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गाजियाबाद में जीएसटी विभाग का बड़ा एक्शन: 77 करोड़ से अधिक की फर्जी आईटीसी और 80 करोड़ की कर चोरी का भंडाफोड़
Sat, 17 Oct 2026 09:10 PM IST
Digvijay Singh
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
Published by: Digvijay Singh
Updated Sat, 17 Oct 2026 09:10 PM IST
सार
गाजियाबाद के कविनगर औद्योगिक क्षेत्र में कॉपर वायर और कॉपर स्क्रैप का कारोबार करने वाली एक फर्म पर राज्य जीएसटी विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईबी) ने छापा मारकर जांच शुरू की है। फर्म पर फर्जी फर्मों से खरीद दिखाकर करीब 77.26 करोड़ रुपये के फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) क्लेम करने का मामला सामने आया है।
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गाजियाबाद में जीएसटी विभाग का बड़ा एक्शन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
गाजियाबाद के कविनगर औद्योगिक क्षेत्र में कॉपर वायर और कॉपर स्क्रैप का कारोबार करने वाली एक फर्म पर राज्य जीएसटी विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईबी) ने छापा मारकर जांच शुरू की है। फर्म पर फर्जी फर्मों से खरीद दिखाकर करीब 77.26 करोड़ रुपये के फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) क्लेम करने का मामला सामने आया है। प्रारंभिक जांच में करीब 80 करोड़ रुपये की कर चोरी की आशंका जताई गई है।
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राज्य कर आयुक्त के निर्देश पर अपर आयुक्त राज्य कर, गाजियाबाद जोन-प्रथम अजय कुमार गौतम ने कॉपर की खरीद-बिक्री से जुड़ी फर्मों के आंकड़ों का विश्लेषण कराया था। इसमें ओशिया मेटल इंडस्ट्रीज के लेनदेन संदिग्ध पाए गए। इसके बाद संयुक्त आयुक्त राज्य कर (वित्त एवं अनुसंधान शाखा) अजय प्रताप सिंह ने जांच टीम गठित कर फर्म के खिलाफ सर्वे वारंट जारी कराया। मौके पर टीम ने फर्म के कारोबारी स्थल की जांच की। मौके पर कोई माल नहीं मिला, जबकि लेखा पुस्तकों और खरीद-बिक्री के इनवॉयस उपलब्ध मिले। कारोबार से जुड़े सवालों पर फर्म की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा सका। जांच में सामने आया कि फर्म ने जीएसटी में मैन्युफैक्चरिंग इकाई के रूप में पंजीकरण कराया था, लेकिन उत्पादन करने के बजाय कॉपर वायर और कॉपर रॉड की ट्रेडिंग की जा रही थी।
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दिल्ली की संदिग्ध फर्मों से खरीद, कश्मीर में बिक्री
संयुक्त आयुक्त राज्य कर अजय प्रताप सिंह ने बताया कि जांच के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 में फर्म ने मुख्य रूप से दिल्ली की ऐसी फर्मों से खरीद दिखाई, जिनका पंजीकरण फर्जी अथवा अस्तित्वहीन होने के कारण निरस्त किया जा चुका है। खरीदे गए माल का अधिकांश हिस्सा जम्मू-कश्मीर स्थित एक फर्म को बेचा जाना दर्शाया गया है। इस लेनदेन की भी विस्तृत जांच की जा रही है। फर्म ने कैश के रूप में बेहद कम कर जमा किया। इसके अलावा बिना उचित कारण करीब 5.76 करोड़ रुपये के ई-वे बिल निरस्त किए गए। वित्तीय वर्ष 2024-25 में रिटर्न के जरिए 58 लाख रुपये से अधिक के आईटीसी क्लेम का मामला भी जांच के दायरे में है। विभाग ने इन लेनदेन के आधार पर करीब 80 करोड़ रुपये के कर चोरी की आशंका जताई है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। जांच टीम में सहायक आयुक्त विमल कुमार, सहायक आयुक्त अखिलेश कुमार और राज्य कर अधिकारी सतीश तिवारी शामिल रहे।
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दो फर्मों में 16 करोड़ की फर्जी आईटीसी पकड़ी, 2.60 करोड़ जमा कराए
गाजियाबाद में एक और छापे में जीएसटी चोरी के खिलाफ राज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईबी) की कार्रवाई में दो फर्मों में करीब 16 करोड़ रुपये की फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का दावा पकड़ा गया है। विभागीय टीम ने छापेमारी के दौरान दोनों फर्मों से 2.60 करोड़ रुपये जमा कराए। फर्मों के बिल, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड और स्टॉक की जांच में अनियमितताएं सामने आई है। राज्य कर विभाग की उपायुक्त रेखा सिंह ने बताया कि टीम ने 15 और 16 अक्टूबर को एम/एस एवी इंडस्ट्रीज और एम/एस डी स्क्वायर की जांच की। दोनों फर्में स्टील, लीथियम बैटरी और उनसे संबंधित पार्ट्स के कारोबार से जुड़ी हैं। उन्होंने बताया कि जांच में करीब 16 करोड़ रुपये की फर्जी आईटीसी का दावा सामने आया। टीम ने फर्मों के जीएसटी रिटर्न, खरीद-बिक्री के बिलों और संबंधित दस्तावेजों का मिलान किया। स्टॉक की जांच में भी अंतर मिला। एक फर्म में 4.77 लाख रुपये का स्टॉक कम, जबकि दूसरी में 10.37 लाख रुपये का स्टॉक अधिक पाया गया। कार्रवाई के दौरान दोनों फर्मों से 2.60 करोड़ रुपये जमा कराए गए। विभागीय टीम मामले से जुड़े दस्तावेजों और लेनदेन की जांच कर रही है।