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Ghaziabad News: संगीत की दुनिया में नई पहचान बना रहे रेवेन्यू इंस्पेक्टर आशु गुज्जर
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संजना तिवारी
सरकारी नौकरी की जिम्मेदारियां और संगीत की दुनिया में कुछ अलग कर गुजरने का जुनून, दोनों को साथ लेकर चलना आसान नहीं है। लेकिन आशु गुज्जर ने इसे अपने जीवन का हिस्सा बना लिया है। नगर निगम के यातायात विभाग में रेवेन्यू इंस्पेक्टर के पद पर जिम्मेदारी निभाने के साथ वह गीत लेखन, गायन और म्यूजिक प्रोडक्शन के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बना रहे हैं। आजकल उनका सौ दो सौ की टोली मेंए मैं अकेला ही शेर भतेरा गीत खूब चचा है।
आशु के परिवार की उनसे अपेक्षाएं कुछ अलग थीं, लेकिन उनका मन संगीत में रमता था। आशु गुज्जर के अंतरमन में संगीत के प्रति लगाव स्कूल के दिनों में ही पनपने लगा। ग्रेटर नोएडा के एक स्कूल में आठवीं कक्षा की पढ़ाई के दौरान उनकी मुलाकात अंग्रेजी के एक शिक्षक से हुई, जो खुद भी अच्छे गायक थे। शिक्षक से उन्हें संगीत की बारीकियां सीखने और अपनी प्रतिभा को पहचानने का अवसर मिला। यहीं से गायन के प्रति उनका आकर्षण बढ़ने लगा। वर्ष 2013 में उन्होंने ऑडिशन देने शुरू किए और संगीत की दुनिया में अपनी जगह बनाने की कोशिश की। हालांकि, उनका यह सफर आसान नहीं था। आशु का परिवार सेना से जुड़ा रहा है और परिजन चाहते थे कि वह भी सेना में जाकर परिवार की परंपरा को आगे बढ़ाएं, लेकिन आशु गुज्जर की रुचि संगीत में थी। उनके इस फैसले को लेकर परिवार का पूरा समर्थन नहीं मिला, मगर मां ने उनका हौसला बनाए रखा।
सरकारी नौकरी के सफर में भी कायम रहा जुनून
वर्ष 2021 में वह नगर निगम के यातायात विभाग से जुड़े और रेवेन्यू इंस्पेक्टर के पद पर काम करने लगे। नौकरी की जिम्मेदारियों के बीच भी उन्होंने संगीत से अपना नाता नहीं टूटने दिया। उनके लिए सरकारी सेवा आजीविका का माध्यम है, जबकि गीत लिखना और गाना उनके व्यक्तित्व का वह हिस्सा है, जिसे वह लगातार आगे बढ़ाना चाहते हैं।
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प्रोडक्शन हाउस की शुरुआत कर बढ़ाए कदम
संगीत के क्षेत्र में अपने सपनों को आकार देने के लिए आशु ने वर्ष 2016 में गुरु प्रोडक्शन हाउस की शुरुआत की। उन्होंने गीत लेखन और संगीत से जुड़े विभिन्न प्रोजेक्ट में काम किया। ‘प्रतिशोध’, ‘लोफर’ और ‘मलंग’ जैसे प्रोजेक्ट से उनका जुड़ाव रहा है। ‘मां की सौगंध’ और ‘सौ दो सौ की टोली आदि गीत भी उनकी संगीत यात्रा का हिस्सा हैं। ‘बदमाशी’ गीत में गायक अमित बैंसला के साथ भी उनका जुड़ाव रहा है। आशु की कोशिश केवल अपनी पहचान बनाने तक सीमित नहीं है।
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प्रमुख अवार्ड-- --
खुर्जा की तरफ से उनको ईको फिल्म अवॉर्ड, सोनोटेक म्यूजिक अवॉर्ड, बाबा फिल्म प्रोडक्शन की तरफ से रियल आर्टिस्ट अवॉर्ड, समनिया प्रोडक्शन की तरफ से रियल इंस्टा अवार्ड, सपना प्रोडक्शन की तरफ से रियल एक्टर अवार्ड आदि मौजद
