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Ghaziabad News: राज्य कर विभाग ने 6,922 खाते अटैच कर 3.26 करोड़ वसूले
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माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। राज्य कर विभाग ने कारोबारियों के विरोध के बीच टैक्स डिफाल्टरों पर तेजी से शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। बीते करीब दो महीने में 6922 खाते अटैच कर 3.26 करोड़ रुपये की वसूली की गई है। साथ ही, डिफाल्टर फर्मों की बैंकों में जमा धनराशि को होल्ड करने के लिए गाजियाबाद, हापुड़, बुलंदशहर और मोदीनगर की सभी बैंक शाखाओं को नोटिस भेजे जा रहे हैं।
विभाग के गाजियाबाद जोन-1 और जोन-2 में ऐसी 40 हजार से ज्यादा फर्मों की सूची तैयार की गई थी, जिन्हें बार-बार नोटिस जारी किए गए लेकिन जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) का भुगतान नहीं किया। इन फर्मों को आरसी (रिकवरी सर्टिफिकेट) भी जारी की जा चुकी हैं। अब विभाग ने डिफाल्टर फर्मों के खाते अटैच कर करने की कार्रवाई तेज कर दी है। ऐसे बकायेदारों की संख्या काफी ज्यादा है जो जुलाई 2017 से पहले वैट (वैल्यू एडेड टैक्स) में पंजीकृत थे। इन बकायेदारों ने अपनी फर्मों ने जीएसटीआईएन नंबर तो ले लिया, लेकिन वैट का बकाया जमा नहीं किया है।
ऐसे डिफाल्टरों से को बार-बार नोटिस जारी किए गए। भुगतान नहीं होने पर डीआरसी-07 के माध्यम से (बैंक खातों को अटैच कर) बकाया वसूली की जा रही है। राज्य कर विभाग के अपर आयुक्त ग्रेड-1 दिनेश कुमार मिश्र ने बताया कि शासन के दिशा-निर्देश पर कार्रवाई जारी है। इस साल एक सितंबर से 27 अक्तूबर तक गाजियाबाद जोन-1 में 3279 खाते अटैच कर 2.24 करोड़ रुपये वसूले जा चुके हैं, जबकि जोन-2 में 3643 खाते अटैच कर 1.2 करोड़ रुपये वसूले जा चुके हैं। राज्य कर विभाग ने गाजियाबाद, हापुड़, बुलंदशहर और मोदीनगर को दो जोन में बांटा हुआ है।
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पैन नंबर से पकड़ में आएंगे
डिफाल्टर फर्मों के खाते अटैच करने के लिए विभाग की तरफ से बैंक शाखाओं के प्रबंधकों के नाम नोटिस जारी किए जा रहे हैं, जिसमें फर्म का नाम, टिन नंबर, जीएसटी नंबर देते हुए खाता संख्या भी बताई जा रही है। साथ ही, नोटिस में फर्म पर बकाया राशि के साथ ही आरसी नंबर भी दिया जा रहा है। बैंक शाखाओं को डिफाल्टर फर्मों का खाता अटैच कर टैक्स की बकाया राशि का डिमांड ड्राफ्ट बनाकर जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें फर्मों के खाते में धनरशि नहीं मिल रही है। अधिकारियों ने बताया कि डिफाल्टर फर्म अगर किसी अन्य बैंक के खाते से लेनदेन कर रही है तो पैन नंबर से उसको भी अटैच किया जाएगा।
1,571 करोड़ फर्मों पर बकाया
जोन-1 में डिफाल्टरों की संख्या 21,778 है, जिन पर 1385.67 करोड़ रुपया बकाया है जबकि जोन-2 में 18,340 डिफाल्टरों पर 185.65 करोड़ रुपया बकाया है। इस तरह दोनों जोन में डिफाल्टर फर्मों पर 1,571 करोड़ रुपये से अधिक बकाया है।
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गाजियाबाद। राज्य कर विभाग ने कारोबारियों के विरोध के बीच टैक्स डिफाल्टरों पर तेजी से शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। बीते करीब दो महीने में 6922 खाते अटैच कर 3.26 करोड़ रुपये की वसूली की गई है। साथ ही, डिफाल्टर फर्मों की बैंकों में जमा धनराशि को होल्ड करने के लिए गाजियाबाद, हापुड़, बुलंदशहर और मोदीनगर की सभी बैंक शाखाओं को नोटिस भेजे जा रहे हैं।
विभाग के गाजियाबाद जोन-1 और जोन-2 में ऐसी 40 हजार से ज्यादा फर्मों की सूची तैयार की गई थी, जिन्हें बार-बार नोटिस जारी किए गए लेकिन जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) का भुगतान नहीं किया। इन फर्मों को आरसी (रिकवरी सर्टिफिकेट) भी जारी की जा चुकी हैं। अब विभाग ने डिफाल्टर फर्मों के खाते अटैच कर करने की कार्रवाई तेज कर दी है। ऐसे बकायेदारों की संख्या काफी ज्यादा है जो जुलाई 2017 से पहले वैट (वैल्यू एडेड टैक्स) में पंजीकृत थे। इन बकायेदारों ने अपनी फर्मों ने जीएसटीआईएन नंबर तो ले लिया, लेकिन वैट का बकाया जमा नहीं किया है।
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ऐसे डिफाल्टरों से को बार-बार नोटिस जारी किए गए। भुगतान नहीं होने पर डीआरसी-07 के माध्यम से (बैंक खातों को अटैच कर) बकाया वसूली की जा रही है। राज्य कर विभाग के अपर आयुक्त ग्रेड-1 दिनेश कुमार मिश्र ने बताया कि शासन के दिशा-निर्देश पर कार्रवाई जारी है। इस साल एक सितंबर से 27 अक्तूबर तक गाजियाबाद जोन-1 में 3279 खाते अटैच कर 2.24 करोड़ रुपये वसूले जा चुके हैं, जबकि जोन-2 में 3643 खाते अटैच कर 1.2 करोड़ रुपये वसूले जा चुके हैं। राज्य कर विभाग ने गाजियाबाद, हापुड़, बुलंदशहर और मोदीनगर को दो जोन में बांटा हुआ है।
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पैन नंबर से पकड़ में आएंगे
डिफाल्टर फर्मों के खाते अटैच करने के लिए विभाग की तरफ से बैंक शाखाओं के प्रबंधकों के नाम नोटिस जारी किए जा रहे हैं, जिसमें फर्म का नाम, टिन नंबर, जीएसटी नंबर देते हुए खाता संख्या भी बताई जा रही है। साथ ही, नोटिस में फर्म पर बकाया राशि के साथ ही आरसी नंबर भी दिया जा रहा है। बैंक शाखाओं को डिफाल्टर फर्मों का खाता अटैच कर टैक्स की बकाया राशि का डिमांड ड्राफ्ट बनाकर जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें फर्मों के खाते में धनरशि नहीं मिल रही है। अधिकारियों ने बताया कि डिफाल्टर फर्म अगर किसी अन्य बैंक के खाते से लेनदेन कर रही है तो पैन नंबर से उसको भी अटैच किया जाएगा।
1,571 करोड़ फर्मों पर बकाया
जोन-1 में डिफाल्टरों की संख्या 21,778 है, जिन पर 1385.67 करोड़ रुपया बकाया है जबकि जोन-2 में 18,340 डिफाल्टरों पर 185.65 करोड़ रुपया बकाया है। इस तरह दोनों जोन में डिफाल्टर फर्मों पर 1,571 करोड़ रुपये से अधिक बकाया है।