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किराये की गाड़ियों के नाम पर निगम में हो रहा लाखों का खेल : महापौर

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 17 Sep 2026 01:17 AM IST
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Racket worth lakhs involving hired vehicles in the corporation: Mayor
गाजियाबाद। मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के कार्यक्रमों की तैयारियों को लेकर नगर निगम सदन में पार्षदों व महापौर के बीच हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। दोनों पक्ष एक दूसरे के ऊपर आरोप लगा रहे हैं।
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बुधवार को महापौर सुनीता दयाल ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर आरोप लगाया कि एक निजी कंपनी से नगर निगम कार किराये पर लेकर प्रतिमाह प्रति चार से पांच लाख रुपये का भुगतान किया जा रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी गाडी़ पर बिना जानकारी के जीपीएस सिस्टम लगाकर गैरकानूनी तरीके से निगरानी की जा रही थी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी नगर निगमों में नियमानुसार महापौर, नगर आयुक्त व अन्य अधिकारियों को निगम की अपनी गाड़ियां उपलब्ध करानी चाहिए। पदभार संभालने के बाद उन्हें वर्षों पुरानी गाड़ी दी गई थी, उसे बदलने की मांग उन्होंने कभी नहीं की। बाद में जब यह संज्ञान में आया कि निगम ने किराये पर ली जा रही गाड़ियों पर एक निजी कंपनी को हर महीने 40 से 50 हजार रुपये प्रति गाड़ी के हिसाब से भुगतान हो रहा है, तब इस फिजूलखर्ची पर रोक लगाने की दिशा में कदम उठाया गया।
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अधिकारियों ने शासन से अनुमति लेकर 12 जून को नगर निगम सदन की बैठक में तीन इनोवा और 6 स्कॉर्पियो गाड़ियां खरीदने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया था। इन गाड़ियों में से महापौर, नगर आयुक्त व आवश्यकतानुसार अन्य अधिकारियों को गाड़ियां आवंटित की गईं। महापौर ने दो टूक कहा कि गाड़ियों की खरीद प्रक्रिया और उनके आवंटन में उनका कोई व्यक्तिगत हस्तक्षेप नहीं होता। यदि खरीद में कोई अनियमितता हुई है, तो सक्षम अधिकारियों को साक्ष्य सौंपे जाएं ताकि निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई की जा सके।
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- भू-माफिया पर शिकंजे से बौखलाए कंपनी व उसके शुभचिंतक :
महापौर ने अपनी सुरक्षा पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि कंपनी द्वारा उनकी गाड़ी पर गुप्त रूप से जीपीएस लगाकर निगरानी रखना पूरी तरह अनैतिक और अवैध था। नगर निगम की जमीनों को भू-माफिया के चंगुल से मुक्त कराने के कारण पहले से ही सुरक्षा का संवेदनशील विषय बना हुआ है, इसके बावजूद उन्होंने संयम बनाए रखा। उन्होंने दावा किया कि किराये का खेल बंद होने से कंपनी को प्रतिमाह लाखों रुपये का नुकसान हुआ है, इसके चलते कंपनी और नगर निगम में बैठे उसके कुछ शुभचिंतक बौखलाहट में उनके खिलाफ अनर्गल व बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं।
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