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Ghaziabad News: रूपनगर अवैध पटाखा फैक्टरी धमाके ने ली सातवीं जान
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लोनी। रूपनगर कॉलोनी स्थित पटाखा फैक्टरी धमाके में घायल हुई नूरी (17) ने भी मंगलवार सुबह घर में दम तोड़ दिया। दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में हो रहे इलाज से संतुष्ट नहीं होने पर परिजन नूरी को घर ले आए थे। नूरी का मेरठ में रहने वाला एक वैद्य इलाज कर रहा था। घटना में अब तक दो बच्चों समेत सात मौत हो चुकी हैं। रूपनगर कॉलोनी में शारिक की अवैध रूप से संचालित पटाखा फैक्टरी ने दो बच्चों, तीन महिला, एक किशोरी और एक युवक की जान ले ली। इस घटना में एक युवक घायल था, जो अब ठीक है। घटना में घायल 17 वर्षीय नूरी ने 25 दिनों बाद दम तोड़ दिया। जीटीबी अस्पताल से इलाज के बाद नूरी का घर में वैद्य द्वारा इलाज किया जा रहा था। उसकी मरहम-पट्टी से नूरी को आराम भी आने लगा था। वह खुद खाने और पीने लगी थी। परिवार के सदस्यों से बात करती थी। परिजनों ने बताया कि तीन दिनों से नूरी घर के बाहर आने की बात कह रही थी। मंगलवार को परिजनों ने नूरी के जिद करने पर उसे घर के आंगन में खाट पर लेटा दिया। आंगन में आने के बाद नूरी की तबीयत खराब होने लगी। परिजनों ने डॉक्टरों को बुलाया लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। आंगन में आते ही नूरी ने दम तोड़ दिया। नूरी की मौत होने पर लोगों की भीड़ एकत्रित होने लगी। पुलिस को इसकी सूचना मिली। सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची। परिजन पहले तो नूरी के शव को पोस्टमार्टम पर भेजने से इन्कार करने लगे लेकिन आसपास के लोगों की समझाने पर परिजन मान गए। एसीपी रजनीश कुमार उपाध्याय ने बताया कि पटाखा फैक्टरी धमाके के मामले में पुलिस जल्द चार्जशीट पेश करने जा रही है। सभी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने का इंतजार है। वहीं इस फैक्टरी से संबंधित तीनों आरोपियों शारिक, विकास गोयल और भूस्वामी को गिरफ्तार कर लिया गया था।
कर्ज लेकर परिजनों ने नूरी को बचाने का प्रयास किया था
नूरी के पिता मजदूरी करते हैं। मां और बहन घर में धागे काटने का काम करती हैं। नूरी भी पटाखा फैक्टरी में काम कर घर चलाने में मदद करती थी। नूरी के घायल होने पर परिवार में इलाज का भार आने लगा। मेरठ से आ रहा वैद्य भी 3500 रुपये लेता था। बाहर की दवाई भी हजारों में आती थी। नूरी को बचाने के लिए परिजनों ने आसपास के लोगों से कर्ज लेना शुरू कर दिया था। करीब 50 हजार रुपये का कर्ज वह नूरी के इलाज के लिए ले चुके हैं।
इनकी हो चुकी है मौत
रूपनगर पटाखा फैक्टरी धमाके में मेहविश (40), मेहविश का बेटा इमरान (18), शाहिस्ता (35), शाहिस्ता की दो बेटी अलीना (08), अलीशा (09), गीता (27) और नूरी (17) की मौत हो चुकी है।
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इन पुलिस कर्मियों पर हुई कार्रवाई
रूपनगर पुलिस चौकी से कुछ दूरी पर पटाखा फैक्टरी संचालित होने के मामले में अधिकारियों ने तत्कालीन चौकी प्रभारी रमेश चंद गौतम, बीट कांस्टेबल कौशल सिंह और दिनेश कुमार को हटा दिया था। डीसीपी विवेक यादव ने मामले में जांच के आदेश दिए थे।
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कर्ज लेकर परिजनों ने नूरी को बचाने का प्रयास किया था
नूरी के पिता मजदूरी करते हैं। मां और बहन घर में धागे काटने का काम करती हैं। नूरी भी पटाखा फैक्टरी में काम कर घर चलाने में मदद करती थी। नूरी के घायल होने पर परिवार में इलाज का भार आने लगा। मेरठ से आ रहा वैद्य भी 3500 रुपये लेता था। बाहर की दवाई भी हजारों में आती थी। नूरी को बचाने के लिए परिजनों ने आसपास के लोगों से कर्ज लेना शुरू कर दिया था। करीब 50 हजार रुपये का कर्ज वह नूरी के इलाज के लिए ले चुके हैं।
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इनकी हो चुकी है मौत
रूपनगर पटाखा फैक्टरी धमाके में मेहविश (40), मेहविश का बेटा इमरान (18), शाहिस्ता (35), शाहिस्ता की दो बेटी अलीना (08), अलीशा (09), गीता (27) और नूरी (17) की मौत हो चुकी है।
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इन पुलिस कर्मियों पर हुई कार्रवाई
रूपनगर पुलिस चौकी से कुछ दूरी पर पटाखा फैक्टरी संचालित होने के मामले में अधिकारियों ने तत्कालीन चौकी प्रभारी रमेश चंद गौतम, बीट कांस्टेबल कौशल सिंह और दिनेश कुमार को हटा दिया था। डीसीपी विवेक यादव ने मामले में जांच के आदेश दिए थे।