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Ghaziabad News: शिवरात्रि आज, आठों प्रहर होगा जलाभिषेक व विशेष पूजा
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दिल्ली मेरठ रोड पर डाक कांवड़ लेकर गुजरते शिवभक्त। संवाद
- फोटो : Archive
गाजियाबाद। सावन शिवरात्रि पर मंगलवार को शहर भोले के रंग में रंगा नजर आएगा। सिद्धपीठ दूधेश्वरनाथ मंदिर, स्वयंभू मंदिर, नेहरूनगर शिव मंदिर, मोहननगर मंदिर, डासना शिव शक्ति मंदिर समेत शहर के प्रमुख शिवालयों में जलाभिषेक के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
दूधेश्वरनाथ मंदिर में सोमवार रात से जलाभिषेक शुरू हो गया। मंगलवार सुबह छह बजे से चतुर्दशी का जल चढ़ाया जाएगा। मीडिया प्रभारी एसआर सुथार ने बताया कि मंगलवार को पूरे दिन और रात जलाभिषेक व विशेष पूजा चलेगी। भक्तों के लिए गंगाजल की भी व्यवस्था रहेगी।
पंडित लक्ष्मीकांत पाढी ने बताया कि प्रथम प्रहर का पूजन सुबह छह से आठ बजे तक, द्वितीय प्रहर नौ से 11 बजे तक, तृतीय प्रहर दोपहर 12 से दो बजे तक और चौथे प्रहर का पूजन शाम तीन से पांच बजे तक होगा। पांचवें प्रहर का पूजन शाम छह से 7:30 बजे तक होगा। शाम 7:30 से आठ बजे तक विशेष आरती होगी। इसके बाद छठे प्रहर की पूजा रात आठ से 10 बजे तक, सातवें प्रहर की पूजा रात 11 से एक बजे तक और आठवें प्रहर की पूजा रात दो से सुबह चार बजे तक होगी।
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14 सेक्टर और 28 सब सेक्टर में बांटी सुरक्षा व्यवस्था
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त राजकरण नैय्यर ने बताया कि बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए दूधेश्वरनाथ मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था त्रिस्तरीय की गई है। गर्भगृह, मंदिर परिसर और बाहर पुलिसकर्मियों की तैनाती रहेगी। कांवड़ियों के साथ सादी वर्दी में पुलिसकर्मी भी संदिग्धों पर नजर रखेंगे। श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए मंदिर को 14 सेक्टर व 28 सब सेक्टर में बांटा गया है। सभी सेक्टरों में एसीपी और इंस्पेक्टर रैंक के पुलिसकर्मी नजर रखेंगे। सुरक्षा के लिए 700 पुलिसकर्मियों के साथ दो प्लाटून पीएसी और 300 वालंटियर्स तैनात किए गए हैं। मंदिर की सुरक्षा में पहली बार टेथर्ड ड्रोन का प्रयोग किया जा रहा है। यह ड्रोन आठ घंटे तक लगातार उड़कर आसमान से निगरानी कर सकता है। एक अतिरिक्त ड्रोन भी तैनात रहेगा। इसके अलावा दो क्यूआरटी भी लगाई गई हैं, जो आपात स्थिति में तत्काल मौके पर पहुंचेंगी।
लाइन में लगकर स्क्रीन पर देख सकेंगे गर्भगृह
मंदिर के बाहर एलईडी स्क्रीन लगाई गई है। इस पर गर्भगृह का सीधा प्रसारण किया जाएगा। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त ने बताया कि इससे श्रद्धालु अपनी बारी का इंतजार करते हुए स्क्रीन पर गर्भगृह के दर्शन कर सकेंगे। इससे मंदिर के अंदर की स्थिति पर भी नजर बनी रहेगी और किसी तरह के विवाद की संभावना कम होगी।
दूसरे सोमवार को बड़ी संख्या में पहुंचे भक्त
सावन के दूसरे सोमवार को दूधेश्वरनाथ मंदिर में बड़ी संख्या में भक्तों ने जलाभिषेक किया। सुबह साढ़े पांच बजे पूजा-अर्चना के बाद भक्तों के लिए मंदिर के कपाट खोल दिए गए। प्राचीन देवी मंदिर के महंत गिरिशानंद गिरि के पूजन के बाद श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक शुरू किया। सोसायटी के शिवालयों में भी भक्तों ने पूजा-अर्चना की। शाम को महिलाओं ने भजन-कीर्तन किया।
बुधादित्य, चतुर्ग्रही और गजकेसरी योग का संयोग
पंडित शिव कुमार शर्मा ने बताया कि सावन शिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा-अर्चना और जलाभिषेक करने से भगवान शिव के साथ माता पार्वती की कृपा भी प्राप्त होती है। उस पर इस दिन कई शुभ संयोग भी बन रहे हैं। पंडित दीपक तेजस्वी ने बताया कि सावन शिवरात्रि पर कर्क राशि में सूर्य, गुरु, बुध और चंद्रमा की युति से चतुर्ग्रही योग बन रहा है। इसके साथ बुधादित्य और गजकेसरी योग का भी संयोग है। चतुर्ग्रही योग में कर्क राशि में सूर्य, गुरु, बुध और चंद्रमा के एक साथ आने से आर्थिक लाभ होता है। सूर्य और बुध की युति से बुधादित्य योग बनता है, जिससे तेज बुद्धि और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है। गुरु और चंद्रमा की युति से गजकेसरी योग बनता है। इन शुभ संयोगों में पूजा को विशेष फलदायी माना जाता है।
