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Ghaziabad News: जेल में बंदियों की स्क्रीनिंग और गंभीर बीमारियों की जांच शुरू
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गाजियाबाद। जिला कारागार में स्क्रीनिंग शिविर शुरू हुआ। पांच दिन में 4308 बंदियों की स्क्रीनिंग की जाएगी। इस दौरान उनकी गंभीर बीमारियों, सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज (एसटीडी), ह्युमन इम्यूनो डिफिशिएंसी वायरस (एचआईवी), टीबी (क्षय रोग) व हेपेटाइटिस की जांच की जाएगी। जांच के बाद उनका इलाज शुरू कराया जाएगा।
शुक्रवार को शुरू हुए शिविर में मुख्य अतिथि मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) अभिनव गोपाल ने फीता काटकर जांच शिविर का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि जिन बंदियों की जांच में किसी संक्रमण की पुष्टि होती है, उनके पूरे इलाज की व्यवस्था स्वास्थ्य विभाग द्वारा की जाएगी। कारागार से रिहा होने के बाद भी उपचार बीच में छूटने नहीं पाएगा। सीडीओ ने कारागार में स्वयं सहायता समूह द्वारा किए जा रहे कार्यों को देखा और सराहा।
जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डाॅ. अमित विक्रम ने बताया कि कारागार में रह रहे बंदियों की जांच के लिए पांच दिवसीय अभियान शुरू किया गया है। स्क्रीनिंग के लिए कारागार में पांच काउंटर बनाए गए हैं। कारागार में रह रहे सभी 4308 बंदियों की स्क्रीनिंग की जाएगी। बीमारियों से बचाव के प्रति भी उनको जागरूक किया जाएगा।
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डीटीओ ने बताया कि जिन बंदियों का उपचार शुरू होगा, उन्हें नियमित रूप से दवाओं के सेवन करने और जेल से रिहा होने के बाद सरकारी चिकित्सालय के माध्यम से उपचार जारी रखने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
कार्यक्रम में जेल अधीक्षक आलोक कुमार, जेल के चिकित्सा अधिकारी डाॅ. चंद्र प्रकाश और टीबी-एचआईवी समन्वयक निधि त्रिखा भी मौजूद रहीं।
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शुक्रवार को शुरू हुए शिविर में मुख्य अतिथि मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) अभिनव गोपाल ने फीता काटकर जांच शिविर का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि जिन बंदियों की जांच में किसी संक्रमण की पुष्टि होती है, उनके पूरे इलाज की व्यवस्था स्वास्थ्य विभाग द्वारा की जाएगी। कारागार से रिहा होने के बाद भी उपचार बीच में छूटने नहीं पाएगा। सीडीओ ने कारागार में स्वयं सहायता समूह द्वारा किए जा रहे कार्यों को देखा और सराहा।
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जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डाॅ. अमित विक्रम ने बताया कि कारागार में रह रहे बंदियों की जांच के लिए पांच दिवसीय अभियान शुरू किया गया है। स्क्रीनिंग के लिए कारागार में पांच काउंटर बनाए गए हैं। कारागार में रह रहे सभी 4308 बंदियों की स्क्रीनिंग की जाएगी। बीमारियों से बचाव के प्रति भी उनको जागरूक किया जाएगा।
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डीटीओ ने बताया कि जिन बंदियों का उपचार शुरू होगा, उन्हें नियमित रूप से दवाओं के सेवन करने और जेल से रिहा होने के बाद सरकारी चिकित्सालय के माध्यम से उपचार जारी रखने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
कार्यक्रम में जेल अधीक्षक आलोक कुमार, जेल के चिकित्सा अधिकारी डाॅ. चंद्र प्रकाश और टीबी-एचआईवी समन्वयक निधि त्रिखा भी मौजूद रहीं।