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Ghaziabad News: अधूरी सड़क से स्टेशन पहुंचना मुश्किल, जाम ने बढ़ाई परेशानी
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गाजियाबाद। रेलवे स्टेशन जाने वाले यात्रियों की परेशानी प्लेटफॉर्म पर नहीं, उससे पहले ही शुरू हो जाती है। जीटी रोड से स्टेशन को जोड़ने वाली मुख्य सड़क करीब ढाई महीने से अधूरी पड़ी है। एक साइड का हिस्सा बनने के बाद दूसरी साइड का काम रोक दिया गया है। ऐसे में दोनों तरफ के वाहनों का पूरा लोड एक ही हिस्से पर है। दिन में ई-रिक्शा और निजी वाहनों और रात में यार्ड से निकलने वाले ट्रकों के कारण रोज जाम लग रहा है।
स्टेशन की इस सड़क पर जगह पहले से कम है। ऐसे में आमने-सामने से आने वाले वाहन एक-दूसरे के रास्ते में फंस जाते हैं। दिन में वाहनों का दबाव और रात में बड़े ट्रकों की एंट्री से हालात और खराब हो जाते हैं। सबसे ज्यादा परेशानी देर रात ट्रेन पकड़ने या ट्रेन से उतरकर बाहर निकलने वाले यात्रियों को हो रही है। जाम में फंसने के बाद यात्री ऑटो और कैब से उतरकर हाथ में सामान लेकर पैदल स्टेशन की ओर भागते दिखते हैं।
रविवार देर रात भी स्टेशन के बाहर यही नजारा रहा। रात करीब 11 बजे ट्रकों की आवाजाही बढ़ते ही मुख्य सड़क पर लंबा जाम लग गया। कई यात्रियों को बीच रास्ते में ही उतरना पड़ा। ट्रेन छूटने के डर से लोग सामान कंधे पर लेकर जाम के बीच से रास्ता बनाते हुए स्टेशन पहुंचे।
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परिजन को लेने आए श्याम ने बताया कि वह रात में स्टेशन पहुंचे तो बाहर जाम लगा था। तैयार सड़क और कच्चे हिस्से के बीच करीब एक फीट से ज्यादा ऊंचाई का अंतर है, जिससे गाड़ी नीचे उतारना मुश्किल था। मजबूरी में उन्हें वाहन सड़क पर ही खड़ा करना पड़ा और परिजन को फोन कर पैदल बाहर बुलाना पड़ा।
ऊंचाई का यह अंतर हादसे का कारण भी बन रहा है। रविवार रात सामने से आ रहे ट्रक को पास देने के चक्कर में एक कैब अधूरे हिस्से की ओर उतरी और ऊंचाई में फंस गई। चालक को ईंट-पत्थर लगाकर काफी मशक्कत के बाद गाड़ी निकालनी पड़ी। इस दौरान कार के नीचे का हिस्सा क्षतिग्रस्त भी हो गया।
बॉक्स:
धूल फुला रही यात्रियों की सांसें
अधूरी सड़क ने परेशानी को जाम तक सीमित नहीं रखा। कच्चे हिस्से से गुजरने वाले वाहनों से पूरे दिन धूल का गुबार उड़ रहा है। पैदल जाने वाले यात्रियों को मुंह पर रुमाल बांधकर चलना पड़ रहा है। यात्रियों का कहना है कि निर्माण के दौरान पानी का छिड़काव भी नियमित नहीं हो रहा। यात्री हैप्पी ने बताया कि रास्ते में इतनी धूल उड़ती है कि बिना मुंह ढके निकलना मुश्किल है, कपड़े तक खराब हो जाते हैं। निर्माण से परेशानी समझ आती है, लेकिन पानी का छिड़काव होता तो राहत मिलती।
बोले यात्री
रास्ते पर धूल से ज्यादा परेशानी है। सड़क जर्जर होने से धूल उड़ती है, रोज ऐसे रास्ते से गुजरना मुश्किल है। - शब्बीर, यात्री
