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Ghaziabad News: रेलवे स्टेशन की पार्किंग में 25 की जगह 50 रुपये की वसूली
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गाजियाबाद। रेलवे स्टेशन की पार्किंग में कार खड़ी करने का निर्धारित शुल्क 25 रुपये है जबकि ठेकेदार वसूली कर रहा है 50 रुपये की। खेल बड़ा है। रोज सैकड़ों कारें यहां खड़ी की जाती हैं। दोगुना पार्किंग शुल्क वसूल करने के लिए ठेकेदार ने फर्जी रसीदें छपवा रखी हैं। ऐसी शिकायतें स्टेशन अधीक्षक के पास पहुंची हैं। उन्होंने जांच कराकर कार्रवाई करने की बात कही है।
विजयनगर की इस पार्किंग में असली और फर्जी रसीद में फर्क करना मुश्किल है। फर्जी रसीद कंप्यूटराइज्ड है। पार्किंग का शुल्क पता करने का और कोई जरिया भी नहीं है। पार्किंग में शुल्क का बोर्ड नहीं लगाया गया है। फर्जी रसीद पर ठेकेदार का नाम भी नहीं है। ठेकेदार के कर्मचारी यही बताते हैं कि कार की पार्किंग का शुल्क 50 रुपये है।
कर्मचारी कार पार्क करने वाले लोगों को फर्जी रसीद थमाते हैं और उसकी जगह असली रसीद काटकर अपने पास रख लेते हैं। अगर कोई शिकायत करे तो असली रसीद दिखा देते हैं। शनिवार की सुबह ऐसा ही एक मामला आया। शिकायत स्टेशन अधीक्षक पंकज मित्तल के पास पहुंची। कर्मचारी ने पार्किंग के कर्मचारी को बुलाया तो वह असली रसीद लेकर पहुंचा। फर्जी रसीद उसे दिखाई तो गर्दन नीची करके चुप खड़ा हो गया और कहने लगा कि गलती हो गई, आगे से नहीं होगी।
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छह घंटे का शुल्क 25 रुपये
पार्किंग ठेके का रिकाॅर्ड देखने पर पता चला कि चार पहिया वाहन का पार्किंग शुल्क छह घंटे तक का 25 रुपये है। अगर 24 घंटे तक कार खड़ी रहे तो 100 रुपये लिए जाते हैं। यहां रोजना 200-300 चार पहिया और करीब 400 दो पहिया वाहन पार्क होते हैं। तीन साल के लिए रेलवे ने ठेका दे रखा है।
असली पर्ची पर ठेकेदार का नाम
ठेकेदार की ओर से दो पर्ची निकाली जा रही है। दोनों पर्ची लगभग एक जैसी हैं। एक पर्ची पर वेंडर का नाम लखविंदर लिखा है। और छह घंटे तक पार्किंग शुल्क 25 रुपये लिखा है, जबकि दूसरी पर्ची पर वेंडर का नाम गायब है और छह घंटे तक का पार्किंग शुल्क 50 रुपये लिखा है।
होगी कार्रवाई
स्टेशन अधीक्षक पंकज मित्तल का कहना है कि अवैध वसूली करने वाले ठेकेदार को चेतावनी जारी कर दी गई है। जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी। रेट लिस्ट का बोर्ड लगाने का निर्देश दिया गया है।
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विजयनगर की इस पार्किंग में असली और फर्जी रसीद में फर्क करना मुश्किल है। फर्जी रसीद कंप्यूटराइज्ड है। पार्किंग का शुल्क पता करने का और कोई जरिया भी नहीं है। पार्किंग में शुल्क का बोर्ड नहीं लगाया गया है। फर्जी रसीद पर ठेकेदार का नाम भी नहीं है। ठेकेदार के कर्मचारी यही बताते हैं कि कार की पार्किंग का शुल्क 50 रुपये है।
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कर्मचारी कार पार्क करने वाले लोगों को फर्जी रसीद थमाते हैं और उसकी जगह असली रसीद काटकर अपने पास रख लेते हैं। अगर कोई शिकायत करे तो असली रसीद दिखा देते हैं। शनिवार की सुबह ऐसा ही एक मामला आया। शिकायत स्टेशन अधीक्षक पंकज मित्तल के पास पहुंची। कर्मचारी ने पार्किंग के कर्मचारी को बुलाया तो वह असली रसीद लेकर पहुंचा। फर्जी रसीद उसे दिखाई तो गर्दन नीची करके चुप खड़ा हो गया और कहने लगा कि गलती हो गई, आगे से नहीं होगी।
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छह घंटे का शुल्क 25 रुपये
पार्किंग ठेके का रिकाॅर्ड देखने पर पता चला कि चार पहिया वाहन का पार्किंग शुल्क छह घंटे तक का 25 रुपये है। अगर 24 घंटे तक कार खड़ी रहे तो 100 रुपये लिए जाते हैं। यहां रोजना 200-300 चार पहिया और करीब 400 दो पहिया वाहन पार्क होते हैं। तीन साल के लिए रेलवे ने ठेका दे रखा है।
असली पर्ची पर ठेकेदार का नाम
ठेकेदार की ओर से दो पर्ची निकाली जा रही है। दोनों पर्ची लगभग एक जैसी हैं। एक पर्ची पर वेंडर का नाम लखविंदर लिखा है। और छह घंटे तक पार्किंग शुल्क 25 रुपये लिखा है, जबकि दूसरी पर्ची पर वेंडर का नाम गायब है और छह घंटे तक का पार्किंग शुल्क 50 रुपये लिखा है।
होगी कार्रवाई
स्टेशन अधीक्षक पंकज मित्तल का कहना है कि अवैध वसूली करने वाले ठेकेदार को चेतावनी जारी कर दी गई है। जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी। रेट लिस्ट का बोर्ड लगाने का निर्देश दिया गया है।

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