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Ghaziabad News: लोनी में अवैध तरीके से अल्ट्रासाउंड करने पर सेंटर का पंजीकरण निरस्त
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गाजियाबाद। लोनी में अवैध तरीके से अल्ट्रासाउंड जांच करने पर केंद्र का पंजीकरण निरस्त कर दिया गया है। पंजीकरण कराने वाले सोनोलॉजिस्ट को भी स्वास्थ्य विभाग ने नोटिस जारी किया है। बुधवार को स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए अप्रशिक्षित सहित तीन लोगों को गर्भवती की अल्ट्रासाउंड जांच करते हुए गिरफ्तार किया था। बृहस्पतिवार को लोनी बॉर्डर पुलिस ने गिरफ्तार तीनों आरोपियों को अदालत में पेश किया। जहां से अदालत ने न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।
पीसीपीएनडीटी के नोडल अधिकारी व अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. चरण सिंह ने बताया कि विभाग ने केंद्र का पंजीकरण रद्द कर दिया है। फाइल को जिलाधिकारी के पास भेजा गया है। इसके अलावा केंद्र पर पंजीकृत सोनोलॉजिस्ट डाॅ. केके फुक्कन को भी नोटिस जारी किया गया है।
यह था घटनाक्रम
सोनीपत और गाजियाबाद के स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बुधवार को लोनी के शिवा अल्ट्रासाउंड केंद्र पर छापा मारकर अल्ट्रासाउंड मशीन को सील कर दिया था। केंद्र पर सोनीपत के दलाल साहब सिंह के माध्यम से संजय ने नकली ग्राहक (महिला) से 30 हजार रुपये लेकर भ्रूण लिंग परीक्षण किया। इस कार्य में धीरज मिश्रा ने फर्जी ग्राहक बनी गर्भवती महिला का परीक्षण किया और महिला के गर्भ में पल रहे भ्रूण की पहचान लड़का बताया था। टीम ने तीनों आरोपियों को दबोचकर लोनी बॉर्डर पुलिस को सौंप दिया था। नोडल अधिकारी डॉ चरन सिंह ने बताया कि चिकित्सक के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
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29 मामलों में दर्ज हुए केस, नहीं हुई गवाही
जिले में अलग-अलग क्षेत्रों में हुए लिंग परीक्षण का खुलासा होने पर स्वास्थ्य विभाग के तत्कालीन अधिकारियों ने पिछले पांच साल में 29 मामलों में अलग-अलग समय में अदालत में केस दर्ज कराया है। पांच साल में किसी भी मामले में गवाही नहीं हो पाई है। जबकि लिंग परीक्षण करने वाले आरोपी दो से तीन महीने बाद जेल से बाहर आ जाते हैं और दोबारा खेल शुरू कर देते हैं। इसका खुलासा भी स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई में हो चुका है। पीसीपीएनडीटी के विधि सलाहकार अधिवक्ता उमेश गुप्ता का कहना है कि नोडल प्रभारियों के तबादले के बाद चार्ज मौजूदा अधिकारी के पास चला जाता है लेकिन मुकदमा जिस नोडल अधिकारी के हस्ताक्षर पर होता है, उसे ही पेश होना पड़ता है। कई बार समन आने के बाद अधिकारियों के पास तक पहुंच नहीं पाता है। इस कारण से गवाही अधूरी रह जाती है।
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पीसीपीएनडीटी के नोडल अधिकारी व अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. चरण सिंह ने बताया कि विभाग ने केंद्र का पंजीकरण रद्द कर दिया है। फाइल को जिलाधिकारी के पास भेजा गया है। इसके अलावा केंद्र पर पंजीकृत सोनोलॉजिस्ट डाॅ. केके फुक्कन को भी नोटिस जारी किया गया है।
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यह था घटनाक्रम
सोनीपत और गाजियाबाद के स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बुधवार को लोनी के शिवा अल्ट्रासाउंड केंद्र पर छापा मारकर अल्ट्रासाउंड मशीन को सील कर दिया था। केंद्र पर सोनीपत के दलाल साहब सिंह के माध्यम से संजय ने नकली ग्राहक (महिला) से 30 हजार रुपये लेकर भ्रूण लिंग परीक्षण किया। इस कार्य में धीरज मिश्रा ने फर्जी ग्राहक बनी गर्भवती महिला का परीक्षण किया और महिला के गर्भ में पल रहे भ्रूण की पहचान लड़का बताया था। टीम ने तीनों आरोपियों को दबोचकर लोनी बॉर्डर पुलिस को सौंप दिया था। नोडल अधिकारी डॉ चरन सिंह ने बताया कि चिकित्सक के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
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29 मामलों में दर्ज हुए केस, नहीं हुई गवाही
जिले में अलग-अलग क्षेत्रों में हुए लिंग परीक्षण का खुलासा होने पर स्वास्थ्य विभाग के तत्कालीन अधिकारियों ने पिछले पांच साल में 29 मामलों में अलग-अलग समय में अदालत में केस दर्ज कराया है। पांच साल में किसी भी मामले में गवाही नहीं हो पाई है। जबकि लिंग परीक्षण करने वाले आरोपी दो से तीन महीने बाद जेल से बाहर आ जाते हैं और दोबारा खेल शुरू कर देते हैं। इसका खुलासा भी स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई में हो चुका है। पीसीपीएनडीटी के विधि सलाहकार अधिवक्ता उमेश गुप्ता का कहना है कि नोडल प्रभारियों के तबादले के बाद चार्ज मौजूदा अधिकारी के पास चला जाता है लेकिन मुकदमा जिस नोडल अधिकारी के हस्ताक्षर पर होता है, उसे ही पेश होना पड़ता है। कई बार समन आने के बाद अधिकारियों के पास तक पहुंच नहीं पाता है। इस कारण से गवाही अधूरी रह जाती है।