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Ghaziabad News: सीएम के निर्देश पर भी नहीं हुआ इंदिरापुरम का हस्तांतरण

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 05 Mar 2024 01:32 AM IST
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Transfer of Indirapuram did not happen even on the instructions of CM
गाजियाबाद/साहिबाबाद। इंदिरापुरम हस्तांतरण का विवाद मुख्यमंत्री के निर्देश के ढाई महीने बाद भी हल नहीं हो पाया है। करीब 15 वर्ष से इस मसले पर इस अवधि में हस्तांतरण के लिए पांच बार समिति गठित हुई, वहीं 23 बार पत्राचार हो चुका है। ढाई माह पूर्व दिसंबर-2023 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जब प्रताप विहार स्थित जल निगम के गेस्ट हाउस में रात्रि प्रवास के लिए पहुंचे तो उन्होंने भी अधिकारियों को हस्तांतरण प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए थे। बावजूद इसके अभी तक यह प्रक्रिया शुरू भी नहीं हो सकी है। अब मंगलवार को जीडीए उपाध्यक्ष और नगर आयुक्त समेत दोनों विभागों के अधिकारियों के बीच अहम बैठक होगी। इसके बाद प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
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इंदिरापुरम से निगम पार्षद संजय सिंह का कहना है कि मुख्यमंत्री ने इस कॉलोनी के लोगों के दर्द को समझा है और हस्तांतरण के निर्देश दिए। बावजूद इसके अब तक अधिकारी शांत बैठे हुए हैं। उन्होंने बताया कि जीडीए ने इंदिरापुरम योजना बसाने की शुरुआत 1984 से की यहां मकनपुर के पास से अपनी जमीनों का खांका तैयार किया। वर्ष 1989 में जीडीए की इंदिरापुरम में 1200 एकड़ जमीन नापी गई जिसमें सबसे पहले न्यायखंड 1,2,3 के लिए आवासीय भूखंड काटे गए। इसके बाद जीडीए ने बहुमंजिला इमारतों के लिए बिल्डरों को भूखंड बेचने शुरू किए। सबसे पहले वर्ष 1997 में शिप्रा रिवेरा और फिर इसके बाद शिप्रा सनसिटी और फिर वर्ष 2000 तक इंदिरापुरम में कई बहुमंजिला इमारतें खड़ी हो गई। उनका कहना है कि वर्ष 2002-2003 में हस्तांतरण के लिए जीडीए की ओर से पहली बार नगर निगम को पत्र लिखा गया था। इसके बाद से अब तक कुल 23 पत्र भेजे जा चुके हैं और हस्तांतरण के लिए पांच बार समिति गठित की गई, लेकिन समाधान नहीं निकला।
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निगम से नहीं मिल पा रहीं सुविधाएं

इंदिरापुरम क्षेत्र के पार्षदों का कहना है कि हस्तांतरण न होने की वजह से इंदिरापुरम के करीब चार लाख लोगों को नगर निगम से सड़क, नाली और इंटरलॉकिंग टाइल्स, पार्काें की मरम्मत की सुविधाओं नहीं मिल रही है। पार्षद संजय सिंह का कहना है कि इंदिरापुरम में कुल सात वार्ड हैं जिसमें से छह वार्ड के पार्षद अपने फंड का एक रुपया भी नहीं खर्च कर पाते। अपने इलाके के साथ-सफाई और सड़क बनवाने के कार्य के लिए यह पार्षद जीडीए अधिकारियों को ज्ञापन ही सौंपते रह जाते हैं।
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----सालाना दे रहे 45 करोड़ कर

गाजियाबाद के इंदिरापुरम से सबसे अधिक कर चुकाया जाता है। इंदिरापुरम में रह रहे लोग गृह कर के नाम पर नगर निगम को प्रत्येक वर्ष 17 से 18 करोड़ का टैक्स जमा करते हैं। वहीं सुविधा शुल्क के नाम पर जीडीए को सालाना 30 से 32 करोड़ रुपये जमा किया जाता है। इस तरह तकरीबन 45 करोड़ का कर नगर निगम और जीडीए दोनों विभागों को जमा किया जाता है।

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आज जीडीए-नगर निगम के अधिकारियों के बीच होगी अहम बैठक
इंदिरापुरम के साथ-साथ स्वर्णजयंती पुरम, तुलसी निकेतन समेत कई अन्य कॉलोनियों के मेंटेनेंस के हस्तांतरण के लिए जीडीए और नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच मंगलवार को अहम बैठक होगी। शाम चार बजे जीडीए कार्यालय में होने वाली इस बैठक की अध्यक्षता जीडीए उपाध्यक्ष इंद्र विक्रम सिंह करेंगे और इसमें नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक समेत जीडीए व निगम के अन्य वरिष्ठ अधिकारी रहेंगे।
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