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सरकारी नौकरी की जिम्मेदारियां और संगीत की दुनिया में कुछ अलग कर गुजरने का जुनून, दोनों को साथ लेकर चलना आसान नहीं है। लेकिन आशु गुज्जर ने इसे अपने जीवन का हिस्सा बना लिया है। नगर निगम के यातायात विभाग में रेवेन्यू इंस्पेक्टर के पद पर जिम्मेदारी निभाने के साथ वह गीत लेखन, गायन और म्यूजिक प्रोडक्शन के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बना रहे हैं। आजकल उनका सौ दो सौ की टोली मेंए मैं अकेला ही शेर भतेरा गीत खूब चचा है।
आशु के परिवार की उनसे अपेक्षाएं कुछ अलग थीं, लेकिन उनका मन संगीत में रमता था। आशु गुज्जर के अंतरमन में संगीत के प्रति लगाव स्कूल के दिनों में ही पनपने लगा। ग्रेटर नोएडा के एक स्कूल में आठवीं कक्षा की पढ़ाई के दौरान उनकी मुलाकात अंग्रेजी के एक शिक्षक से हुई, जो खुद भी अच्छे गायक थे। शिक्षक से उन्हें संगीत की बारीकियां सीखने और अपनी प्रतिभा को पहचानने का अवसर मिला। यहीं से गायन के प्रति उनका आकर्षण बढ़ने लगा। वर्ष 2013 में उन्होंने ऑडिशन देने शुरू किए और संगीत की दुनिया में अपनी जगह बनाने की कोशिश की। हालांकि, उनका यह सफर आसान नहीं था। आशु का परिवार सेना से जुड़ा रहा है और परिजन चाहते थे कि वह भी सेना में जाकर परिवार की परंपरा को आगे बढ़ाएं, लेकिन आशु गुज्जर की रुचि संगीत में थी। उनके इस फैसले को लेकर परिवार का पूरा समर्थन नहीं मिला, मगर मां ने उनका हौसला बनाए रखा।
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सरकारी नौकरी के सफर में भी कायम रहा जुनून
वर्ष 2021 में वह नगर निगम के यातायात विभाग से जुड़े और रेवेन्यू इंस्पेक्टर के पद पर काम करने लगे। नौकरी की जिम्मेदारियों के बीच भी उन्होंने संगीत से अपना नाता नहीं टूटने दिया। उनके लिए सरकारी सेवा आजीविका का माध्यम है, जबकि गीत लिखना और गाना उनके व्यक्तित्व का वह हिस्सा है, जिसे वह लगातार आगे बढ़ाना चाहते हैं।
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प्रोडक्शन हाउस की शुरुआत कर बढ़ाए कदम
संगीत के क्षेत्र में अपने सपनों को आकार देने के लिए आशु ने वर्ष 2016 में गुरु प्रोडक्शन हाउस की शुरुआत की। उन्होंने गीत लेखन और संगीत से जुड़े विभिन्न प्रोजेक्ट में काम किया। ‘प्रतिशोध’, ‘लोफर’ और ‘मलंग’ जैसे प्रोजेक्ट से उनका जुड़ाव रहा है। ‘मां की सौगंध’ और ‘सौ दो सौ की टोली आदि गीत भी उनकी संगीत यात्रा का हिस्सा हैं। ‘बदमाशी’ गीत में गायक अमित बैंसला के साथ भी उनका जुड़ाव रहा है। आशु की कोशिश केवल अपनी पहचान बनाने तक सीमित नहीं है।
प्रमुख अवार्ड
खुर्जा की तरफ से उनको ईको फिल्म अवॉर्ड, सोनोटेक म्यूजिक अवॉर्ड, बाबा फिल्म प्रोडक्शन की तरफ से रियल आर्टिस्ट अवॉर्ड, समनिया प्रोडक्शन की तरफ से रियल इंस्टा अवार्ड, सपना प्रोडक्शन की तरफ से रियल एक्टर अवार्ड आदि मौजद