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Ghaziabad News: बैंक का 30 लाख कर्ज चुकाने से बचने के लिए रची खुद के अपहरण की कहानी
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इंदिरापुरम। वसुंधरा सेक्टर-एक में आठ मार्च 2022 को हुए सोनीपत निवासी राजेश के अपहरण मामले में डीसीपी की स्वाट टीम ने पति-पत्नी को गिरफ्तार कर घटना का खुलासा किया है। पुलिस का कहना है कि राजेश बैंक का 30 लाख रुपये कर्ज न चुकाने के लिए अपहरण की झूठी कहानी रचकर गायब हो गया था। पत्नी ने भी चार बिल्डरों के खिलाफ इंदिरापुरम कोतवाली में अपहरण और धमकी का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने दोनों के फोन की जांच कर सोनीपत व पानीपत से सीसीटीवी फुटेज कब्जे में ली है।
डीसीपी निमिष पाटील ने बताया कि स्वाट टीम ने राजेश और उसकी पत्नी पुष्पा निवासी बिलंदपुर थाना कन्नौर सोनीपत को गिरफ्तार किया है। वह पानीपत कोर्ट में एक वकील का मुंशी भी रह चुका है। पुष्पा ने 8 मार्च 2022 को बिल्डर हिमांशु चौधरी, विजेंद्र चौधरी, रविंद्र चौधरी और रेखा चौधरी पर पति को अपहरण करने व रुपयों की एवज में धमकी देने का मुकदमा कराया था। इंदिरापुरम पुलिस को कई दिनों तक घटनास्थल के आसपास कोई सीसीटीवी फुटेज नहीं मिले थे।
इस बीच चारों बिल्डरों से पूछताछ हुई लेकिन टीम को कोई अहम सबूत हाथ नहीं लगे। तत्कालीन एसएसपी ने टीमों का गठन किया।बिल्डरों के ठिकाने और संभावित जगहों पर राजेश की तलाश हुई। फिर भी पुलिस खाली हाथ रही। ढाई साल तक पुष्पा लगातार पुलिस पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाती रहीं। उन्होंने न केवल तत्कालीन एसपी सिटी और एसएसपी से मिलकर पति को ढूंढने की गुहार लगाई बल्कि प्रदेश सरकार को भी पत्र लिखकर मांग की। दो महीने पहले वसुंधरा चौकी इंचार्ज रहे भूपेंद्र कुमार सिंह को राजेश के जिंदा होने के सबूत मिले थे। उन्होंने पानीपत के बैंक में राजेश के कैद होने की फुटेज भी कब्जे में ली है।
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कर्जा चुकाने से बचने के लिए रची अपने अपहरण की कहानी :
एसीपी स्वतंत्र कुमार सिंह ने बताया कि राजेश ने 2012-13 में सोनीपत की जमीन बेचकर वसुंधरा सेक्टर-एक में बिल्डर हिमांशु चौधरी, विजेंद्र चौधरी, रविंद्र चौधरी और रेखा चौधरी से तीन फ्लैट खरीदने का सौदा तय किया।राजेश ने बैंक से 30 लाख का लोन लेकर फ्लैट खरीद लिए। बाद में उसे बैंक की किस्त जमा करने में दिक्कत होने लगी। इस बीच उसने व्यापार करने के लिए बिल्डर से तीनों फ्लैट की रजिस्ट्री के बारे में कहा तो उन्होंने मना कर दिया। ऐसे में रजिस्ट्री पर बिल्डरों से विवाद और बैंक लोन नहीं चुकाने पर उसने पत्नी संग मिलकर खुद के अपहरण की कहानी रच डाली।
सोनीपत और पानीपत में जानकारों के घर काटी फरारी:
पुलिस के मुताबिक, राजेश सोनीपत और पानी में जानकारों के घर फरारी काट रहा था। उसने पानीपत में सेक्टर-13-17 वृंदा एंकलेव में ममता मोटर्स पर सात हजार रुपये में नौकरी शुरू कर दी। पुलिस से बचने को वह छह या सात महीने में कमरा खाली कर देता था। उसने पत्नी के अलावा किसी को कुछ नहीं बताया था। इतना ही नहीं, राह चलते लोगों के फोन से पत्नी को व्हाट्सऐप पर कॉल करता था। इधर,पुष्पा बिल्डरों से पैसों की मांग कर पति के अपहरण और धमकी देने के मामले में समझौते की डील कर रही थी। शक होने पर बिल्डरों ने भी पैसे देने से इनकार कर दिया।
बना रखी थी केस डायरी, पत्नी से लेता था पुलिस कार्रवाई की जानकारी :
राजेश इतना शातिर है कि वह व्हाट्सएप कॉल पर पत्नी से पुलिस कार्रवाई की पूरी जानकारी लेता रहता था। उसने एक डायरी में खुद के अपहरण में मार्च 2022 से अप्रैल 2024 तक वसुंधरा चौकी इंचार्ज के नाम, विवेचक, थाना प्रभारी के नाम, एसीपी और स्वाट टीम में शामिल लोगों के नाम, बिल्डरों के नाम समेत एक-एक कार्रवाई को लिखा हुआ था। इतना ही नहीं, हाईकोर्ट से जिले के एक पुलिस अधिकारी को नोटिस मिला था तो यह जानकारी भी उसने वकील के नाम के साथ लिख रख था। दो महीने पहले सिम खरीदी और पत्नी के संपर्क में आ गया था।दो-तीन पहले उसने एक बैंक में खाते से ट्रांजेक्शन की थी। स्वाट टीम ने बैंक से फुटेज कब्जे में लेकर उसकी लोकेशन ट्रेस कर ली थी।
