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Ghaziabad News: सरल ऑटो स्क्रैपिंग पर छापा, 1.49 करोड़ रुपये की कर चोरी उजागर
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गाजियाबाद। गाजियाबाद में सरल ऑटो स्क्रैपिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड फर्म पर राज्य कर विभाग की टीम ने जांच कर करीब 1.49 करोड़ रुपये की कर चोरी पकड़ी है। फर्म पर फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने और बिना माल के ई-वे बिल जारी करने का आरोप है।
यह कार्रवाई जोन प्रथम के अपर आयुक्त ग्रेड द्वितीय रामकेश्वर के निर्देश पर संयुक्त आयुक्त सुजाता सिंह के नेतृत्व में की गई। उन्होंने बताया कि फर्म निष्प्रयोज्य वाहनों की खरीद और कटिंग कर स्क्रैप की आपूर्ति करती है। कारोबारी के यहां करीब यह जांच दोपहर 12 बजे से रात करीब 11 बजे तक चली है। डेटा विश्लेषण और पोर्टल पर मिली विसंगतियों के आधार पर यह जांच की गई। जांच में फर्म की ओर से दिल्ली स्थित एक फर्म से 5.82 लाख रुपये का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट प्राप्त करना सामने आया। ई-वे बिलों से संबंधित 15 वाहनों की लोकेशन जांचने पर वे किसी भी टोल से गुजरते नहीं पाए गए। इससे स्पष्ट हुआ कि माल की वास्तविक आपूर्ति नहीं की जा रही थी। केवल कागजों पर ही माल का आदान-प्रदान दिखाया जा रहा था। जांच के दौरान फर्म के पास 5.13 करोड़ रुपये का अघोषित स्टॉक अधिक पाया गया। वहीं, 2.83 करोड़ रुपये का स्टॉक कम मिला। व्यापारी को जब्त किए गए माल पर नियमानुसार कर, अर्थदंड और जुर्माना जमा करने का निर्देश दिया गया है। विभाग की ओर से इस मामले में आगे की कार्रवाई जारी है। टीम सभी दस्तावेजों को जब्त कर अपने साथ ले आई है। आगे का आकलन किया जा रहा है। जांच टीम में उपायुक्त राकेश सिंह, सहायक आयुक्त रविकांत और राज्य कर अधिकारी रियाजुद्दीन अंसारी, विनोद कुमार दुबे व अनिल चौहान शामिल रहे।
फर्म की ओर से जारी सीओडी का भी किया जाएगा आकलन
संयुक्त ने बताया कि फर्म की ओर से वाहन की खरीद के दौरान वाहन स्वामियों को भारी संख्या में सीओडी यानी सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट जारी किए गए। लेकिन राज्यकर विभाग को खरीद की संख्या कम दिखाई गई। बताया कि अभी शुरुआती आकलन में करीब 25 हजार सीओडी पाए गए हैं। अब परिवहन विभाग से इसकी जानकारी की जा रही है कि कितने वाहनों को सीओडी के आधार पर सब्सिडी दी गई है। वहीं, राज्यकर विभाग को कर का चूना लगाया है।
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यह कार्रवाई जोन प्रथम के अपर आयुक्त ग्रेड द्वितीय रामकेश्वर के निर्देश पर संयुक्त आयुक्त सुजाता सिंह के नेतृत्व में की गई। उन्होंने बताया कि फर्म निष्प्रयोज्य वाहनों की खरीद और कटिंग कर स्क्रैप की आपूर्ति करती है। कारोबारी के यहां करीब यह जांच दोपहर 12 बजे से रात करीब 11 बजे तक चली है। डेटा विश्लेषण और पोर्टल पर मिली विसंगतियों के आधार पर यह जांच की गई। जांच में फर्म की ओर से दिल्ली स्थित एक फर्म से 5.82 लाख रुपये का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट प्राप्त करना सामने आया। ई-वे बिलों से संबंधित 15 वाहनों की लोकेशन जांचने पर वे किसी भी टोल से गुजरते नहीं पाए गए। इससे स्पष्ट हुआ कि माल की वास्तविक आपूर्ति नहीं की जा रही थी। केवल कागजों पर ही माल का आदान-प्रदान दिखाया जा रहा था। जांच के दौरान फर्म के पास 5.13 करोड़ रुपये का अघोषित स्टॉक अधिक पाया गया। वहीं, 2.83 करोड़ रुपये का स्टॉक कम मिला। व्यापारी को जब्त किए गए माल पर नियमानुसार कर, अर्थदंड और जुर्माना जमा करने का निर्देश दिया गया है। विभाग की ओर से इस मामले में आगे की कार्रवाई जारी है। टीम सभी दस्तावेजों को जब्त कर अपने साथ ले आई है। आगे का आकलन किया जा रहा है। जांच टीम में उपायुक्त राकेश सिंह, सहायक आयुक्त रविकांत और राज्य कर अधिकारी रियाजुद्दीन अंसारी, विनोद कुमार दुबे व अनिल चौहान शामिल रहे।
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फर्म की ओर से जारी सीओडी का भी किया जाएगा आकलन
संयुक्त ने बताया कि फर्म की ओर से वाहन की खरीद के दौरान वाहन स्वामियों को भारी संख्या में सीओडी यानी सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट जारी किए गए। लेकिन राज्यकर विभाग को खरीद की संख्या कम दिखाई गई। बताया कि अभी शुरुआती आकलन में करीब 25 हजार सीओडी पाए गए हैं। अब परिवहन विभाग से इसकी जानकारी की जा रही है कि कितने वाहनों को सीओडी के आधार पर सब्सिडी दी गई है। वहीं, राज्यकर विभाग को कर का चूना लगाया है।
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