आधा रास्ता ही बना है, इसलिए दिन में भी वाहनों का अधिक दबाव रहता है और निकलने में दिक्कत होती है। - सुमित, यात्री
रास्ता ऊंचा-नीचा होने से समस्या बढ़ गई है। निर्माण पूरा हो जाता तो बेहतर रहता, अधूरे निर्माण से अधिक परेशानी हो रही है। - साबिर, यात्री
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स्टेशन की इस सड़क पर जगह पहले से कम है। ऐसे में आमने-सामने से आने वाले वाहन एक-दूसरे के रास्ते में फंस जाते हैं। दिन में वाहनों का दबाव और रात में बड़े ट्रकों की एंट्री से हालात और खराब हो जाते हैं। सबसे ज्यादा परेशानी देर रात ट्रेन पकड़ने या ट्रेन से उतरकर बाहर निकलने वाले यात्रियों को हो रही है। जाम में फंसने के बाद यात्री ऑटो और कैब से उतरकर हाथ में सामान लेकर पैदल स्टेशन की ओर भागते दिखते हैं।
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रविवार देर रात भी स्टेशन के बाहर यही नजारा रहा। रात करीब 11 बजे ट्रकों की आवाजाही बढ़ते ही मुख्य सड़क पर लंबा जाम लग गया। कई यात्रियों को बीच रास्ते में ही उतरना पड़ा। ट्रेन छूटने के डर से लोग सामान कंधे पर लेकर जाम के बीच से रास्ता बनाते हुए स्टेशन पहुंचे।
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परिजन को लेने आए श्याम ने बताया कि वह रात में स्टेशन पहुंचे तो बाहर जाम लगा था। तैयार सड़क और कच्चे हिस्से के बीच करीब एक फीट से ज्यादा ऊंचाई का अंतर है, जिससे गाड़ी नीचे उतारना मुश्किल था। मजबूरी में उन्हें वाहन सड़क पर ही खड़ा करना पड़ा और परिजन को फोन कर पैदल बाहर बुलाना पड़ा।
ऊंचाई का यह अंतर हादसे का कारण भी बन रहा है। रविवार रात सामने से आ रहे ट्रक को पास देने के चक्कर में एक कैब अधूरे हिस्से की ओर उतरी और ऊंचाई में फंस गई। चालक को ईंट-पत्थर लगाकर काफी मशक्कत के बाद गाड़ी निकालनी पड़ी। इस दौरान कार के नीचे का हिस्सा क्षतिग्रस्त भी हो गया।
बॉक्स:
धूल फुला रही यात्रियों की सांसें
अधूरी सड़क ने परेशानी को जाम तक सीमित नहीं रखा। कच्चे हिस्से से गुजरने वाले वाहनों से पूरे दिन धूल का गुबार उड़ रहा है। पैदल जाने वाले यात्रियों को मुंह पर रुमाल बांधकर चलना पड़ रहा है। यात्रियों का कहना है कि निर्माण के दौरान पानी का छिड़काव भी नियमित नहीं हो रहा। यात्री हैप्पी ने बताया कि रास्ते में इतनी धूल उड़ती है कि बिना मुंह ढके निकलना मुश्किल है, कपड़े तक खराब हो जाते हैं। निर्माण से परेशानी समझ आती है, लेकिन पानी का छिड़काव होता तो राहत मिलती।
बोले यात्री
रास्ते पर धूल से ज्यादा परेशानी है। सड़क जर्जर होने से धूल उड़ती है, रोज ऐसे रास्ते से गुजरना मुश्किल है। - शब्बीर, यात्री
आधा रास्ता ही बना है, इसलिए दिन में भी वाहनों का अधिक दबाव रहता है और निकलने में दिक्कत होती है। - सुमित, यात्री
रास्ता ऊंचा-नीचा होने से समस्या बढ़ गई है। निर्माण पूरा हो जाता तो बेहतर रहता, अधूरे निर्माण से अधिक परेशानी हो रही है। - साबिर, यात्री