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Ghaziabad News: एसआईटी ने माना 100 करोड़ की सरकारी जमीन पर गलत तरीके से दर्ज हुए नाम

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 18 Oct 2026 02:31 AM IST
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The SIT has concluded that names were recorded improperly in relation to government land worth
गाजियाबाद। सदरपुर गांव में नगर निगम की करीब 100 करोड़ रुपये की जमीन पर दूसरे लोगों के नाम दर्ज करने के मामले में एसआईटी ने भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया को गलत माना है। 15 अक्तूबर को एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी। जांच में सामने आया कि जमीन पर दूसरे लोगों के नाम दर्ज करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। अब नामों में बदलाव के लिए एसडीएम कोर्ट में वाद दायर किया जाएगा। इसके बाद नियमों के तहत आगे की कार्रवाई होगी।
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मामला वर्ष 2000 में राजस्व अभिलेखागार से दस्तावेज गायब होने से जुड़ा है। आरोप है कि दस्तावेज गायब होने के बाद जमीन के राजस्व अभिलेखों में फर्जी तरीके से दूसरे लोगों के नाम दर्ज करा दिए गए। महापौर की शिकायत के बाद मई में जिलाधिकारी ने मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की थी।
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एडीएम भू-अर्जन अवनीश कुमार सिंह ने बताया कि नगर निगम और चकबंदी विभाग की जांच रिपोर्ट में मामला संदिग्ध पाया गया है। जमीन पर गलत तरीके से नाम दर्ज किए जाने की बात सामने आई है। इन प्रविष्टियों में बदलाव के लिए अब नियमानुसार वाद दायर किया जाएगा। उन्होंने बताया कि आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को भी पत्र लिखा जाएगा।
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बिना आकार पत्र-45 के दूसरे लोगों के नाम दर्ज करने पर सवाल
एसआईटी की रिपोर्ट में बताया गया है कि संपत्ति को बिना आकार पत्र-45 के ही दूसरे लोगों के नाम दर्ज कर दिया गया, जबकि संबंधित दस्तावेज वर्ष 2000 में ही गायब हो गए थे। रिपोर्ट में इस प्रक्रिया को संदिग्ध बताते हुए गहन जांच की जरूरत जताई गई है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि आवश्यक दस्तावेज के बिना जमीन पर दूसरे लोगों के नाम कैसे दर्ज किए गए।
रिपोर्ट में राजस्व अभिलेखागार की अक्तूबर 2000 में तैयार रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया है। इससे पहले मार्च 2000 में अभिलेखागार से पृष्ठ गायब होने के मामले में कविनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। राजस्व अभिलेखागार में तैनात जयप्रकाश की ओर से धर्मबीर और ब्रह्म सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट के साथ इन दस्तावेजों को भी शामिल किया है।


पुरानी रिपोर्ट शामिल करने पर उठाए सवाल
एसआईटी की रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपे जाने के बाद मामले में नया विवाद खड़ा हो गया है। मामले से जुड़े किसान सत्यवीर सिंह ने जिलाधिकारी को शिकायत देकर रिपोर्ट में चकबंदी विभाग की वर्ष 2023 की रिपोर्ट शामिल किए जाने पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सितंबर 2026 में आई रिपोर्ट में जमीन पर दूसरे लोगों के नाम दर्ज करने की प्रक्रिया को फर्जी बताया गया है। ऐसे में पुरानी रिपोर्ट को आधार बनाए जाने पर उन्होंने आपत्ति जताई है। उनकी शिकायत की भी जांच की जा रही है।
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