवाजाही के बीच से गुजरना पड़ रहा है।
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रेलवे अधिकारियों के अनुसार, जीटी रोड से गाजियाबाद रेलवे स्टेशन की ओर आने वाले मुख्य मार्ग पर अगस्त और सितंबर में हुई भारी बारिश व भारी वाहनों के आवागमन के चलते निर्माण कार्य रोकना पड़ा था।
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अक्तूबर का पहला सप्ताह बीतने के बावजूद काम दोबारा शुरू नहीं हो सका है। अधिकारियों के अनुसार, सड़क निर्माण पूरा करने का लक्ष्य नवंबर तक रखा गया है, लेकिन तब तक यात्रियों की परेशानी कम करने के लिए कोई वैकल्पिक या अस्थायी इंतजाम नहीं किए गए हैं। इसको लेकर संवाद न्यूज एजेंसी की ओर से बीते चार दिनों से स्टेशन के बाहर पड़ताल की जा रही है।
बृहस्पतिवार को भी हालात जस के तस मिले। यही नहीं, रोजाना रात में गुजरने वाले ट्रॉले दिन में भी धूल उड़ाते हुए दौड़ते दिखे। हालांकि, ट्रॉले दोपहिया और हल्के चारपहिया वाहनों के लिए खोले गए रास्ते से नहीं गुजरे, लेकिन जर्जर पड़े हिस्से से उनके गुजरने के दौरान सड़क पर जमा धूल हवा में उड़ती रही। इस दौरान स्टेशन जाने वाले यात्री धूल से बचने के लिए दौड़कर या मुंह ढककर रास्ता पार करने के लिए मजबूर दिखे।