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Ghaziabad News: सितंबर में पूरा हुआ प्रशिक्षण, अप्रैल तक नहीं मिली टूल किट
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माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। जिला उद्योग केंद्र की ओर से विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत युवाओं के प्रशिक्षण का कार्य पूरा हो चुका है। प्रशिक्षण के छह महीने बीत जाने के बाद भी अब तक युवाओं को प्रशिक्षण पूरा होने के बाद मिलने वाली टूल किट नहीं मिल सकी है। इससे युवा जिला उद्योग कार्यालय के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
सितंबर में 80 से अधिक युवाओं ने विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत विभिन्न ट्रेड का प्रशिक्षण लिया। इसके बाद इन्हें ट्रेड से संबंधित कार्य आने वाले उपकरणों की किट मुहैया कराई जानी थी। लेकिन तीन महीने बीत जाने के बाद भी इन्हें किट नहीं मिल सकी है। इससे युवाओं को जिन कार्यों का प्रशिक्षण दिया गया है। वह भी कार्य वो नहीं कर पा रहे हैं। योजना के तहत प्रशिक्षण पाने वाले रवि ने बताया कि उन्होंने बढ़ई के कार्य के लिए प्रशिक्षण लिया था, लेकिन अब तक उन्हें किट नहीं मिल सकी है। वह लगातार किट के लिए जिला उद्योग केंद्र के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। योजना के तहत बढ़ई (सुथार/बधाई), नाव निर्माता, लोहार (लोहार), हथौड़ा और टूल किट निर्माता, ताला बनाने वाला, सुनार (सोनार), कुम्हार (कुम्हार), मूर्तिकार (पत्थर तराशने वाले), मोची (जूता बनाने वाला), धोबी समेत अन्य पारंपरिक शिल्प जैसे बुनाई, मिट्टी के बर्तन बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता है।
जिला उद्योग उपायुक्त श्रीनाथ पासवान ने बताया कि योजना के तहत प्रशिक्षण का कार्य पूरा हो चुका है। अभ्यर्थियों को मिलने वाली टूल किट लखनऊ से आती है, जो अब तक नहीं आई है। आते ही किट का वितरण कर दिया जाएगा।
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गाजियाबाद। जिला उद्योग केंद्र की ओर से विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत युवाओं के प्रशिक्षण का कार्य पूरा हो चुका है। प्रशिक्षण के छह महीने बीत जाने के बाद भी अब तक युवाओं को प्रशिक्षण पूरा होने के बाद मिलने वाली टूल किट नहीं मिल सकी है। इससे युवा जिला उद्योग कार्यालय के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
सितंबर में 80 से अधिक युवाओं ने विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत विभिन्न ट्रेड का प्रशिक्षण लिया। इसके बाद इन्हें ट्रेड से संबंधित कार्य आने वाले उपकरणों की किट मुहैया कराई जानी थी। लेकिन तीन महीने बीत जाने के बाद भी इन्हें किट नहीं मिल सकी है। इससे युवाओं को जिन कार्यों का प्रशिक्षण दिया गया है। वह भी कार्य वो नहीं कर पा रहे हैं। योजना के तहत प्रशिक्षण पाने वाले रवि ने बताया कि उन्होंने बढ़ई के कार्य के लिए प्रशिक्षण लिया था, लेकिन अब तक उन्हें किट नहीं मिल सकी है। वह लगातार किट के लिए जिला उद्योग केंद्र के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। योजना के तहत बढ़ई (सुथार/बधाई), नाव निर्माता, लोहार (लोहार), हथौड़ा और टूल किट निर्माता, ताला बनाने वाला, सुनार (सोनार), कुम्हार (कुम्हार), मूर्तिकार (पत्थर तराशने वाले), मोची (जूता बनाने वाला), धोबी समेत अन्य पारंपरिक शिल्प जैसे बुनाई, मिट्टी के बर्तन बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता है।
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जिला उद्योग उपायुक्त श्रीनाथ पासवान ने बताया कि योजना के तहत प्रशिक्षण का कार्य पूरा हो चुका है। अभ्यर्थियों को मिलने वाली टूल किट लखनऊ से आती है, जो अब तक नहीं आई है। आते ही किट का वितरण कर दिया जाएगा।
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