{"_id":"68a62be3384729ddb4035c49","slug":"there-was-no-cleaning-in-hindon-but-houses-were-being-built-in-the-submerged-area-shahibabad-news-c-198-1-gbd1023-8890-2025-08-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ghaziabad News: हिंडन में सफाई तो हुई नहीं डूब क्षेत्र में बनते गए मकान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ghaziabad News: हिंडन में सफाई तो हुई नहीं डूब क्षेत्र में बनते गए मकान
विज्ञापन
साहिबाबाद।
हिंडन के प्रति अधिकारियों की लापरवाही कुछ इस तरह की रही कि न तो इन्होंने कभी हिंडन को साफ करने में दिलचस्पी दिखाई और न ही इस क्षेत्र में बनते गए मकानों की कोई सुध ली। अवैध तौर पर डूब क्षेत्र में कालोनियां बसती गईं लेकिन अधिकारी आंखें मूंदे रहे। वर्ष 2023 में आई बाढ़ ने अधिकारियों की लापरवाही का चिट्ठा खोल दिया, जब हिंडन में पानी बढ़ा और यह अपने स्वरूप में आई, इस दौरान करहेड़ा में 200 से अधिक मकान डूब गए।
हिंडन किनारे करहेड़ा, हिंडन विहार, बालाजी विहार, कंच कॉलोनी जैसी कई इलाके हैं जो डूब क्षेत्र में बसा दी गईं। करहेड़ा निवासी व पूर्व पार्षद बिजेंद्र चौहान का कहना है कि पिछले दो दशक में कभी भी किसी भी विभागीय स्तर से उन लोगों ने हिंडन में काम होते नहीं देखा। किनारे में कच्ची कालोनियां कटती गईं, शिकायतों के बाद भी अधिकारी आंखें मूंदे रहे। हिंडन किनारे कई अनधिकृत कालोनियां बस चुकी हैं, जो डूब क्षेत्र में आती हैं।
वर्ष 2023 में जब बाढ़ का पानी हिंडन में आया तो नदी के पानी में कई कॉलोनियां जलमग्न हो गईं थी। उस दौरान लोगों ने अपना घर छोड़ रिश्तेदारों के यहां शरण ली थी। फेडरेशन ऑफ एओए के संरक्षक आलोक कुमार ने एनजीटी एवं सुप्रीम कोर्ट में हिंडन नदी की जमीन पर कालोनियां बसने की शिकायत की थी। आलोक कुमार का कहना है कि अधिकारियों की मिली भगत से नदी की जमीन पर कालोनियां बस रही हैं, जिसमें आम नागरिक का पैसा फंस रहा है। उन्होंने कहा कि यहां रहने वाले लोग मौत के मुहाने पर ही हैं। समाजसेवी व करहेड़ा निवासी सुशील निर्वाण का कहना है कि अधिकारी यदि हिंडन की सुध लेते तो यह दशा न होती। आज यह एक गंदे नाले में तब्दील है, जिसके किनारे लोगों ने घर बनाए हैं।
विज्ञापन
एनजीटी के आदेश पर अर्थला झील के पास 2019 में तोड़े गए थे मकान
समाजसेवी सुशील राघव की एक याचिका की सुनवाई के बाद एनजीटी ने डूब क्षेत्र व अर्थला झील पर हुए अवैध निर्माण को तोड़ गिराने का आदेश जारी किया था। वर्ष 2019 के इस आदेश पर नगर निगम ने पहली बार बड़ी कार्रवाई की थी। बावजूद इसके यहां दोबारा से मकान बन गए लेकिन फिर किसी ने सुध नहीं ली।
2000 क्यूसेक के करीब पहुंचा पानी
हिंडन नदी में कई दिनों से लगातार पानी का स्तर बढ़ रहा है। हिंडन में पानी का स्तर 1970 क्यूसेक हो चुका है। पानी का स्तर बढ़ने के साथ ही डूब क्षेत्र में रहने वाले लोगों की चिंता भी बढ़ने लगी है। प्रशासनिक अधिकारियों ने बुधवार को इस संबंध में बैठक भी की। अधिकारियों का कहना है कि अभी हालात खतरे से बाहर है, आने वाले दिनों में जो भी हो, उसके लिए प्रशासन ने तैयारी पूरी की हुई है।
जिलाधिकारी ने ली सुध
