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Ghaziabad News: कॉपर वायर-स्क्रैप कारोबार में 80 करोड़ की कर चोरी की आशंका, फर्म पर छापा
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कविनगर औद्योगिक क्षेत्र में जीएसटी की टीम जांच करते हुए। स्रोत जी एस टी
- फोटो : shiv tripathi
गाजियाबाद। फर्जी फर्मों से खरीद दिखाकर करोड़ों रुपये की इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) हासिल करने के मामले में राज्य जीएसटी विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईबी) ने कविनगर औद्योगिक क्षेत्र स्थित कॉपर वायर और कॉपर स्क्रैप का कारोबार करने वाली एक फर्म की जांच शुरू की है। प्रारंभिक जांच में 77.26 करोड़ रुपये के फर्जी आईटीसी क्लेम का मामला सामने आया है। विभाग ने करीब 80 करोड़ रुपये की कर चोरी की आशंका जताई है।
राज्य कर आयुक्त के निर्देश पर अपर आयुक्त राज्य कर, गाजियाबाद जोन-प्रथम अजय कुमार गौतम ने कॉपर की खरीद-बिक्री से जुड़ी फर्मों के आंकड़ों का विश्लेषण कराया था। इसमें ओशिया मेटल इंडस्ट्रीज के लेनदेन संदिग्ध पाए गए।
टीम ने फर्म के कारोबारी स्थल की जांच की तो वहां कोई माल नहीं मिला। हालांकि, लेखा पुस्तकों और खरीद-बिक्री के इनवॉयस उपलब्ध मिले। कारोबार से जुड़े सवालों पर फर्म की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा सका। जांच में यह भी सामने आया कि फर्म ने जीएसटी में मैन्युफैक्चरिंग इकाई के रूप में पंजीकरण कराया था, लेकिन उत्पादन के बजाय कॉपर वायर और कॉपर रॉड की ट्रेडिंग की जा रही थी।
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दिल्ली की संदिग्ध फर्मों से खरीद, जम्मू-कश्मीर में बिक्री
संयुक्त आयुक्त राज्य कर अजय प्रताप सिंह ने बताया कि जांच के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 में फर्म ने मुख्य रूप से दिल्ली की ऐसी फर्मों से खरीद दिखाई, जिनका पंजीकरण निरस्त किया जा चुका है। खरीदे गए माल का अधिकांश हिस्सा जम्मू-कश्मीर स्थित एक फर्म को बेचना दर्शाया गया है। इस लेनदेन की भी विस्तृत जांच की जा रही है। जांच टीम में सहायक आयुक्त विमल कुमार, सहायक आयुक्त अखिलेश कुमार और राज्य कर अधिकारी सतीश तिवारी शामिल रहे।
दो फर्मों में 16 करोड़ की फर्जी आईटीसी पकड़ी, 2.60 करोड़ जमा कराए
गाजियाबाद में राज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईबी) ने दो अन्य फर्मों की जांच में करीब 16 करोड़ रुपये की फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का दावा पकड़ा है। कार्रवाई के दौरान दोनों फर्मों से 2.60 करोड़ रुपये जमा कराए गए। विभागीय टीम को खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड और स्टॉक की जांच में भी अनियमितताएं मिली हैं। राज्य कर विभाग की उपायुक्त रेखा सिंह ने बताया कि टीम ने 15 और 16 अक्टूबर को एम/एस एवी इंडस्ट्रीज और एम/एस डी स्क्वायर की जांच की। दोनों फर्में स्टील, लीथियम बैटरी और उनसे संबंधित पार्ट्स के कारोबार से जुड़ी हैं।
जांच के दौरान फर्मों के जीएसटी रिटर्न, खरीद-बिक्री के बिलों और अन्य दस्तावेजों का मिलान किया गया। इसमें करीब 16 करोड़ रुपये की फर्जी आईटीसी का दावा सामने आया। स्टॉक की जांच में भी अंतर मिला। एक फर्म में 4.77 लाख रुपये का स्टॉक कम, जबकि दूसरी में 10.37 लाख रुपये का स्टॉक अधिक पाया गया।
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राज्य कर आयुक्त के निर्देश पर अपर आयुक्त राज्य कर, गाजियाबाद जोन-प्रथम अजय कुमार गौतम ने कॉपर की खरीद-बिक्री से जुड़ी फर्मों के आंकड़ों का विश्लेषण कराया था। इसमें ओशिया मेटल इंडस्ट्रीज के लेनदेन संदिग्ध पाए गए।
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टीम ने फर्म के कारोबारी स्थल की जांच की तो वहां कोई माल नहीं मिला। हालांकि, लेखा पुस्तकों और खरीद-बिक्री के इनवॉयस उपलब्ध मिले। कारोबार से जुड़े सवालों पर फर्म की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा सका। जांच में यह भी सामने आया कि फर्म ने जीएसटी में मैन्युफैक्चरिंग इकाई के रूप में पंजीकरण कराया था, लेकिन उत्पादन के बजाय कॉपर वायर और कॉपर रॉड की ट्रेडिंग की जा रही थी।
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दिल्ली की संदिग्ध फर्मों से खरीद, जम्मू-कश्मीर में बिक्री
संयुक्त आयुक्त राज्य कर अजय प्रताप सिंह ने बताया कि जांच के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 में फर्म ने मुख्य रूप से दिल्ली की ऐसी फर्मों से खरीद दिखाई, जिनका पंजीकरण निरस्त किया जा चुका है। खरीदे गए माल का अधिकांश हिस्सा जम्मू-कश्मीर स्थित एक फर्म को बेचना दर्शाया गया है। इस लेनदेन की भी विस्तृत जांच की जा रही है। जांच टीम में सहायक आयुक्त विमल कुमार, सहायक आयुक्त अखिलेश कुमार और राज्य कर अधिकारी सतीश तिवारी शामिल रहे।
दो फर्मों में 16 करोड़ की फर्जी आईटीसी पकड़ी, 2.60 करोड़ जमा कराए
गाजियाबाद में राज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईबी) ने दो अन्य फर्मों की जांच में करीब 16 करोड़ रुपये की फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का दावा पकड़ा है। कार्रवाई के दौरान दोनों फर्मों से 2.60 करोड़ रुपये जमा कराए गए। विभागीय टीम को खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड और स्टॉक की जांच में भी अनियमितताएं मिली हैं। राज्य कर विभाग की उपायुक्त रेखा सिंह ने बताया कि टीम ने 15 और 16 अक्टूबर को एम/एस एवी इंडस्ट्रीज और एम/एस डी स्क्वायर की जांच की। दोनों फर्में स्टील, लीथियम बैटरी और उनसे संबंधित पार्ट्स के कारोबार से जुड़ी हैं।
जांच के दौरान फर्मों के जीएसटी रिटर्न, खरीद-बिक्री के बिलों और अन्य दस्तावेजों का मिलान किया गया। इसमें करीब 16 करोड़ रुपये की फर्जी आईटीसी का दावा सामने आया। स्टॉक की जांच में भी अंतर मिला। एक फर्म में 4.77 लाख रुपये का स्टॉक कम, जबकि दूसरी में 10.37 लाख रुपये का स्टॉक अधिक पाया गया।