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डीसीपी निमिष पाटील ने बताया कि स्वाट टीम ने राजेश और उसकी पत्नी पुष्पा निवासी बिलंदपुर थाना कन्नौर सोनीपत को गिरफ्तार किया है। वह पानीपत कोर्ट में एक वकील का मुंशी भी रह चुका है। पुष्पा ने 8 मार्च 2022 को बिल्डर हिमांशु चौधरी, विजेंद्र चौधरी, रविंद्र चौधरी और रेखा चौधरी पर पति को अपहरण करने व रुपयों की एवज में धमकी देने का मुकदमा कराया था। इंदिरापुरम पुलिस को कई दिनों तक घटनास्थल के आसपास कोई सीसीटीवी फुटेज नहीं मिले थे।
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इस बीच चारों बिल्डरों से पूछताछ हुई लेकिन टीम को कोई अहम सबूत हाथ नहीं लगे। तत्कालीन एसएसपी ने टीमों का गठन किया।बिल्डरों के ठिकाने और संभावित जगहों पर राजेश की तलाश हुई। फिर भी पुलिस खाली हाथ रही। ढाई साल तक पुष्पा लगातार पुलिस पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाती रहीं। उन्होंने न केवल तत्कालीन एसपी सिटी और एसएसपी से मिलकर पति को ढूंढने की गुहार लगाई बल्कि प्रदेश सरकार को भी पत्र लिखकर मांग की। दो महीने पहले वसुंधरा चौकी इंचार्ज रहे भूपेंद्र कुमार सिंह को राजेश के जिंदा होने के सबूत मिले थे। उन्होंने पानीपत के बैंक में राजेश के कैद होने की फुटेज भी कब्जे में ली है।
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कर्जा चुकाने से बचने के लिए रची अपने अपहरण की कहानी :
एसीपी स्वतंत्र कुमार सिंह ने बताया कि राजेश ने 2012-13 में सोनीपत की जमीन बेचकर वसुंधरा सेक्टर-एक में बिल्डर हिमांशु चौधरी, विजेंद्र चौधरी, रविंद्र चौधरी और रेखा चौधरी से तीन फ्लैट खरीदने का सौदा तय किया।राजेश ने बैंक से 30 लाख का लोन लेकर फ्लैट खरीद लिए। बाद में उसे बैंक की किस्त जमा करने में दिक्कत होने लगी। इस बीच उसने व्यापार करने के लिए बिल्डर से तीनों फ्लैट की रजिस्ट्री के बारे में कहा तो उन्होंने मना कर दिया। ऐसे में रजिस्ट्री पर बिल्डरों से विवाद और बैंक लोन नहीं चुकाने पर उसने पत्नी संग मिलकर खुद के अपहरण की कहानी रच डाली।
सोनीपत और पानीपत में जानकारों के घर काटी फरारी:
पुलिस के मुताबिक, राजेश सोनीपत और पानी में जानकारों के घर फरारी काट रहा था। उसने पानीपत में सेक्टर-13-17 वृंदा एंकलेव में ममता मोटर्स पर सात हजार रुपये में नौकरी शुरू कर दी। पुलिस से बचने को वह छह या सात महीने में कमरा खाली कर देता था। उसने पत्नी के अलावा किसी को कुछ नहीं बताया था। इतना ही नहीं, राह चलते लोगों के फोन से पत्नी को व्हाट्सऐप पर कॉल करता था। इधर,पुष्पा बिल्डरों से पैसों की मांग कर पति के अपहरण और धमकी देने के मामले में समझौते की डील कर रही थी। शक होने पर बिल्डरों ने भी पैसे देने से इनकार कर दिया।
बना रखी थी केस डायरी, पत्नी से लेता था पुलिस कार्रवाई की जानकारी :
राजेश इतना शातिर है कि वह व्हाट्सएप कॉल पर पत्नी से पुलिस कार्रवाई की पूरी जानकारी लेता रहता था। उसने एक डायरी में खुद के अपहरण में मार्च 2022 से अप्रैल 2024 तक वसुंधरा चौकी इंचार्ज के नाम, विवेचक, थाना प्रभारी के नाम, एसीपी और स्वाट टीम में शामिल लोगों के नाम, बिल्डरों के नाम समेत एक-एक कार्रवाई को लिखा हुआ था। इतना ही नहीं, हाईकोर्ट से जिले के एक पुलिस अधिकारी को नोटिस मिला था तो यह जानकारी भी उसने वकील के नाम के साथ लिख रख था। दो महीने पहले सिम खरीदी और पत्नी के संपर्क में आ गया था।दो-तीन पहले उसने एक बैंक में खाते से ट्रांजेक्शन की थी। स्वाट टीम ने बैंक से फुटेज कब्जे में लेकर उसकी लोकेशन ट्रेस कर ली थी।