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दूधेश्वरनाथ मंदिर में सोमवार रात से जलाभिषेक शुरू हो गया। मंगलवार सुबह छह बजे से चतुर्दशी का जल चढ़ाया जाएगा। मीडिया प्रभारी एसआर सुथार ने बताया कि मंगलवार को पूरे दिन और रात जलाभिषेक व विशेष पूजा चलेगी। भक्तों के लिए गंगाजल की भी व्यवस्था रहेगी।
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पंडित लक्ष्मीकांत पाढी ने बताया कि प्रथम प्रहर का पूजन सुबह छह से आठ बजे तक, द्वितीय प्रहर नौ से 11 बजे तक, तृतीय प्रहर दोपहर 12 से दो बजे तक और चौथे प्रहर का पूजन शाम तीन से पांच बजे तक होगा। पांचवें प्रहर का पूजन शाम छह से 7:30 बजे तक होगा। शाम 7:30 से आठ बजे तक विशेष आरती होगी। इसके बाद छठे प्रहर की पूजा रात आठ से 10 बजे तक, सातवें प्रहर की पूजा रात 11 से एक बजे तक और आठवें प्रहर की पूजा रात दो से सुबह चार बजे तक होगी।
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14 सेक्टर और 28 सब सेक्टर में बांटी सुरक्षा व्यवस्था
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त राजकरण नैय्यर ने बताया कि बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए दूधेश्वरनाथ मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था त्रिस्तरीय की गई है। गर्भगृह, मंदिर परिसर और बाहर पुलिसकर्मियों की तैनाती रहेगी। कांवड़ियों के साथ सादी वर्दी में पुलिसकर्मी भी संदिग्धों पर नजर रखेंगे। श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए मंदिर को 14 सेक्टर व 28 सब सेक्टर में बांटा गया है। सभी सेक्टरों में एसीपी और इंस्पेक्टर रैंक के पुलिसकर्मी नजर रखेंगे। सुरक्षा के लिए 700 पुलिसकर्मियों के साथ दो प्लाटून पीएसी और 300 वालंटियर्स तैनात किए गए हैं। मंदिर की सुरक्षा में पहली बार टेथर्ड ड्रोन का प्रयोग किया जा रहा है। यह ड्रोन आठ घंटे तक लगातार उड़कर आसमान से निगरानी कर सकता है। एक अतिरिक्त ड्रोन भी तैनात रहेगा। इसके अलावा दो क्यूआरटी भी लगाई गई हैं, जो आपात स्थिति में तत्काल मौके पर पहुंचेंगी।
लाइन में लगकर स्क्रीन पर देख सकेंगे गर्भगृह
मंदिर के बाहर एलईडी स्क्रीन लगाई गई है। इस पर गर्भगृह का सीधा प्रसारण किया जाएगा। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त ने बताया कि इससे श्रद्धालु अपनी बारी का इंतजार करते हुए स्क्रीन पर गर्भगृह के दर्शन कर सकेंगे। इससे मंदिर के अंदर की स्थिति पर भी नजर बनी रहेगी और किसी तरह के विवाद की संभावना कम होगी।
दूसरे सोमवार को बड़ी संख्या में पहुंचे भक्त
सावन के दूसरे सोमवार को दूधेश्वरनाथ मंदिर में बड़ी संख्या में भक्तों ने जलाभिषेक किया। सुबह साढ़े पांच बजे पूजा-अर्चना के बाद भक्तों के लिए मंदिर के कपाट खोल दिए गए। प्राचीन देवी मंदिर के महंत गिरिशानंद गिरि के पूजन के बाद श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक शुरू किया। सोसायटी के शिवालयों में भी भक्तों ने पूजा-अर्चना की। शाम को महिलाओं ने भजन-कीर्तन किया।
बुधादित्य, चतुर्ग्रही और गजकेसरी योग का संयोग
पंडित शिव कुमार शर्मा ने बताया कि सावन शिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा-अर्चना और जलाभिषेक करने से भगवान शिव के साथ माता पार्वती की कृपा भी प्राप्त होती है। उस पर इस दिन कई शुभ संयोग भी बन रहे हैं। पंडित दीपक तेजस्वी ने बताया कि सावन शिवरात्रि पर कर्क राशि में सूर्य, गुरु, बुध और चंद्रमा की युति से चतुर्ग्रही योग बन रहा है। इसके साथ बुधादित्य और गजकेसरी योग का भी संयोग है। चतुर्ग्रही योग में कर्क राशि में सूर्य, गुरु, बुध और चंद्रमा के एक साथ आने से आर्थिक लाभ होता है। सूर्य और बुध की युति से बुधादित्य योग बनता है, जिससे तेज बुद्धि और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है। गुरु और चंद्रमा की युति से गजकेसरी योग बनता है। इन शुभ संयोगों में पूजा को विशेष फलदायी माना जाता है।

दिल्ली मेरठ रोड पर डाक कांवड़ लेकर गुजरते शिवभक्त। संवाद- फोटो : Archive