जिलाधिकारी रविंद्र कुमार जांगिड़ ने बुधवार को प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान हिंडन नदी को प्रत्येक स्तर पर साफ-स्वच्छ बनाने के विषय पर चर्चा की। जिलाधिकारी महोदय ने कहा कि जब तक बड़े स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं होती है तब तक हम छोटे-छोटे स्तर पर हिंडन नदी को स्वच्छ व सुंदर बनाने का प्रयास किया जा सकता है।
विज्ञापन
हिंडन के प्रति अधिकारियों की लापरवाही कुछ इस तरह की रही कि न तो इन्होंने कभी हिंडन को साफ करने में दिलचस्पी दिखाई और न ही इस क्षेत्र में बनते गए मकानों की कोई सुध ली। अवैध तौर पर डूब क्षेत्र में कालोनियां बसती गईं लेकिन अधिकारी आंखें मूंदे रहे। वर्ष 2023 में आई बाढ़ ने अधिकारियों की लापरवाही का चिट्ठा खोल दिया, जब हिंडन में पानी बढ़ा और यह अपने स्वरूप में आई, इस दौरान करहेड़ा में 200 से अधिक मकान डूब गए।
हिंडन किनारे करहेड़ा, हिंडन विहार, बालाजी विहार, कंच कॉलोनी जैसी कई इलाके हैं जो डूब क्षेत्र में बसा दी गईं। करहेड़ा निवासी व पूर्व पार्षद बिजेंद्र चौहान का कहना है कि पिछले दो दशक में कभी भी किसी भी विभागीय स्तर से उन लोगों ने हिंडन में काम होते नहीं देखा। किनारे में कच्ची कालोनियां कटती गईं, शिकायतों के बाद भी अधिकारी आंखें मूंदे रहे। हिंडन किनारे कई अनधिकृत कालोनियां बस चुकी हैं, जो डूब क्षेत्र में आती हैं।
विज्ञापन
वर्ष 2023 में जब बाढ़ का पानी हिंडन में आया तो नदी के पानी में कई कॉलोनियां जलमग्न हो गईं थी। उस दौरान लोगों ने अपना घर छोड़ रिश्तेदारों के यहां शरण ली थी। फेडरेशन ऑफ एओए के संरक्षक आलोक कुमार ने एनजीटी एवं सुप्रीम कोर्ट में हिंडन नदी की जमीन पर कालोनियां बसने की शिकायत की थी। आलोक कुमार का कहना है कि अधिकारियों की मिली भगत से नदी की जमीन पर कालोनियां बस रही हैं, जिसमें आम नागरिक का पैसा फंस रहा है। उन्होंने कहा कि यहां रहने वाले लोग मौत के मुहाने पर ही हैं। समाजसेवी व करहेड़ा निवासी सुशील निर्वाण का कहना है कि अधिकारी यदि हिंडन की सुध लेते तो यह दशा न होती। आज यह एक गंदे नाले में तब्दील है, जिसके किनारे लोगों ने घर बनाए हैं।
विज्ञापन
एनजीटी के आदेश पर अर्थला झील के पास 2019 में तोड़े गए थे मकान
समाजसेवी सुशील राघव की एक याचिका की सुनवाई के बाद एनजीटी ने डूब क्षेत्र व अर्थला झील पर हुए अवैध निर्माण को तोड़ गिराने का आदेश जारी किया था। वर्ष 2019 के इस आदेश पर नगर निगम ने पहली बार बड़ी कार्रवाई की थी। बावजूद इसके यहां दोबारा से मकान बन गए लेकिन फिर किसी ने सुध नहीं ली।
2000 क्यूसेक के करीब पहुंचा पानी
हिंडन नदी में कई दिनों से लगातार पानी का स्तर बढ़ रहा है। हिंडन में पानी का स्तर 1970 क्यूसेक हो चुका है। पानी का स्तर बढ़ने के साथ ही डूब क्षेत्र में रहने वाले लोगों की चिंता भी बढ़ने लगी है। प्रशासनिक अधिकारियों ने बुधवार को इस संबंध में बैठक भी की। अधिकारियों का कहना है कि अभी हालात खतरे से बाहर है, आने वाले दिनों में जो भी हो, उसके लिए प्रशासन ने तैयारी पूरी की हुई है।
जिलाधिकारी ने ली सुध
जिलाधिकारी रविंद्र कुमार जांगिड़ ने बुधवार को प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान हिंडन नदी को प्रत्येक स्तर पर साफ-स्वच्छ बनाने के विषय पर चर्चा की। जिलाधिकारी महोदय ने कहा कि जब तक बड़े स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं होती है तब तक हम छोटे-छोटे स्तर पर हिंडन नदी को स्वच्छ व सुंदर बनाने का प्रयास किया जा सकता है।