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Ghaziabad News: 1965 के युद्ध में शहीद हुए एनके मलिक की पत्नी ने कहा यहां आकर महसूस करती हूं उन्हें
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- भारत-पाकिस्तान युद्ध में स्कवार्डन लीडर एनके मलिक 35 वर्ष की उम्र में हुए थे शहीद
माई सिटी रिपोर्टर
साहिबाबाद। वायु सेना दिवस के 94वें स्थापना दिवस में शामिल हुईं शहीद एनके मलिक की पत्नी निर्मला मलिक भले बहुत चल-फिर पाने में सक्षम न हो, लेकिन वायु सेना दिवस के कार्यक्रम में वह हर बार आती हैं। परेड के बाद एक तरफ जवानों के परिजन प्रदर्शनी में लगाए गए लड़ाकू विमानों को देखने में व्यस्त थे, उसी दौरान निर्मला मलिक अपने बीते दिनों को याद कर रही थीं, उन्होंने कहा यहां आकर मैं एनके मलिक साहब को महसूस करती हूं, बहुत अच्छा लगता है यहां आना, लेकिन उन्हें खोने का दर्द भी उभर जाता है।
बीते दिनों को याद करती हुईं निर्मला बताती हैं कि 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में उनके पति एनके मलिक स्क्वाड्रन लीडर विंग एरो के नाम से जानी जाने वाली दूसरी स्क्वाड्रन में सेवारत थे। पाकिस्तान से युद्ध के दौरान उनके पति अंबाला में बतौर स्क्वाड्रन लीडर तैनात थे और वह कई मिशन का हिस्सा भी रहें। 14 सितंबर 1965 को स्क्वाड्रन लीडर एनके मलिक और फ्लाइट लेफ्टिनेंट एएन काले को अमृतसर के ऊपर दो पाकिस्तानी सेबर विमानों को रोकने के लिए भेजा गया। स्क्वाड्रन लीडर एनके मलिक पीएएफ के फ्लाइट लेफ्टिनेंट इम्तियाज भट्टी द्वारा उड़ाए जा रहे दुश्मन के सेबर विमान से मुकाबला किया। इस हवाई लड़ाई में स्क्वाड्रन लीडर एनके मलिक के विमान को कई गोलियां लगीं और उसमें वे भी घायल हो गए। नुकसान के बावजूद, वे किसी तरह भारतीय वायु सेना के अड्डे के पास पहुंचने में कामयाब रहे, लेकिन तकनीकी खराबी के कारण अड्डे पर वापस आते समय उनका विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इसमें वह गंभीर रूप से घायल और बाद में शहीद हो गए। निर्मला ने बताया कि उनके पति 32 वर्ष की आयु में देश की सेवा में अपने प्राणों की आहुति दे दी, अब उनके लिए जीवन बहुत मुश्किल था, लेकिन उन्होंने पति की यादों को अपना हौसला बनाया और आज न चल पाने के बावजूद कार्यक्रम का हिस्सा बनती हैं।
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माई सिटी रिपोर्टर
साहिबाबाद। वायु सेना दिवस के 94वें स्थापना दिवस में शामिल हुईं शहीद एनके मलिक की पत्नी निर्मला मलिक भले बहुत चल-फिर पाने में सक्षम न हो, लेकिन वायु सेना दिवस के कार्यक्रम में वह हर बार आती हैं। परेड के बाद एक तरफ जवानों के परिजन प्रदर्शनी में लगाए गए लड़ाकू विमानों को देखने में व्यस्त थे, उसी दौरान निर्मला मलिक अपने बीते दिनों को याद कर रही थीं, उन्होंने कहा यहां आकर मैं एनके मलिक साहब को महसूस करती हूं, बहुत अच्छा लगता है यहां आना, लेकिन उन्हें खोने का दर्द भी उभर जाता है।
बीते दिनों को याद करती हुईं निर्मला बताती हैं कि 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में उनके पति एनके मलिक स्क्वाड्रन लीडर विंग एरो के नाम से जानी जाने वाली दूसरी स्क्वाड्रन में सेवारत थे। पाकिस्तान से युद्ध के दौरान उनके पति अंबाला में बतौर स्क्वाड्रन लीडर तैनात थे और वह कई मिशन का हिस्सा भी रहें। 14 सितंबर 1965 को स्क्वाड्रन लीडर एनके मलिक और फ्लाइट लेफ्टिनेंट एएन काले को अमृतसर के ऊपर दो पाकिस्तानी सेबर विमानों को रोकने के लिए भेजा गया। स्क्वाड्रन लीडर एनके मलिक पीएएफ के फ्लाइट लेफ्टिनेंट इम्तियाज भट्टी द्वारा उड़ाए जा रहे दुश्मन के सेबर विमान से मुकाबला किया। इस हवाई लड़ाई में स्क्वाड्रन लीडर एनके मलिक के विमान को कई गोलियां लगीं और उसमें वे भी घायल हो गए। नुकसान के बावजूद, वे किसी तरह भारतीय वायु सेना के अड्डे के पास पहुंचने में कामयाब रहे, लेकिन तकनीकी खराबी के कारण अड्डे पर वापस आते समय उनका विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इसमें वह गंभीर रूप से घायल और बाद में शहीद हो गए। निर्मला ने बताया कि उनके पति 32 वर्ष की आयु में देश की सेवा में अपने प्राणों की आहुति दे दी, अब उनके लिए जीवन बहुत मुश्किल था, लेकिन उन्होंने पति की यादों को अपना हौसला बनाया और आज न चल पाने के बावजूद कार्यक्रम का हिस्सा बनती हैं।
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