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कई मौके आए जब धड़कनें रुकने जैसी हालत हो गई : वीके सिंह
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गाजियाबाद। उत्तरकाशी में सिल्कियारा और बारकोट के बीच बन रही सुरंग में फंसे 41 श्रमिकों के सकुशल बाहर निकलने के लिए चलाए गए ऑपरेशन में स्थानीय सांसद व केंद्रीय मंत्री वीके सिंह ने भी अहम भूमिका निभाई। बृहस्पतिवार को अपने संसदीय क्षेत्र में लौटकर उन्होंने मीडिया और क्षेत्र की जनता से मुलाकात की। उन्होंने बताया कि 17 दिन चले इस अहम ऑपरेशन में कई मौके ऐसे आए जब धड़कनें रुकने जैसी हालत हो गई। लगता था कि कहीं सारी मेहनत पर पानी न फिर जाए।
जनरल (सेवानिवृत्त) वीके सिंह ने बताया कि सिल्कियारा में पहाड़ ज्यादा पुराने नहीं थे, पक्के पहाड़ों में सुरंग बनाने में खतरा कम होता है। कच्चे पहाड़ होने की वजह से ही उनमें अस्थिरता ज्यादा है और इसीलिए उनके दरक जाने से यह संकट पैदा हुआ। पहाड़ दरकने के बाद मुश्किलें और बढ़ गई थी। मशीनों को इतनी धीमी गति से चलाया गया कि पहाड़ों में कंपन कम से कम हो, ताकि और नई मुश्किलें खड़ी न हो सके। जब भी मशीनें बंद हो जाती तो दिल की धड़कनें और तेज हो जाती थीं।
इस पूरे ऑपरेशन की सफलता में पीएमओ और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री कार्यालय का बड़ा अहम रोल रहा है। श्रमिकों को बाहर निकालने के लिए जिस भी संसाधन या टीम की जरूरत थी, पीएमओ और सीएम ने उस पर तत्काल निर्णय लेकर उपलब्ध कराया। उन्होंने बताया कि टनल का निर्माण पूरा कराकर चार धाम यात्रा के लिए बनाए जा रहे कॉरिडोर का काम जल्द ही पूरा कराया जाएगा। इस हादसे से ऑल वेदर रोड प्रोजेक्ट नहीं रुकेगा।
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एयरलिफ्ट कराई गई थीं ऑगर मशीनें
पहले एक ऑगर मशीन उत्तरांखड सिंचाई विभाग से ली गई, लेकिन यह कम पावर की थी और बीच में फंस गई। इसके बाद नजफगढ़ से 1700 हार्सपावर की ऑगर मशीन एयरलिफ्ट करके मंगाई गई, लेकिन यह मशीन भी लोहे की रॉड में फंसकर टूट गई। इसके बाद इंदौर से ऑगर मशीन लाई गई, लेकिन यह मशीन भी बुरी तरह फंस गई। तीन ऑगर मशीन खराब हो जाने के बाद पहाड़ों के ऊपर से दो जगह डि्रल करने का काम शुरू कर दिया गया था। एक जगह करीब 8.2 मीटर गहरी खोदाई कर ली गई थी। इसी दौरान अन्य विकल्पों पर काम करते हुए टिहरी हाईड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन को बारकोट की साइड में और रेल विकास निगम लिमिटेड को एक अन्य प्वाइंट से मिनी टनल बनाने का काम सौंप दिया गया था। इसी दौरान मैनुअल तरीके से खोदाई कराने के लिए रैट माइनर्स बुलाए गए। उन्होंने खोदाई करते-करते एक पाइप श्रमिकों तक पहुंचाया और उन्हें बाहर निकालने में सफलता मिल सकी।
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जनरल (सेवानिवृत्त) वीके सिंह ने बताया कि सिल्कियारा में पहाड़ ज्यादा पुराने नहीं थे, पक्के पहाड़ों में सुरंग बनाने में खतरा कम होता है। कच्चे पहाड़ होने की वजह से ही उनमें अस्थिरता ज्यादा है और इसीलिए उनके दरक जाने से यह संकट पैदा हुआ। पहाड़ दरकने के बाद मुश्किलें और बढ़ गई थी। मशीनों को इतनी धीमी गति से चलाया गया कि पहाड़ों में कंपन कम से कम हो, ताकि और नई मुश्किलें खड़ी न हो सके। जब भी मशीनें बंद हो जाती तो दिल की धड़कनें और तेज हो जाती थीं।
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इस पूरे ऑपरेशन की सफलता में पीएमओ और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री कार्यालय का बड़ा अहम रोल रहा है। श्रमिकों को बाहर निकालने के लिए जिस भी संसाधन या टीम की जरूरत थी, पीएमओ और सीएम ने उस पर तत्काल निर्णय लेकर उपलब्ध कराया। उन्होंने बताया कि टनल का निर्माण पूरा कराकर चार धाम यात्रा के लिए बनाए जा रहे कॉरिडोर का काम जल्द ही पूरा कराया जाएगा। इस हादसे से ऑल वेदर रोड प्रोजेक्ट नहीं रुकेगा।
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एयरलिफ्ट कराई गई थीं ऑगर मशीनें
पहले एक ऑगर मशीन उत्तरांखड सिंचाई विभाग से ली गई, लेकिन यह कम पावर की थी और बीच में फंस गई। इसके बाद नजफगढ़ से 1700 हार्सपावर की ऑगर मशीन एयरलिफ्ट करके मंगाई गई, लेकिन यह मशीन भी लोहे की रॉड में फंसकर टूट गई। इसके बाद इंदौर से ऑगर मशीन लाई गई, लेकिन यह मशीन भी बुरी तरह फंस गई। तीन ऑगर मशीन खराब हो जाने के बाद पहाड़ों के ऊपर से दो जगह डि्रल करने का काम शुरू कर दिया गया था। एक जगह करीब 8.2 मीटर गहरी खोदाई कर ली गई थी। इसी दौरान अन्य विकल्पों पर काम करते हुए टिहरी हाईड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन को बारकोट की साइड में और रेल विकास निगम लिमिटेड को एक अन्य प्वाइंट से मिनी टनल बनाने का काम सौंप दिया गया था। इसी दौरान मैनुअल तरीके से खोदाई कराने के लिए रैट माइनर्स बुलाए गए। उन्होंने खोदाई करते-करते एक पाइप श्रमिकों तक पहुंचाया और उन्हें बाहर निकालने में सफलता मिल सकी।