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Ghaziabad News: डराने-धमकाने के दोषी को सात साल का कारावास
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माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। 28 साल पहले पिलखुवा थाना क्षेत्र में हत्या के गवाह को डरा-धमकाकर गवाही प्रभावित करने के दोषी परमेंद्र को गैंगस्टर कोर्ट की अदालत ने सात साल कारावास की सजा सुनाई है। अदालत के न्यायाधीश अरविंद मिश्र ने दोषी पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
अदालत से मिली जानकारी के अनुसार 2007 में पिलखुवा थाना के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। प्रभारी निरीक्षक ने बताया था कि वह पुलिस टीम के साथ क्षेत्र में गश्त कर रहे थे। इस दौरान शातिर बदमाश परमेंद्र नामक युवक आ गया। उस पर हत्या, मारपीट, धमकी सहित कई अपराध करने के आरोप थे।
उसने 1997 में एक युवक की हत्या कर रेलवे लाइन के पास उसका शव फेंक दिया था। इसके साथ ही एक अन्य मामले में भी परमेंद्र जान से मारने की धमकी दे चुका था। वादी ने इस मामले में थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उसे जेल भेज दिया था। बृहस्पतिवार को इस मामले में गैंगस्टर कोर्ट संख्या 12 के विशेष न्यायाधीश अरविंद मिश्र की अदालत में अंतिम सुनवाई हुई। कोर्ट ने पुख्ता साक्ष्य एवं सबूतों के आधार पर अभियुक्त को दोषी मानकर सजा सुनाई।
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गाजियाबाद। 28 साल पहले पिलखुवा थाना क्षेत्र में हत्या के गवाह को डरा-धमकाकर गवाही प्रभावित करने के दोषी परमेंद्र को गैंगस्टर कोर्ट की अदालत ने सात साल कारावास की सजा सुनाई है। अदालत के न्यायाधीश अरविंद मिश्र ने दोषी पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
अदालत से मिली जानकारी के अनुसार 2007 में पिलखुवा थाना के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। प्रभारी निरीक्षक ने बताया था कि वह पुलिस टीम के साथ क्षेत्र में गश्त कर रहे थे। इस दौरान शातिर बदमाश परमेंद्र नामक युवक आ गया। उस पर हत्या, मारपीट, धमकी सहित कई अपराध करने के आरोप थे।
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उसने 1997 में एक युवक की हत्या कर रेलवे लाइन के पास उसका शव फेंक दिया था। इसके साथ ही एक अन्य मामले में भी परमेंद्र जान से मारने की धमकी दे चुका था। वादी ने इस मामले में थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उसे जेल भेज दिया था। बृहस्पतिवार को इस मामले में गैंगस्टर कोर्ट संख्या 12 के विशेष न्यायाधीश अरविंद मिश्र की अदालत में अंतिम सुनवाई हुई। कोर्ट ने पुख्ता साक्ष्य एवं सबूतों के आधार पर अभियुक्त को दोषी मानकर सजा सुनाई।
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