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सेफ सिटी : 10 दिन में ही टूट गया 100 कैमरों का संपर्क
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गाजियाबाद। प्रदेश सरकार का सेफ सिटी प्रोजेक्ट शुरुआत में ही दम तोड़ता दिख रहा है। लगातार प्रयास के बावजूद नगर निगम को जनता का सहयोग नहीं मिल रहा है। पहले चरण में शहर के आवासीय, व्यावसायिक व अन्य परिसरों पर लगे 1,500 सीसीटीवी कैमरों को कंट्रोल सेंटर से जोड़ा जाना है। पिछले करीब 10 दिनों में 155 कैमरों और डीवीआर का एक्सेस लिया गया लेकिन करीब 100 भवन मालिकों ने पासवर्ड बदलकर कंट्रोल सेंटर से संपर्क ही काट दिया। अब केवल महज 55 कैमरे ही काम कर रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में देरी ने नगर निगम के अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है।
स्मार्ट सिटी मिशन के तहत शहर को सुरक्षित बनाने के लिए सेफ सिटी प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। ऑपरेशन दृष्टि के तहत पुलिस ने अब तक आठ हजार से अधिक कैमरों की जानकारी थाना स्तर पर जुटाई है। पहले चरण में 1,500 सीसीटीवी कैमरों और डीवीआर का एक्सेस भवन मालिकों से लेना है। नगर निगम ने 216 परिसरों पर लगे कैमरों की सूची इंटीग्रेशन का काम कर रही कंपनी टेक्नोसिस को सौंपी है लेकिन लोग अपने कैमरे का एक्सेस देने से डर रहे हैं। कड़ी मशक्कत के बाद कंपनी ने 155 कैमरों को सिस्टम से जोड़कर ट्रायल शुरू कर दिया था लेकिन निजता में दखल के भय से लोगों ने पासवर्ड ही बदल डाले, जिससे तकरीबन 100 कैमरों का संपर्क कंट्रोल रूम से टूट गया है। पासवर्ड बदले जाने से रिकॉर्डिंग नहीं हो पा रही है।
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बाहर लगे कैमरों का ही इस्तेमाल
नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि भवन मालिक कोई न कोई बहाना बनाकर कैमरों का एक्सेस लेने पहुंच रही टीम को वापस लौटा देते हैं। लोगों को भरोसा दिलाया जाता है कि केवल परिसर के बाहर लगे कैमरों का ही एक्सेस लिया जाएगा लेकिन लोगों को डर रहता है कि कहीं डाटा सार्वजनिक न हो जाए या फिर इससे उनकी सुरक्षा को कोई खतरा पैदा न हो जाए। लोगों के इस भय को दूर करने के लिए पिछले दिनों पंडित दीनदयाल सभागार में जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किया गया था लेकिन फिर जनता का सहयोग नहीं मिल रहा है।
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शहर में सुरक्षित माहौल बनाने के लिए सेफ सिटी प्रोजेक्ट शुरू किया गया है लेकिन भवन मालिकों का सहयोग नहीं मिल रहा है। हमारी टीम केवल परिसर के बाहर लगे कैमरों का ही प्रयोग करेगी। इसमें किसी तरह का जोखिम नहीं है। - एनके चौधरी, मुख्य अभियंता, नगर निगम निर्माण विभाग
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स्मार्ट सिटी मिशन के तहत शहर को सुरक्षित बनाने के लिए सेफ सिटी प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। ऑपरेशन दृष्टि के तहत पुलिस ने अब तक आठ हजार से अधिक कैमरों की जानकारी थाना स्तर पर जुटाई है। पहले चरण में 1,500 सीसीटीवी कैमरों और डीवीआर का एक्सेस भवन मालिकों से लेना है। नगर निगम ने 216 परिसरों पर लगे कैमरों की सूची इंटीग्रेशन का काम कर रही कंपनी टेक्नोसिस को सौंपी है लेकिन लोग अपने कैमरे का एक्सेस देने से डर रहे हैं। कड़ी मशक्कत के बाद कंपनी ने 155 कैमरों को सिस्टम से जोड़कर ट्रायल शुरू कर दिया था लेकिन निजता में दखल के भय से लोगों ने पासवर्ड ही बदल डाले, जिससे तकरीबन 100 कैमरों का संपर्क कंट्रोल रूम से टूट गया है। पासवर्ड बदले जाने से रिकॉर्डिंग नहीं हो पा रही है।
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बाहर लगे कैमरों का ही इस्तेमाल
नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि भवन मालिक कोई न कोई बहाना बनाकर कैमरों का एक्सेस लेने पहुंच रही टीम को वापस लौटा देते हैं। लोगों को भरोसा दिलाया जाता है कि केवल परिसर के बाहर लगे कैमरों का ही एक्सेस लिया जाएगा लेकिन लोगों को डर रहता है कि कहीं डाटा सार्वजनिक न हो जाए या फिर इससे उनकी सुरक्षा को कोई खतरा पैदा न हो जाए। लोगों के इस भय को दूर करने के लिए पिछले दिनों पंडित दीनदयाल सभागार में जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किया गया था लेकिन फिर जनता का सहयोग नहीं मिल रहा है।
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शहर में सुरक्षित माहौल बनाने के लिए सेफ सिटी प्रोजेक्ट शुरू किया गया है लेकिन भवन मालिकों का सहयोग नहीं मिल रहा है। हमारी टीम केवल परिसर के बाहर लगे कैमरों का ही प्रयोग करेगी। इसमें किसी तरह का जोखिम नहीं है। - एनके चौधरी, मुख्य अभियंता, नगर निगम निर्माण विभाग