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Ghaziabad News: दुकानों का किराया बढ़ाने का विरोध जारी, व्यापारियों ने निकाला जुलूस

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 11 Feb 2024 01:40 AM IST
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Protest against increase in rent of shops continues, traders take out procession
गाजियाबाद। नगर निगम की 1702 दुकानों का किराया बढ़ाए जाने के फैसले का विरोध शनिवार को भी जारी रहा। नगर निगम के खिलाफ लामबंद हुए विभिन्न बाजारों के व्यापारियों ने शनिवार को पहले घंटाघर पर धरना दिया, इसके बाद पुरानी सब्जी मंडी, दिल्ली गेट, चौपला बाजार, डासना गेट, रमते राम रोड समेत विभिन्न बाजारों में जुलूस निकाला। अब व्यापारी सोमवार को बाजार बंद कर नगर निगम कार्यालय का घेराव कर सकते हैं।
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सुबह 10 बजे गोल मार्केट, पुरानी सब्जी मंडी, रामानुज दयाल मार्केट, कविनगर सी-ब्लॉक समेत कई अन्य बाजारों के व्यापारी और व्यापार मंडल के पदाधिकारी घंटाघर स्थित शहीद भगत सिंह की प्रतिमा के पास इकट्ठा हुए। उन्होंने नगर निगम के खिलाफ धरना दिया। व्यापारियों ने नगर निगम के अधिकारियों पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए कहा कि एक साथ किराए में छह से आठ गुना बढ़ोत्तरी करना अन्याय है। व्यापारियों का उत्पीड़न किया जा रहा है।
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गोल मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव लाहोरिया ने बताया कि नगर पालिका ने करीब साठ साल पूर्व फड़ यानी चबूतरे के रूप में बंटवारे के बाद पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए दी गई थी। उस वक्त इन दुकानों को लेने के लिए कोई तैयार नहीं था। प्रत्येक दुकान के लिए तीन से चार लाख रुपये पगड़ी की रकम भी ली गई थी। इसके बाद जिन दुकानों का हस्तांतरण अगली पीढ़ी या अन्य व्यक्तियों को हो चुका है उसके लिए नगर निगम ने एक निर्धारित रकम जमा कराने के साथ-साथ दुकानों का किराया भी दोगुना कर दिया है। अब नगर निगम के अधिकारी एकतरफा निर्णय लेकर दुकानों का किराया 300 से 1500 रुपये प्रतिमाह की बजाय 12 से 18 हजार रुपये प्रतिमाह करना चाहते हैं। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के महानगर अध्यक्ष सुभाष छाबड़ा का कहना है कि ऐसा नहीं है कि दुकानदार किराया नहीं बढ़ाना चाहते हैं लेकिन 10 से 20 गुना किराया बढ़ाना जायज नहीं है। इससे दुकानदारों के लिए घर चलाना मुश्किल हो जाएगा।
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1997 में भी बढ़ाया गया था किराया
गोल मार्केट व्यापार मंडल के अध्यक्ष संजीव लाहोरिया ने बताया कि वर्ष 1997 में भी नगर निगम ने दुकानों का किराया बढ़ाया था। तत्कालीन महापौर दिनेश चंद्र गर्ग ने दुकानों की पैमाइश कराकर दो रुपये प्रति वर्ग फुट किराया तय कराया था। इसके साथ ही अगर कोई दुकान अन्य किसी दुकानदार के नाम हस्तांतरित कराई गई तो उसके लिए 100 रुपये प्रति वर्गफुट एकमुश्त रकम भी ली गई। इसके बाद जब भी दुकान का नामांतरण हुआ तो नगर निगम ने किराये की राशि दोगुना कर एकमुश्त रकम भी जमा कराई। उनका कहना है कि ऐसा नहीं है कि शुरूआत से दुकानों का किराया नहीं बढ़ा। आवंटित दरों से कई गुना तक किराया बढ़ चुका है।
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