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अस्पताल शिफ्ट,जमीन पर लगा दिए गए मरीजों के बिस्तर

Wed, 30 Nov 2016 01:24 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला /गाजियाबाद
ब्यूरो, अमर उजाला /गाजियाबाद Updated Wed, 30 Nov 2016 01:24 AM IST
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Shift hospital, the patients' bed laying on the ground
जमीन पर लगाए गए मरीजों के बिस्तर - फोटो : अमर उजाला
महिला अस्पताल को मंगलवार सुबह नए भवन में शिफ्ट कर दिया गया। आधी-अधूरी तैयारियों के साथ शिफ्ट हुए अस्पताल में सोमवार को मरीजों और स्टाफ दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
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पहले दिन डॉक्टर्स के बैठने की जगह से लेकर लिफ्ट, पीने के पानी आदि की समस्या रही। मरीजों के बिस्तर जमीन पर ही बिछा दिए गए। नए भवन में मरीजों को लिए सुचारु व्यवस्था होने में अभी एक हफ्ते का समय लगेगा।
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  चार मंजिला नए भवन में मंगलवार को महिला अस्पताल को शिफ्ट किया गया। पहले से भर्ती प्रसूताओं को वार्ड में शिफ्ट तो कर दिया गया, लेकिन अभी तक वहां बेड नहीं पहुंच पाए। ऐसे में उनका बेड नीचे फर्श पर लगा दिया।
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इसके अलावा मंगलवार को भी जो भी नए मरीज आए, उनको 102 एंबुलेंस से संयुक्त जिला अस्पताल भेजा गया।  फिलहाल ओपीडी,  टीकाकरण, लेबर रूम, पैथोलॉजी आदि को शिफ्ट किया गया है।

ऑपरेशन थियेटर, एसएनसीयू (नर्सरी) और कार्यालय आदि अभी शिफ्ट नहीं हुए हैं। ओटी अभी मानकों के अनुरूप नहीं है। इसे पूरा करने के लिए पत्र लिखा गया है। अभी अस्पताल के मुख्य द्वार को भी नहीं खोला गया है।

अभी मरीज अस्पताल परिसर के अंदर वाले रास्ते से ही नए भवन में पहुंच रहे हैं। चिकित्सक, स्टाफ, गार्ड और फोर्थ क्लास आदि की व्यवस्था के लिए सीएमओ और शासन को पत्र लिखा गया है।

सीएमएस डॉ. दीपा त्यागी ने बताया कि व्यवस्था पूरी तरह सुचारु होने में चार से पांच दिन लगेंगे। बुधवार तक काफी हद तक व्यवस्था हो जाएगी और अस्थायी रूप से ओटी भी चालू कर दिया जाएगा। तब तक के लिए संयुक्त जिला अस्पताल में गंभीर मरीजों को भेजने की बात की गई है। इसके अलावा अस्पताल परिसर में दो 102 एंबुलेंस 24 घंटे रखा जा रहा है।

क्या-क्या हैं समस्याएं
भवन में लिफ्ट है लेकिन न लिफ्टमैन की व्यवस्था है, पंप ऑपरेटर, जनरेटर ऑपरेटर, इलेक्ट्रिशियन आदि किसी भी व्यवस्था की जानी है। पुराने महिला अस्पताल के जनरेटर को लगाया जाएगा उसके बाद 24 घंटे ओटी चलेगी। अभी पार्किंग की भी व्यवस्था नहीं है।


नहीं बना है रैन बसेरा
नए भवन में कई ऐसे इंतजाम किए गए हैं, जो पुराने अस्पताल में नहीं थे लेकिन इसमें तीमारदारों के रुकने के लिए रैन बसेरे का इंतजाम नहीं किया गया है। पुराना महिला अस्पताल अगर नए भवन में शिफ्ट होता है तो कड़कती ठंड में तीमारदारों को इधर-उधर ही भटकना पड़ेगा।
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